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लक्ष्मी ही नहीं दुर्गा-काली का रूप भी है नारी
Updated Thu, 29 Nov 2018 12:07 AM IST
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लक्ष्मी ही नहीं दुर्गा और काली का रूप भी है नारी
बिजनौर। अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता अभियान के अंतर्गत कृष्णा कॉलेज में पोस्टर प्रतियोगिता और गोष्ठी का आयोजन किया गया। छात्राओं ने पोस्टर बनाकर महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया। कहा कि महिलाओं से ही समाज का अस्तित्व है। अगर महिला लक्ष्मी बनकर परिवार का लालन पोषण करती है तो दुर्गा और काली बनकर पापियों का नाश भी करती है।
अपराजिता कार्यक्रम के अंतर्गत छात्राओं ने पेंटिंग प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। पोस्टर के माध्यम से बताया कि जब तक वूमेन राइट्स नहीं होंगे तब तक ह्यूमन राइट्स का भी कोई औचित्य नहीं है। पोस्टरों के माध्यम से महिलाओं का सम्मान करने का संदेश दिया। छात्रा सुरभि ने कहा कि नारी लक्ष्मी और दुर्गा दोनों का रूप है। नारी का अपमान कभी नहीं करना चाहिए। आज बेटियां पुलिस और फौज में भर्ती होकर आतंकवादियों तक से लोहा ले रही हैं। नारी की कलाई नाजुक होती है, लेकिन उनसे ही वे दुश्मनों को धूल चटाने में पीछे नहीं हटती है। कहा कि आज भी नारी के पैरों को बांधने की कोशिश की जाती है। समाज में कुछ संकीर्ण मानसिकता के लोग नहीं चाहते हैं कि नारी आगे बढ़े। ऐसी विषम परिस्थितियों में भी नारी ने खुद को साबित कर दिखाया है।
प्राचार्या डॉ. सीमा शर्मा ने कहा कि आज हर क्षेत्र में नारी प्रतिष्ठित पदों पर बैठी हैं। वे अपनी सूझ बूझ से समाज का नेतृत्व भी कर रही है। नारी के लिए बनाई गई रूढ़ीवादी सोच को अब समाज को बदल लेना चाहिए। इस दौरान लॉ कॉलेज के निदेशक पवन कुमार, प्राचार्य डॉ. परवेज आलम, एमएम अंसारी, दीपशिखा अग्रवाल, ज्योति सिंह, लक्ष्मी देवी, मनीषा, चित्रा शर्मा, वंदना चौधरी, अंजलि गहलौत आदि मौजूद रहे।
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छात्रा अल्पी त्यागी ने कहा कि महिला सशक्तिकरण से जुड़े अभियान की समाज को बहुत आवश्यकता है। माता-पिता को यह बात समझानी चाहिए कि उनकी बेटी समाज में उन्हें बेटे से भी ज्यादा सम्मान दिला सकती है।
उपासना सिंह ने कहा कि विदेशों में महिलाओं के अधिकारों के प्रति बहुत काम किया जाता है। हमारे देश की नारी को अपने अधिकारों में पता तक नहीं है। महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए।
नीतू ने कहा कि कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स तो अंतरिक्ष तक में अपने पराक्रम का झंडा गाड़ आई। अगर समान मौका दिया जाए तो कोई ऐसा क्षेत्र नहीं जहां महिलाएं किसी से पीछे रहें। महिलाएं उससे कहीं ज्यादा सम्मान की अधिकारी हैं जितना उन्हें मिलता है।
निधि बिष्ट के अनुसार महिलाओं ने समाज में अपना सम्मान और हक लड़कर हासिल किया है। महिलाओं को अब भी अपने हकों के लिए लड़ना पड़ रहा है। महिला सशक्तिरण के अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता अभियान के जरिये महिलाओं में जागरूकता आएगी।
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बिजनौर। अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता अभियान के अंतर्गत कृष्णा कॉलेज में पोस्टर प्रतियोगिता और गोष्ठी का आयोजन किया गया। छात्राओं ने पोस्टर बनाकर महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया। कहा कि महिलाओं से ही समाज का अस्तित्व है। अगर महिला लक्ष्मी बनकर परिवार का लालन पोषण करती है तो दुर्गा और काली बनकर पापियों का नाश भी करती है।
अपराजिता कार्यक्रम के अंतर्गत छात्राओं ने पेंटिंग प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। पोस्टर के माध्यम से बताया कि जब तक वूमेन राइट्स नहीं होंगे तब तक ह्यूमन राइट्स का भी कोई औचित्य नहीं है। पोस्टरों के माध्यम से महिलाओं का सम्मान करने का संदेश दिया। छात्रा सुरभि ने कहा कि नारी लक्ष्मी और दुर्गा दोनों का रूप है। नारी का अपमान कभी नहीं करना चाहिए। आज बेटियां पुलिस और फौज में भर्ती होकर आतंकवादियों तक से लोहा ले रही हैं। नारी की कलाई नाजुक होती है, लेकिन उनसे ही वे दुश्मनों को धूल चटाने में पीछे नहीं हटती है। कहा कि आज भी नारी के पैरों को बांधने की कोशिश की जाती है। समाज में कुछ संकीर्ण मानसिकता के लोग नहीं चाहते हैं कि नारी आगे बढ़े। ऐसी विषम परिस्थितियों में भी नारी ने खुद को साबित कर दिखाया है।
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प्राचार्या डॉ. सीमा शर्मा ने कहा कि आज हर क्षेत्र में नारी प्रतिष्ठित पदों पर बैठी हैं। वे अपनी सूझ बूझ से समाज का नेतृत्व भी कर रही है। नारी के लिए बनाई गई रूढ़ीवादी सोच को अब समाज को बदल लेना चाहिए। इस दौरान लॉ कॉलेज के निदेशक पवन कुमार, प्राचार्य डॉ. परवेज आलम, एमएम अंसारी, दीपशिखा अग्रवाल, ज्योति सिंह, लक्ष्मी देवी, मनीषा, चित्रा शर्मा, वंदना चौधरी, अंजलि गहलौत आदि मौजूद रहे।
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छात्रा अल्पी त्यागी ने कहा कि महिला सशक्तिकरण से जुड़े अभियान की समाज को बहुत आवश्यकता है। माता-पिता को यह बात समझानी चाहिए कि उनकी बेटी समाज में उन्हें बेटे से भी ज्यादा सम्मान दिला सकती है।
उपासना सिंह ने कहा कि विदेशों में महिलाओं के अधिकारों के प्रति बहुत काम किया जाता है। हमारे देश की नारी को अपने अधिकारों में पता तक नहीं है। महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए।
नीतू ने कहा कि कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स तो अंतरिक्ष तक में अपने पराक्रम का झंडा गाड़ आई। अगर समान मौका दिया जाए तो कोई ऐसा क्षेत्र नहीं जहां महिलाएं किसी से पीछे रहें। महिलाएं उससे कहीं ज्यादा सम्मान की अधिकारी हैं जितना उन्हें मिलता है।
निधि बिष्ट के अनुसार महिलाओं ने समाज में अपना सम्मान और हक लड़कर हासिल किया है। महिलाओं को अब भी अपने हकों के लिए लड़ना पड़ रहा है। महिला सशक्तिरण के अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता अभियान के जरिये महिलाओं में जागरूकता आएगी।