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दीप महायज्ञ के साथ षोडश संस्कार प्रशिक्षण संपन्न
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नजीबाबाद। गायत्री शक्तिपीठ का विराट दीप महायज्ञ जोनल कार्यालय पर आयोजित किया गया। गायत्री परिवार की ओर से गायत्री साधकों को षोडश संस्कार प्रशिक्षण दिया गया।
शांतिकुंज के जोनल कार्यालय पर सबको सद्बुद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ गायत्री महामंत्र और महामृत्युंजय मंत्र के साथ साधकों ने महायज्ञ में आहुतियां दीं। भव्य विराट दीप महायज्ञ से पूर्व व्यवस्थापक डा. दीपक कुमार ने षोडश संस्कार का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक उपचार का नाम संस्कार है। भारतीय संस्कृति में 16 प्रकार के संस्कार होते हैं जिन्हें षोडश संस्कार के नाम से जाना जाता है। माता के गर्भ से लेकर मृत्यु तक प्रत्येक भारतीय धर्मावलंबी 16 संस्कारों से गुजरता है। श्रेष्ठ संस्कार के माध्यम से ही व्यक्ति स्वर्ग का भागीदार बनता है। षोडश संस्कार के अंतर्गत गर्भाधान, पुंसवन, समिन्तोयन, जातकर्म नामकरण, निष्क्रमण, अन्नप्राशन, चूड़ाकर्म, उपनमन, वेदारंभ, यज्ञोपवीत दीक्षा संस्कार प्रशिक्षण मनोवैज्ञानिक और धर्मानुमोदित प्रक्रिया के संस्कार है। परिव्राजक जीएस पारीख, राज भटनागर, हरीश शर्मा, छतरपाल सिंह, विजय शर्मा, सरोज यादव, श्याम कुमारी सक्सेना, प्रशांत, देवेश, निशांत, मेघा, बीना सहित अनेक गायत्री साधकों ने संस्कार प्रशिक्षण और दीप महायज्ञ में भाग लिया।
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शांतिकुंज के जोनल कार्यालय पर सबको सद्बुद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ गायत्री महामंत्र और महामृत्युंजय मंत्र के साथ साधकों ने महायज्ञ में आहुतियां दीं। भव्य विराट दीप महायज्ञ से पूर्व व्यवस्थापक डा. दीपक कुमार ने षोडश संस्कार का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक उपचार का नाम संस्कार है। भारतीय संस्कृति में 16 प्रकार के संस्कार होते हैं जिन्हें षोडश संस्कार के नाम से जाना जाता है। माता के गर्भ से लेकर मृत्यु तक प्रत्येक भारतीय धर्मावलंबी 16 संस्कारों से गुजरता है। श्रेष्ठ संस्कार के माध्यम से ही व्यक्ति स्वर्ग का भागीदार बनता है। षोडश संस्कार के अंतर्गत गर्भाधान, पुंसवन, समिन्तोयन, जातकर्म नामकरण, निष्क्रमण, अन्नप्राशन, चूड़ाकर्म, उपनमन, वेदारंभ, यज्ञोपवीत दीक्षा संस्कार प्रशिक्षण मनोवैज्ञानिक और धर्मानुमोदित प्रक्रिया के संस्कार है। परिव्राजक जीएस पारीख, राज भटनागर, हरीश शर्मा, छतरपाल सिंह, विजय शर्मा, सरोज यादव, श्याम कुमारी सक्सेना, प्रशांत, देवेश, निशांत, मेघा, बीना सहित अनेक गायत्री साधकों ने संस्कार प्रशिक्षण और दीप महायज्ञ में भाग लिया।
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