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मरने के बाद भी दो जिंदगी रोशन कर गए कूड़े सिंह
Updated Tue, 27 Jun 2017 12:27 AM IST
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दो की आंखों को रौशन कर गए कूड़े सिंह
बिजनौर।
सांसें भले थम जाएं, लेकिन मरने के बाद भी किसी की मदद करने का हौंसला नहीं मरता। यह साबित किया कूड़े सिंह ने, जो मौत के बाद भी दो जिंदगियों को रौशन कर गए। कूड़े सिंह के परिजनों ने उनकी मृत्यु के बाद इच्छानुसार उनकी आंखें दान कर दीं।
गांव रशीदपुर गढ़ी निवासी 80 वर्षीय कूड़े सिंह का सोमवार को हृदय गति रुकने से देहांत हो गया। कूड़े सिंह सर्व यूपी ग्रामीण बैंक में चीफ मैनेजर पद पर कार्यरत अपने बेटे शीलचंद सिंह से मरणोपरांत उनकी आंखें दान करने की बात कहते थे। उनका कहना था कि मरने के बाद किसी की जिंदगी की रोशन कर जाएं तो इससे बड़ा और कोई पुण्य नहीं हो सकता। शीलचंद सिंह ने छोटे भाई नरेश सिरोही, पुत्र डॉ.अनुज सिरोही, पुत्रवधु डॉ.आरती सिरोही व दोनों बहनों से पिता की इच्छा के बारे में बताया। परिजनों ने सहर्ष उनकी इच्छा को पूरा करने की बात कही। शीलचंद सिंह ने विकास अग्रवाल सर्राफ के सहयोग से नेत्र लेने वाली टीम को बुलाया। हिमालयन आई इंस्टीट्यूट जौलीग्रांट से आई टीम ने औपचारिकताएं पूरी कीं। शीलचंद सिंह का कहना है कि उनके पिता किसान थे। उन्होंने हमेशा दूसरों की मदद की थी।
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बिजनौर।
सांसें भले थम जाएं, लेकिन मरने के बाद भी किसी की मदद करने का हौंसला नहीं मरता। यह साबित किया कूड़े सिंह ने, जो मौत के बाद भी दो जिंदगियों को रौशन कर गए। कूड़े सिंह के परिजनों ने उनकी मृत्यु के बाद इच्छानुसार उनकी आंखें दान कर दीं।
गांव रशीदपुर गढ़ी निवासी 80 वर्षीय कूड़े सिंह का सोमवार को हृदय गति रुकने से देहांत हो गया। कूड़े सिंह सर्व यूपी ग्रामीण बैंक में चीफ मैनेजर पद पर कार्यरत अपने बेटे शीलचंद सिंह से मरणोपरांत उनकी आंखें दान करने की बात कहते थे। उनका कहना था कि मरने के बाद किसी की जिंदगी की रोशन कर जाएं तो इससे बड़ा और कोई पुण्य नहीं हो सकता। शीलचंद सिंह ने छोटे भाई नरेश सिरोही, पुत्र डॉ.अनुज सिरोही, पुत्रवधु डॉ.आरती सिरोही व दोनों बहनों से पिता की इच्छा के बारे में बताया। परिजनों ने सहर्ष उनकी इच्छा को पूरा करने की बात कही। शीलचंद सिंह ने विकास अग्रवाल सर्राफ के सहयोग से नेत्र लेने वाली टीम को बुलाया। हिमालयन आई इंस्टीट्यूट जौलीग्रांट से आई टीम ने औपचारिकताएं पूरी कीं। शीलचंद सिंह का कहना है कि उनके पिता किसान थे। उन्होंने हमेशा दूसरों की मदद की थी।
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