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प्राकृतिक स्वरूप में लौटे अस्तित्व खो चुके 334 तालाब
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अफजलगढ ब्लाक के गांव शेखुपुरा वाला के तालाब का जीर्णोद्धार करते श्रमिक।
- फोटो : BIJNOR
प्राकृतिक स्वरूप में लौटे अस्तित्व खो चुके 334 तालाब
बिजनौर। जिले में पिछले एक साल में लगातार तालाबों को बचाने का अभियान चला। पूरे एक साल में अपना अस्तित्व खो चुके 334 तालाबों को पुन: उनके प्राकृतिक रूप में लाया गया। इन तालाबों के किनारे 50 हजार पौधे लगाए गए। इससे गांवों में तालाबों की सूरत बदल गई। उम्मीद जताई जा रही है कि जीवित होते तालाबों से भूगर्भ जल स्तर पर भी बेहतर असर दिखाई देगा।
वित्तीय वर्ष में जिले के 11 ब्लॉक में 334 तालाबों का जीर्णोद्धार किया गया है। सीडीओ केपी सिंह ने बताया कि इनमें सबसे 56 तालाबों का जीर्णोद्धार हल्दौर ब्लॉक में हुआ है। इसके बाद में कोतवाली ब्लॉक में 54, नजीबाबाद ब्लॉक में 50, नहटौर ब्लॉक में 43, स्योहारा ब्लॉक में 29, जलीलपुर तथा नूरपुर ब्लॉक में 26-26, किरतपुर ब्लॉक में 17, मोहम्मदपुर देवमल ब्लॉक में 15 धामपुर ब्लॉक में 14 तथा अफजलगढ़ ब्लॉक में सबसे कम चार तालाबों का जीर्णोद्धार कराया गया है।
तालाबों का गांव कहा जाता था नांगल जट
हल्दौर ब्लॉक के गांव पोटा निवासी पूर्व प्रधान बलराम सिंह, नांगल जट निवासी मुंशी रामचंद्र सिंह बताते हैं कि पहले हर गांव और जंगल में तालाब थे। नांगल जट गांव को तो तालाबों का गांव कहा जाता था। परंतु तालाबों पर अतिक्रमण होने लगे। जिससे काफी तालाबों का अस्तित्व समाप्त हो गया। तालाबों में घरेलू व बरसाती पानी इकट्ठा होता है। जिससे गली मोहल्लों में जल भराव नहीं होता था। इतना ही नहीं जमीन के नीचे का जल स्तर बढ़ता है। शासन ने जल संचयन के लिए जल है तो कल है अभियान चलाया। तालाबों से अवैध कब्जे हटे। मिट्टी, गंदगी से पट गए तालाबों का जीर्णोद्धार हुआ है। इससे तालाब अपनी पुरानी शक्ल में दिखाई देने लगे हैं। भूगर्भ जल स्तर बढ़ा है, पीने के पानी के बोरिंग में डाले जाने पाइप की लंबाई भी कम हुई है।
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ये काम होता है तालाब के जीर्णोद्धार में
सीडीओ केपी सिंह ने बताया कि जीर्णोद्धार से पहले ग्राम पंचायत व राजस्व अभिलेखों से तालाबों को चिह्नित किया गया। इसके बाद अभिलेखों में अंकित तालाब की लंबाई व चौड़ाई के अनुसार खोदाई होती है। तालाब की गहराई तीन मीटर रखी जाती है। तालाबों की बाउंड्री पर पीपल, जामुन, आम, अमरूद आदि के पौधे रोपे जाते हैं। ब्लॉकों में टीम भेजकर सत्यापन कराया गया है।
जीर्णोद्धार में हुए 439.52 लाख रुपये खर्च
बताया गया कि 334 तालाबों के जीर्णोद्धार में 439.52 लाख रुपये खर्च हुए हैं। इनमें सबसे अधिक हल्दौर ब्लॉक में 82.97 लाख, नजीबाबाद ब्लॉक में 81 लाख, कोतवाली ब्लॉक में 50.91 लाख, जलीलपुर ब्लॉक में 49.47 लाख, नहटौर ब्लॉक में 46.93 लाख, नूरपुर ब्लॉक में 39.40 लाख, स्योहारा ब्लॉक में 29.49 लाख, किरतपुर ब्लॉक में 22 लाख, मोहम्मदपुर देवमल ब्लॉक में 18.50 लाख, धामपुर ब्लॉक में 15.34 लाख तथा अफजलगढ़ ब्लॉक में 03.51 लाख रुपया खर्च हुए हैं।
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बिजनौर। जिले में पिछले एक साल में लगातार तालाबों को बचाने का अभियान चला। पूरे एक साल में अपना अस्तित्व खो चुके 334 तालाबों को पुन: उनके प्राकृतिक रूप में लाया गया। इन तालाबों के किनारे 50 हजार पौधे लगाए गए। इससे गांवों में तालाबों की सूरत बदल गई। उम्मीद जताई जा रही है कि जीवित होते तालाबों से भूगर्भ जल स्तर पर भी बेहतर असर दिखाई देगा।
वित्तीय वर्ष में जिले के 11 ब्लॉक में 334 तालाबों का जीर्णोद्धार किया गया है। सीडीओ केपी सिंह ने बताया कि इनमें सबसे 56 तालाबों का जीर्णोद्धार हल्दौर ब्लॉक में हुआ है। इसके बाद में कोतवाली ब्लॉक में 54, नजीबाबाद ब्लॉक में 50, नहटौर ब्लॉक में 43, स्योहारा ब्लॉक में 29, जलीलपुर तथा नूरपुर ब्लॉक में 26-26, किरतपुर ब्लॉक में 17, मोहम्मदपुर देवमल ब्लॉक में 15 धामपुर ब्लॉक में 14 तथा अफजलगढ़ ब्लॉक में सबसे कम चार तालाबों का जीर्णोद्धार कराया गया है।
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तालाबों का गांव कहा जाता था नांगल जट
हल्दौर ब्लॉक के गांव पोटा निवासी पूर्व प्रधान बलराम सिंह, नांगल जट निवासी मुंशी रामचंद्र सिंह बताते हैं कि पहले हर गांव और जंगल में तालाब थे। नांगल जट गांव को तो तालाबों का गांव कहा जाता था। परंतु तालाबों पर अतिक्रमण होने लगे। जिससे काफी तालाबों का अस्तित्व समाप्त हो गया। तालाबों में घरेलू व बरसाती पानी इकट्ठा होता है। जिससे गली मोहल्लों में जल भराव नहीं होता था। इतना ही नहीं जमीन के नीचे का जल स्तर बढ़ता है। शासन ने जल संचयन के लिए जल है तो कल है अभियान चलाया। तालाबों से अवैध कब्जे हटे। मिट्टी, गंदगी से पट गए तालाबों का जीर्णोद्धार हुआ है। इससे तालाब अपनी पुरानी शक्ल में दिखाई देने लगे हैं। भूगर्भ जल स्तर बढ़ा है, पीने के पानी के बोरिंग में डाले जाने पाइप की लंबाई भी कम हुई है।
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ये काम होता है तालाब के जीर्णोद्धार में
सीडीओ केपी सिंह ने बताया कि जीर्णोद्धार से पहले ग्राम पंचायत व राजस्व अभिलेखों से तालाबों को चिह्नित किया गया। इसके बाद अभिलेखों में अंकित तालाब की लंबाई व चौड़ाई के अनुसार खोदाई होती है। तालाब की गहराई तीन मीटर रखी जाती है। तालाबों की बाउंड्री पर पीपल, जामुन, आम, अमरूद आदि के पौधे रोपे जाते हैं। ब्लॉकों में टीम भेजकर सत्यापन कराया गया है।
जीर्णोद्धार में हुए 439.52 लाख रुपये खर्च
बताया गया कि 334 तालाबों के जीर्णोद्धार में 439.52 लाख रुपये खर्च हुए हैं। इनमें सबसे अधिक हल्दौर ब्लॉक में 82.97 लाख, नजीबाबाद ब्लॉक में 81 लाख, कोतवाली ब्लॉक में 50.91 लाख, जलीलपुर ब्लॉक में 49.47 लाख, नहटौर ब्लॉक में 46.93 लाख, नूरपुर ब्लॉक में 39.40 लाख, स्योहारा ब्लॉक में 29.49 लाख, किरतपुर ब्लॉक में 22 लाख, मोहम्मदपुर देवमल ब्लॉक में 18.50 लाख, धामपुर ब्लॉक में 15.34 लाख तथा अफजलगढ़ ब्लॉक में 03.51 लाख रुपया खर्च हुए हैं।