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सांप के काटने से सात साल के बच्चे की मौत

Mon, 28 Aug 2017 10:48 PM IST
Updated Mon, 28 Aug 2017 10:48 PM IST
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सांप के काटने से सात साल के बच्चे की मौत
बढ़ापुर। मोहल्ला कस्साबान में सांप के काटने से एक बालक की मौत हो गई। कस्साबान के नफीस के संपूर्ण परिवार में मृतक समेत उसके दो पोते ही सामान्य थे जबकि उसका संपूर्ण परिवार मूक बधिर है। बच्चे के मूकबधिर दादा व पिता बच्चे को जीवनदान की लालसा में आसपास के कई गांवों में सांप के काटे का इलाज करने वालों की चौखट पर पहुंचे। हाथ जोड़कर इशारों में उसके मासूम बच्चे का इलाज कर उसकी जान बचा लेने की गुहार लगाई, लेकिन जान नहीं बचाई जा सकी।
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नफीस कुरैशी का नकटा नदी के किनारे कच्चा मकान है। नफीस के परिवार में पत्नी व चार बेटे व एक पुत्री है। नफीस समेत सभी परिवारजन मूकबधिर हैं। नफीस व उसका पुत्र हसीब मजदूरी कर अपने परिवार का खर्च चलाते हैं। नफीस ने अपने मूकबधिर बड़े पुत्र हसीब की आठ वर्ष पूर्व शादी कर दी थी। हसीब के सबसे बड़ा पुत्र सात वर्षीय बिलाल व दूसरा पुत्र चार वर्ष का है। जब नफीस के मूकबधिर परिवार में दो बच्चे सामान्य पैदा हुए। ये बोल भी सकते हैं तो नफीस व उसके परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
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नफीस का परिवार रविवार रात अपने घर में सोया हुआ था। मध्यरात्रि में एक सांप पिता हसीब के पास सोये सात वर्षीय बिलाल के ऊपर आ गिरा। सांप ने बिलाल के बायें कान व हाथ पर डसा तो बच्चे ने रोना शुरू कर दिया। बच्चे के जोर-जोर से रोने पर परिजन जाग गए । बच्चे ने अपने पिता व मूकबधिर परिजनों को इशारों में उसे सांप द्वारा डसे जाने की बात समझाई। सर्पदंश का शिकार हुए बालक के दादा ने टार्च की रोशनी में सांप को तलाशा तो सांप मूर्छित अवस्था में बच्चे की चारपाई के नीचे पड़ा मिला।
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बालक के दादा नफीस ने सांप को पकड़कर प्लास्टिक की बाल्टी में डाल दिया। सर्पदंश से बालक पर बेहोशी छाने लगी। उसी समय बालक के दादा व पिता स्थानीय एक निजी चिकित्सक के यहां ले गए। यहां पर बालक को मृत घोषित कर दिया गया। अपने बच्चें को किसी तरह बचा लेने की फिराक में बालक के मूकबधिर दादा नफीस व पिता हसीब बच्चे के शव को गोद में लिए क्षेत्र के गांव सरदारपुर छायली व रामजीवाला पहुंचे, वहां सांप के काटे का इलाज करने वालों से हाथ जोड़कर उसके बच्चे का इलाज कर उसको बचा लेने की गुहार लगाई परंतु निराशा ही हाथ लगी। किसी ने बताया कि धामपुर के नींदड़ू में भी कोई व्यक्ति सांप के काटे का इलाज करता है तो बालक की ममता में दादा व पिता अपने बच्चे के शव को वहां लेकर गए, वहां भी कुछ नहीं हुआ। बालक को सोमवार को मगरिब की नमाज के बाद सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया है।


अपने मूकबधिर परिवार को खरीदारी कराता था मृतक
बिलाल के परिवार में वह और उसका चार वर्षीय छोटा भाई ही सामान्य हैं, जबकि उसका संपूर्ण परिवार मुकबधिर है। जब किसी से मजदूरी और उसके काम-दाम की बात हो या बाजार से सामान खरीदारी की ,हर जगह बिलाल के दादा नफीस व पिता हसीब बिलाल को ही अपने साथ रखते थे। बिलाल दुकानदार से सामान का भाव पताकर अपने मूकबधिर परिजनों को इशारों में समझाता। बोलता सहारा छीन जाने पर मूकबधिर परिवार बेहद गमजदा है।
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