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सस्ता व सुलभ न्याय दिलाएगी स्थायी लोक अदालत:प्रसून कुमार मटियार

Wed, 13 Dec 2017 11:17 PM IST
Updated Wed, 13 Dec 2017 11:17 PM IST
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सस्ता व सुलभ न्याय दिलाएगी स्थायी लोक अदालत:प्रसून कुमार मटियार
सस्ता, सुलभ न्याय दिलाएगी स्थायी लोक अदालत : प्रसून
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बिजनौर। स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त जिला जज प्रसून कुमार कटियार ने कहा कि आपसी समझौतों के आधार पर मामले खत्म करना सबसे अच्छा तरीका है। सबसे अच्छा न्याय वही है जिससे दोनों पक्षों के बीच कोई मतभेद न रहे। जिले में वादकारियों को सस्ता व सुलभ न्याय दिलाने के लिए स्थायी लोक अदालत का गठन किया गया है।
जिला जजी के केंद्रीय सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि जनता में यह भ्रांति बैठ गई है कि अदालत में जाने पर सालों बर्बाद हो जाते हैं और सिर्फ तारीख मिलती है। वे अधिकारों पर चोट होने के बाद भी सब कुछ सहकर भी चुप बैठ जाते हैं और अदालतों का रुख नहीं करते। लेकिन पिछले कुछ समय से वैकल्पिक अदालतों ने विवाद निस्तारण में तेजी को प्रभावी तरीके से लागू किया है। इसी क्रम में हर जिले में वादों के निपटारे के लिए एक स्थायी लोक अदालत बनाई गई है। सदस्य अशोक निर्दोष ने बताया कि स्थायी लोक अदालत में दोनों पक्षों के सुलह समझौते के आधार पर निर्णय दिया जाएगा। स्थायी लोक अदालत इतनी शक्तिशाली है कि इसके निर्णय के खिलाफ कोई अपील नहीं की जा सकती है। इसमें दाखिल होने वाली अर्जी पर कोई शुल्क या कोर्ट फीस नहीं लगेगी।
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इस मामले में दाखिल होगी अर्जी
यातायात, विद्युत प्रकाश, जल आपूर्ति, डाक, दूरभाष सेवा, सार्वजनिक स्वच्छता, बीमा, स्वास्थ्य सेवा, आवासीय सेवा, रियल स्टेट से जुड़े मामले, एलपीजी संबंधी मामले, नगर पालिका संबंधी मामले, स्कूल, कॉलेजों में निर्धारित शुल्क से अधिक वसूलने के मामले, राष्ट्रीय राजमार्ग, टोल संबंधी मामलों में अर्जी दाखिल की जा सकती है। कोई भी व्यक्ति अथवा संस्था याचिका दाखिल कर सकती है।
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यह होगी प्रक्रिया
विवाद के निपटारे के लिए स्थायी लोक अदालत के समक्ष सादे पेपर पर प्रार्थना पत्र दे सकते हैं। पत्र पर विवाद का विवरण और अपना पक्ष लिखना होगा। स्थायी लोक अदालत परस्पर सहमति से समझौता कराएगी। ऐसा संभव न होने पर उपलब्ध सामग्री के आधार पर फैसला देगी। समिति के सदस्य अशोक निर्दोष के अनुसार अदालत में पहले से विचाराधीन वादों, ऐसे अपराध जिनमें राजीनामा न लग सकता हो, जहां विवाद में संपत्ति का मूल्य एक करोड़ से अधिक रुपये हो, उनकी सुनवाई स्थायी लोक अदालत में नहीं होगी।
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