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पुरुष नसंबदी पखवाड़े में हुए महज दो ऑपरेशन
Updated Wed, 12 Dec 2018 12:18 AM IST
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पुरुष नसबंदी पखवाड़े में हुए महज दो ऑपरेशन
बिजनौर। जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रण के लिए पुरुष परिवार नियोजन का स्थायी तरीका अपनाने में रुचि नहीं ले रहे हैं। जनवरी से नवंबर तक महिलाओं ने 1436 नसबंदी कराईं तो 21 नवंबर से चार दिसंबर तक चले पुरुष नसबंदी पखवाड़े में केवल दो ही पुरुषों ने नसबंदी कराई।
नसबंदी कार्यक्रम के अंतर्गत सरकारी अस्पतालों में पुरुषों और महिलाओं को प्रोत्साहन के रूप में तीन हजार रुपये दिए जाते हैं। जबकि निजी अस्पतालों में पुरुषों को नसबंदी कराने पर एक रुपये प्रोत्साहन के रूप में दिए जाते हैं। इसके बावजूद पुरुष नसबंदी कराने में महिलाओं से काफी पीछे हैं। 21 नवंबर से चार दिसंबर तक चले पुरुष नसबंदी पखवाड़े में केवल दो पुरुषों ने ही नसबंदी कराई। चिकित्सकों के अनुसार पुरुष नसबंदी माह में बिना चीरा, बिना टांका से संपन्न होने वाले ऑपरेशन विशेषज्ञ सर्जनों द्वारा किए जा रहे हैं। इनमें नसबंदी कराने वाले पुरुष को तीन हजार रुपये विभाग द्वारा ई भुगतान के माध्यम से दिए जाते हैं। सीएमओ राकेश कुमार मित्तल ने बताया कि जिले में सर्जन की कमी है। कई बार शासन से सर्जन की मांग की चुकी है। इस कारण पुरुषों की नसबंदी में कमी आई है।
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बिजनौर। जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रण के लिए पुरुष परिवार नियोजन का स्थायी तरीका अपनाने में रुचि नहीं ले रहे हैं। जनवरी से नवंबर तक महिलाओं ने 1436 नसबंदी कराईं तो 21 नवंबर से चार दिसंबर तक चले पुरुष नसबंदी पखवाड़े में केवल दो ही पुरुषों ने नसबंदी कराई।
नसबंदी कार्यक्रम के अंतर्गत सरकारी अस्पतालों में पुरुषों और महिलाओं को प्रोत्साहन के रूप में तीन हजार रुपये दिए जाते हैं। जबकि निजी अस्पतालों में पुरुषों को नसबंदी कराने पर एक रुपये प्रोत्साहन के रूप में दिए जाते हैं। इसके बावजूद पुरुष नसबंदी कराने में महिलाओं से काफी पीछे हैं। 21 नवंबर से चार दिसंबर तक चले पुरुष नसबंदी पखवाड़े में केवल दो पुरुषों ने ही नसबंदी कराई। चिकित्सकों के अनुसार पुरुष नसबंदी माह में बिना चीरा, बिना टांका से संपन्न होने वाले ऑपरेशन विशेषज्ञ सर्जनों द्वारा किए जा रहे हैं। इनमें नसबंदी कराने वाले पुरुष को तीन हजार रुपये विभाग द्वारा ई भुगतान के माध्यम से दिए जाते हैं। सीएमओ राकेश कुमार मित्तल ने बताया कि जिले में सर्जन की कमी है। कई बार शासन से सर्जन की मांग की चुकी है। इस कारण पुरुषों की नसबंदी में कमी आई है।
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