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सांप के काटने से डरे नहीं , बच सकती है जान
Updated Wed, 22 Aug 2018 12:33 AM IST
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‘सांप के काटने से डरे नहीं, बच सकती है जान’
बिजनौर। किसी को अगर जहरीला सांप काट ले तो डरने की जरूरत नहीं है। सांप के कांटने पर किसी नीम हकीम के पास इलाज कराने नहीं जाएं। सरकारी अस्पताल में सांप के काटने का इलाज है। अस्पताल में इलाज कराने से सांप के काटने वाले की जान बच सकती है।
बरसात के मौसम में जहरीले सांप अपने बिलों से निकल आते हैं। खेतों में कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव होने से भी सांप शहर की तरफ दौड़ जाते हैं। बरसात में जंगल में किसान काम करके बड़ा जोखिम उठाते है। कभी भी जंगल में काम करते समय सांप उन्हें काट लेता था। गांव के कच्चे मकानों में छिपे सांप भी सोते समय या काम करते समय किसी को भी काट लेते हैं। ऐसे में सांप के काटने से लोगों की जान चली जाती है। जनपद में बरसात के मौसम में एक माह में 22 से ज्यादा लोगों को सांप डंसते हैं। सांस के काटने वाले तमाम लोगों की मौत नीम, हकीम के पास जाने से होती है। सांप के काटने पर सीधे सरकारी अस्पताल जाना चाहिए।
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. ज्ञान चंद के मुताबिक सारे सांप अत्यधिक जहरीले नहीं होते हैं। 20 प्रतिशत सांप ही ऐसे हैं जो किसी को काटने पर अधिक प्रभावित करते हैं। सांप के काटने पर टाइट बंद नहीं लगाना चाहिए। हो सके तो सांप के काटने की जगह चीरा लगा दें। ताकि जहरीला रक्त बह जाए और शरीर में सांप का विष न फैले। उन्होंने बताया कि साल जिला अस्पताल में अभी तक केवल दस लोग सांप के काटने पर उपचार कराने आए हैं। ऐसे लोगों को एंटीस्नकोविनम इंजेक्शन लगाया जाता है। निजी चिकित्सक डॉ. वीरबल सिंह के मुताबिक 60 प्रतिशत लोगों की सांप के काटने पर दहशत में जान चली जाती है।
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बिजनौर। किसी को अगर जहरीला सांप काट ले तो डरने की जरूरत नहीं है। सांप के कांटने पर किसी नीम हकीम के पास इलाज कराने नहीं जाएं। सरकारी अस्पताल में सांप के काटने का इलाज है। अस्पताल में इलाज कराने से सांप के काटने वाले की जान बच सकती है।
बरसात के मौसम में जहरीले सांप अपने बिलों से निकल आते हैं। खेतों में कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव होने से भी सांप शहर की तरफ दौड़ जाते हैं। बरसात में जंगल में किसान काम करके बड़ा जोखिम उठाते है। कभी भी जंगल में काम करते समय सांप उन्हें काट लेता था। गांव के कच्चे मकानों में छिपे सांप भी सोते समय या काम करते समय किसी को भी काट लेते हैं। ऐसे में सांप के काटने से लोगों की जान चली जाती है। जनपद में बरसात के मौसम में एक माह में 22 से ज्यादा लोगों को सांप डंसते हैं। सांस के काटने वाले तमाम लोगों की मौत नीम, हकीम के पास जाने से होती है। सांप के काटने पर सीधे सरकारी अस्पताल जाना चाहिए।
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जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. ज्ञान चंद के मुताबिक सारे सांप अत्यधिक जहरीले नहीं होते हैं। 20 प्रतिशत सांप ही ऐसे हैं जो किसी को काटने पर अधिक प्रभावित करते हैं। सांप के काटने पर टाइट बंद नहीं लगाना चाहिए। हो सके तो सांप के काटने की जगह चीरा लगा दें। ताकि जहरीला रक्त बह जाए और शरीर में सांप का विष न फैले। उन्होंने बताया कि साल जिला अस्पताल में अभी तक केवल दस लोग सांप के काटने पर उपचार कराने आए हैं। ऐसे लोगों को एंटीस्नकोविनम इंजेक्शन लगाया जाता है। निजी चिकित्सक डॉ. वीरबल सिंह के मुताबिक 60 प्रतिशत लोगों की सांप के काटने पर दहशत में जान चली जाती है।
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