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विश्नोई धर्म के सभी नियमों के पालन की सलाह
Updated Tue, 16 Jan 2018 11:57 PM IST
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विश्नोई धर्म के सभी नियमों के पालन करें
स्योहारा (बिजनौर)। स्वामी राजेंद्रानंद ने विश्नोई धर्म के अनुसार 29 नियमों को विधिपूर्वक पालन करने का आह्वान किया। गांव मुजाहिदपुर खिड़का में चल रही श्री जम्भवाणी हरिकथा के तृतीय दिन मंत्रोच्चार कर कथा का प्रारंभ किया गया। उन्होंने कहा कि विश्नोई समाज की पहचान विदेशों तक है। इंग्लैंड में अमृता देवी की प्रतिमा है। उन्होंने अपने पति और पुत्र का शीश सिर्फ वृक्षों की रक्षा के लिए कटा दिया।
कहा कि आज विश्नोई समाज अपनी पहचान खोता जा रहा है। उन्होंने आगाह किया अगर विश्नोई समाज के लोगों को अपनी पहचान नहीं खोनी है तो 29 नियमों का पालन करना ही पड़ेगा। स्वामी जी ने राम कृष्ण जैसे महान पुरुषों की जीवन कथा सुनाई और उनके पदचिह्नों पर चलने का आह्वान किया। इस अवसर पर क्षेत्र के गांव भगवानपुर रैनी, कांठ, अमीनाबाद, खलीलपुर, रसूलपुर, कस्बा अगबानपुर, मुरादाबाद, बिजनौर, धामपुर से लोग कथा सुनने आए। कथा के उपरांत प्रसाद वितरण किया गया। इस दौरान जोधपुर से साखी सम्राट सुखदेव मुनि, राजस्थान के मुकाम से स्वामी चमन ऋषि, हरिद्वार से जयानंद , राजस्थान से श्रवण दास, स्योहारा से स्वामी विस्मबरा नंद, किशनवीर सिंह, अश्वनी विश्नोई, रजत विश्नोई, ओमवीर सिंह, ओमकार सिंह दीवान, प्रेमवीर सिंह आदि मौजूद रहे।
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स्योहारा (बिजनौर)। स्वामी राजेंद्रानंद ने विश्नोई धर्म के अनुसार 29 नियमों को विधिपूर्वक पालन करने का आह्वान किया। गांव मुजाहिदपुर खिड़का में चल रही श्री जम्भवाणी हरिकथा के तृतीय दिन मंत्रोच्चार कर कथा का प्रारंभ किया गया। उन्होंने कहा कि विश्नोई समाज की पहचान विदेशों तक है। इंग्लैंड में अमृता देवी की प्रतिमा है। उन्होंने अपने पति और पुत्र का शीश सिर्फ वृक्षों की रक्षा के लिए कटा दिया।
कहा कि आज विश्नोई समाज अपनी पहचान खोता जा रहा है। उन्होंने आगाह किया अगर विश्नोई समाज के लोगों को अपनी पहचान नहीं खोनी है तो 29 नियमों का पालन करना ही पड़ेगा। स्वामी जी ने राम कृष्ण जैसे महान पुरुषों की जीवन कथा सुनाई और उनके पदचिह्नों पर चलने का आह्वान किया। इस अवसर पर क्षेत्र के गांव भगवानपुर रैनी, कांठ, अमीनाबाद, खलीलपुर, रसूलपुर, कस्बा अगबानपुर, मुरादाबाद, बिजनौर, धामपुर से लोग कथा सुनने आए। कथा के उपरांत प्रसाद वितरण किया गया। इस दौरान जोधपुर से साखी सम्राट सुखदेव मुनि, राजस्थान के मुकाम से स्वामी चमन ऋषि, हरिद्वार से जयानंद , राजस्थान से श्रवण दास, स्योहारा से स्वामी विस्मबरा नंद, किशनवीर सिंह, अश्वनी विश्नोई, रजत विश्नोई, ओमवीर सिंह, ओमकार सिंह दीवान, प्रेमवीर सिंह आदि मौजूद रहे।
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