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प्राइवेट बस यूनियन की हड़ताल से दूसरे दिन भी हलकान रहे यात्री
Updated Thu, 04 Jan 2018 12:13 AM IST
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धामपुर/अफजलगढ़। प्रशासन की मनमानी के विरोध में प्राइवेट बस यूनियन का दूसरे दिन भी चक्काजाम रहा। यात्रियों को प्राइवेट व डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ा।
बुधवार को प्रशासन की हठधर्मिता के विरोध में नगीना काशीपुर व कालागढ़ मार्ग पर बसों का संचालन दूसरे दिन भी पूरी तरह से ठप रहा। करीब 100 किमी लंबे हाईवे पर यात्री दिनभर बसों के लिए भटकते रहे। यात्रियों की भीड़ को देखते हुए उत्तराखंड की बसों ने भी यात्रियों को नहीं बैठाया। बसों की व्यवस्था बेपटरी होने से नगीना, धामपुर, शेरकोट, भूतपुरी, अफजलगढ़, बादीगढ़, रेहड़ सहित दर्जनों बस स्टॉपेज पर यात्रियों को तांता लगा रहा। इस हालत में यात्रियों को प्राइवेट व डग्गामार वाहनों से ही सफर तय करना पड़ा। बस संचालकों का आरोप है कि प्रशासन जबरन परेशान कर रहा है। वह पिछले छह दशक से नगीना चौराहे से बसों का संचालन रहे हैं, लेकिन व्यवस्था बनाने के नाम पर बसों का दूसरी जगह खड़ा करने का दबाव बनाया जा रहा है। ऐसी हालत में बसों में बैठने के लिए सवारी नहीं मिल पाएंगी। केएम इंटर कालेज पर बसों के खड़ा करने से कोई भी यात्री इतनी दूर बस में बैठने के लिए नहीं जाएगा, बल्कि उन सवारियों को भी रोडवेज बसें भरकर ले जाएंगी। वह सरकार को जो टैक्स जमा करते हैं, वह भी बसों के संचालन करने से पूरा नहीं हो पाएगा। बस संचालक पहलवान, मुसर्रफ, रियासत मलिक, बब्बू, दीपक सिंघल आदि का कहना है कि वह जब तक बसों को हाइवे पर नहीं चलाएंगे जब तक समस्या का समाधान नहीं हो जाता है।
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बुधवार को प्रशासन की हठधर्मिता के विरोध में नगीना काशीपुर व कालागढ़ मार्ग पर बसों का संचालन दूसरे दिन भी पूरी तरह से ठप रहा। करीब 100 किमी लंबे हाईवे पर यात्री दिनभर बसों के लिए भटकते रहे। यात्रियों की भीड़ को देखते हुए उत्तराखंड की बसों ने भी यात्रियों को नहीं बैठाया। बसों की व्यवस्था बेपटरी होने से नगीना, धामपुर, शेरकोट, भूतपुरी, अफजलगढ़, बादीगढ़, रेहड़ सहित दर्जनों बस स्टॉपेज पर यात्रियों को तांता लगा रहा। इस हालत में यात्रियों को प्राइवेट व डग्गामार वाहनों से ही सफर तय करना पड़ा। बस संचालकों का आरोप है कि प्रशासन जबरन परेशान कर रहा है। वह पिछले छह दशक से नगीना चौराहे से बसों का संचालन रहे हैं, लेकिन व्यवस्था बनाने के नाम पर बसों का दूसरी जगह खड़ा करने का दबाव बनाया जा रहा है। ऐसी हालत में बसों में बैठने के लिए सवारी नहीं मिल पाएंगी। केएम इंटर कालेज पर बसों के खड़ा करने से कोई भी यात्री इतनी दूर बस में बैठने के लिए नहीं जाएगा, बल्कि उन सवारियों को भी रोडवेज बसें भरकर ले जाएंगी। वह सरकार को जो टैक्स जमा करते हैं, वह भी बसों के संचालन करने से पूरा नहीं हो पाएगा। बस संचालक पहलवान, मुसर्रफ, रियासत मलिक, बब्बू, दीपक सिंघल आदि का कहना है कि वह जब तक बसों को हाइवे पर नहीं चलाएंगे जब तक समस्या का समाधान नहीं हो जाता है।
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