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किसानों के द्वार पहुंचा कृषि विभाग का महकमा
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जैविक खाद से कम लागत में अधिक उत्पादन
धामपुर। कृषि विभाग की ओर से किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके लिए किसानों को जैविक खाद का अधिक से अधिक प्रयोग करने की सलाह दी जा रही है। विभाग के अधिकारी गांवों में किसानों के घर जाकर उनसे संपर्क कर रहे हैं।
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश और केंद्र सरकार किसानों की आय को दोगुना करने पर जोर दे रही है। इसके लिए कृषि विभाग ने योजना तैयार की है। जिसके तहत कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों के द्वार पहुंच कर उन्हें आय को दोगुना कैसे किया जाए, इसके गुर बताने शुरू किए हैं। किसानों को बताया जा रहा है कि वह फसलों की अधिक पैदावार लेने के लिए रासायनिक खाद का कम से कम प्रयोग करें। रासायनिक खाद से जमीन की उपजाऊ क्षमता पर विपरीत असर पड़ रहा है और महंगी लागत के बाद भी उपज घटती जा रही है। एडीओ कृषि भूपाल सिंह और एडीओ पीआई मुनीश कुमार ने बताया कि इसका प्रयोग करने से उत्पादकता में वृद्धि होती है। पर्यावरण को शुद्ध करने में सहायक है। मित्र कीट जमीन में सुरक्षित रहते हैं। शत्रु कीटों का प्रबंधन प्रभावशाली रूप से होता है। बताया कि इसका प्रयोग भूमि उपचार के लिए किया जाता है। दो से ढाई किलो ट्राइकाडरमा को 40 से 45 किलो सड़ी गोबर की खाद में मिलाकर आठ दिन के लिए छाया में ढककर रखने से जैविक खाद तैयार हो जाता है। खाद के तैयार हो जाने के बाद किसान फसल की बुवाई करने से पहले प्रति एकड़ के हिसाब से खेत में इसका छिड़काव कर सकते हैं।
बायो एजेंट पर 75 प्रतिशत का अनुदान
सरकार की ओर से बायो एजेंट पर 75 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है। इसकी कीमत करीब 100 रुपये किलो है। 75 रुपये का अनुदान मिलने पर केवल 25 रुपये की कीमत के बायो एजेंट से तैयार खाद से एक बीघा जमीन का भूमि शोधन किया जा सकता है। यह जैविक फफूंदी नाशक क्षारीय भूमि में कम असरकारक है। प्रयोग करते समय जमीन में नमी हो। इसके साथ रासायनिक फफूंदी नाशक का प्रयोग नहीं हो। खेत में छिड़काव करते वक्त किसान को आंखों पर चश्मा, यदि शरीर पर कहीं घाव हो तो उस पर पट्टी बांध लेनी चाहिए।
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धामपुर। कृषि विभाग की ओर से किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके लिए किसानों को जैविक खाद का अधिक से अधिक प्रयोग करने की सलाह दी जा रही है। विभाग के अधिकारी गांवों में किसानों के घर जाकर उनसे संपर्क कर रहे हैं।
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश और केंद्र सरकार किसानों की आय को दोगुना करने पर जोर दे रही है। इसके लिए कृषि विभाग ने योजना तैयार की है। जिसके तहत कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों के द्वार पहुंच कर उन्हें आय को दोगुना कैसे किया जाए, इसके गुर बताने शुरू किए हैं। किसानों को बताया जा रहा है कि वह फसलों की अधिक पैदावार लेने के लिए रासायनिक खाद का कम से कम प्रयोग करें। रासायनिक खाद से जमीन की उपजाऊ क्षमता पर विपरीत असर पड़ रहा है और महंगी लागत के बाद भी उपज घटती जा रही है। एडीओ कृषि भूपाल सिंह और एडीओ पीआई मुनीश कुमार ने बताया कि इसका प्रयोग करने से उत्पादकता में वृद्धि होती है। पर्यावरण को शुद्ध करने में सहायक है। मित्र कीट जमीन में सुरक्षित रहते हैं। शत्रु कीटों का प्रबंधन प्रभावशाली रूप से होता है। बताया कि इसका प्रयोग भूमि उपचार के लिए किया जाता है। दो से ढाई किलो ट्राइकाडरमा को 40 से 45 किलो सड़ी गोबर की खाद में मिलाकर आठ दिन के लिए छाया में ढककर रखने से जैविक खाद तैयार हो जाता है। खाद के तैयार हो जाने के बाद किसान फसल की बुवाई करने से पहले प्रति एकड़ के हिसाब से खेत में इसका छिड़काव कर सकते हैं।
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बायो एजेंट पर 75 प्रतिशत का अनुदान
सरकार की ओर से बायो एजेंट पर 75 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है। इसकी कीमत करीब 100 रुपये किलो है। 75 रुपये का अनुदान मिलने पर केवल 25 रुपये की कीमत के बायो एजेंट से तैयार खाद से एक बीघा जमीन का भूमि शोधन किया जा सकता है। यह जैविक फफूंदी नाशक क्षारीय भूमि में कम असरकारक है। प्रयोग करते समय जमीन में नमी हो। इसके साथ रासायनिक फफूंदी नाशक का प्रयोग नहीं हो। खेत में छिड़काव करते वक्त किसान को आंखों पर चश्मा, यदि शरीर पर कहीं घाव हो तो उस पर पट्टी बांध लेनी चाहिए।
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