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गांव हर्राअहमदपुर जलाल की जमीन के सर्किट रेट में हुआ बड़ा खेल
Updated Thu, 16 Nov 2017 11:50 PM IST
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मर्जी से बढ़ाए और घटा दिए सर्किल रेट
धामपुर। हर्राअहमदपुर जलाल में जमीन के सर्किल रेट में बड़ा खेल हुआ है। सिंचाई विभाग की ओर से पहले तो गांव में माइनर निकालने के दौरान ग्रामीणों को फायदा पहुंचाने के लिए गांव को अर्द्ध नगरीय श्रेणी में परिवर्तित करके जमीन के रेट तीन गुना कर दिए गए। अब गांव को अर्द्ध नगरीय से हटाकर ग्रामीण में तब्दील कर जमीन के सर्किल रेट दस लाख रुपये हेक्टेअर कम कर दिए गए। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री ये शिकायत कर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
गांव हर्राअहमदपुर जलाल 2007 में ग्रामीण क्षेत्र में था। 2008 में सिंचाई विभाग की ओर से गांव में माइनर निकाला गया। जमान मालिकों को लाभ पहुंचाने के लिए अफसरों ने जमीन के रेट में बड़ा खेल कर डाला। अफसरों ने मिली भगत से रजिस्ट्री कार्यालय से जमीन के सर्किल रेट आठ लाख से बढ़ाकर 24 लाख 70 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर कर दिए गए। 2013 तक अर्द्ध नगरीय श्रेणी से हटाकर फिर से जमीन के रेट दस लाख रुपये हेक्टेअर घटाकर 14 लाख रुपये प्रति हेक्टेअर कर दिए गए। ग्रामवासियों को जब अफसरों के इस खेल का पता चला तो उनमें खलबली मच गई। ग्रामवासी इस मामले को लेकर लामबंद हो गए। उन्होंने आला अफसरों से पूरे मामले की शिकायत की तो कोई जवाब नहीं मिला।
कोऑपरेटिव सोसाइटी के चेयरमैन दिनेश कुमार, नरेश कुमार, हरपाल सिंह, पूर्व प्रधान रामकुमार सिंह, प्रधान सरिता देवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत कर जमीन के सर्किल रेट हुए बड़े खेल से अवगत कराया है। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराए जाने की मांग की है।
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उधर, उपनिबंधक धामपुर कमलेश गौतम के मुताबिक यह सब उनके समय से पहले का मामला है। वह इस बारे में कुछ नहीं बता सकते। अफसरों के आदेश पर यह सब काम हुआ है। सहायक महानिरीक्षक बिजनौर पुनीत कुमार के मुताबिक यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। मामले की जांच कराई जा रही है।
डीएम तय करते हैं जमीन के सर्किल रेट : डीआईजी
डीआईजी मुरादाबाद मनोज कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि जमीन के सर्किल रेट तय कराने का अधिकार जिले के डीएम को होता है। वह जो चाहे, करें। उनके विभाग का काम डीएम द्वारा घोषित सर्किल रेट के आधार पर जमीन की खरीदफरोख्त कराना है।
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धामपुर। हर्राअहमदपुर जलाल में जमीन के सर्किल रेट में बड़ा खेल हुआ है। सिंचाई विभाग की ओर से पहले तो गांव में माइनर निकालने के दौरान ग्रामीणों को फायदा पहुंचाने के लिए गांव को अर्द्ध नगरीय श्रेणी में परिवर्तित करके जमीन के रेट तीन गुना कर दिए गए। अब गांव को अर्द्ध नगरीय से हटाकर ग्रामीण में तब्दील कर जमीन के सर्किल रेट दस लाख रुपये हेक्टेअर कम कर दिए गए। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री ये शिकायत कर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
गांव हर्राअहमदपुर जलाल 2007 में ग्रामीण क्षेत्र में था। 2008 में सिंचाई विभाग की ओर से गांव में माइनर निकाला गया। जमान मालिकों को लाभ पहुंचाने के लिए अफसरों ने जमीन के रेट में बड़ा खेल कर डाला। अफसरों ने मिली भगत से रजिस्ट्री कार्यालय से जमीन के सर्किल रेट आठ लाख से बढ़ाकर 24 लाख 70 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर कर दिए गए। 2013 तक अर्द्ध नगरीय श्रेणी से हटाकर फिर से जमीन के रेट दस लाख रुपये हेक्टेअर घटाकर 14 लाख रुपये प्रति हेक्टेअर कर दिए गए। ग्रामवासियों को जब अफसरों के इस खेल का पता चला तो उनमें खलबली मच गई। ग्रामवासी इस मामले को लेकर लामबंद हो गए। उन्होंने आला अफसरों से पूरे मामले की शिकायत की तो कोई जवाब नहीं मिला।
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कोऑपरेटिव सोसाइटी के चेयरमैन दिनेश कुमार, नरेश कुमार, हरपाल सिंह, पूर्व प्रधान रामकुमार सिंह, प्रधान सरिता देवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत कर जमीन के सर्किल रेट हुए बड़े खेल से अवगत कराया है। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराए जाने की मांग की है।
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उधर, उपनिबंधक धामपुर कमलेश गौतम के मुताबिक यह सब उनके समय से पहले का मामला है। वह इस बारे में कुछ नहीं बता सकते। अफसरों के आदेश पर यह सब काम हुआ है। सहायक महानिरीक्षक बिजनौर पुनीत कुमार के मुताबिक यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। मामले की जांच कराई जा रही है।
डीएम तय करते हैं जमीन के सर्किल रेट : डीआईजी
डीआईजी मुरादाबाद मनोज कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि जमीन के सर्किल रेट तय कराने का अधिकार जिले के डीएम को होता है। वह जो चाहे, करें। उनके विभाग का काम डीएम द्वारा घोषित सर्किल रेट के आधार पर जमीन की खरीदफरोख्त कराना है।