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तीन गांवों की 1812 बीघा जमीन फिर से जंगल में दर्ज
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तीन गांवों की 1812 बीघा जमीन फिर से जंगल में दर्ज
नगीना (बिजनौर)। एसडीएम कोर्ट ने नगीना तहसील के 17 गांवों के 60 हजार बीघा जमीन घोटाले में अहम फैसला दिया है। 69 साल बाद कोर्ट ने राजस्व अभिलेखों में तीन गांवों इस्लामपुर कुतुब, ग्राम हल्लो वाली और ग्राम शंकरपुर की 1812 बीघा जमीन से खातेदारों के नाम निरस्त कर मूल श्रेणी जंगल के नाम पर दर्ज किया है। इसके साथ ही कब्जा धारकों को बेदखल करने एवं उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की कार्रवाई शुरू कर दी है। एसडीएम ने बताया कि अन्य 14 गांवों में भी सुनवाई तेज कर दी गई है।
इस मामले की शिकायत किशन चंद्र व बसपा सांसद गिरीश चंद ने अधिकारियों से की थी। एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) में भी याचिका दायर की गई थी। एनजीटी की पूर्ण पीठ ने आठ जून 2021 को याचिका किशन चंद बनाम राज्य सरकार में सुनवाई करते हुए जमीन पर काबिज लोगों को बेदखल कर रिपोर्ट दर्ज कराने का आदेश दिया था। इसके बाद शासन ने जिला अधिकारी की अध्यक्षता में एक पांच सदस्य कमेटी बनाई, बाद में शासन स्तर से चकबंदी आयुक्त की अध्यक्षता में गठित एक कमेटी ने जांच की।
1953 की कूट रचित प्रविष्टि
के आधार पर कब्जाई जमीन
जांच में पाया गया कि बढ़ापुर थाना क्षेत्र के 17 गांवों की जंगल, रास्तों, नदी की करीब 60 हजार बीघा सरकारी भूमि को वर्ष 1953 में कूट रचित प्रविष्टि के आधार पर खतौनी फसली वर्ष 1359 में आदेश की एक लाइन लिखकर कुंवर चंद्रभान सिंह के नाम कर दिया गया था। बाद में इस जमीन के बैनामे होते रहे और अन्य लोगों के नाम पर यह जमीन दर्ज होती चली गई। आदेश के बाद एसडीएम कोर्ट ने रिपोर्ट दर्ज कराने और जमीन पर कब्जा लेने के लिए कहा है।
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-कोर्ट ने ग्राम शंकरपुर, हल्लो वाली व इस्लामपुर कुतुब की सरकारी भूमि पर काबिज लोगों को नोटिस जारी किए, उनके जवाब के बाद ग्राम शंकरपुर की 570 बीघा, ग्राम हल्लों वाली की 897 बीघा और इस्लामपुर कुतुब की 345 बीघा सरकारी जमीन से खातेदारों के नाम निरस्त कर, भूमि को पूर्व की भांति मूल श्रेणी में दर्ज कर लिया है। शैलेंद्र कुमार सिंह, एसडीएम, नगीना
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नगीना (बिजनौर)। एसडीएम कोर्ट ने नगीना तहसील के 17 गांवों के 60 हजार बीघा जमीन घोटाले में अहम फैसला दिया है। 69 साल बाद कोर्ट ने राजस्व अभिलेखों में तीन गांवों इस्लामपुर कुतुब, ग्राम हल्लो वाली और ग्राम शंकरपुर की 1812 बीघा जमीन से खातेदारों के नाम निरस्त कर मूल श्रेणी जंगल के नाम पर दर्ज किया है। इसके साथ ही कब्जा धारकों को बेदखल करने एवं उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की कार्रवाई शुरू कर दी है। एसडीएम ने बताया कि अन्य 14 गांवों में भी सुनवाई तेज कर दी गई है।
इस मामले की शिकायत किशन चंद्र व बसपा सांसद गिरीश चंद ने अधिकारियों से की थी। एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) में भी याचिका दायर की गई थी। एनजीटी की पूर्ण पीठ ने आठ जून 2021 को याचिका किशन चंद बनाम राज्य सरकार में सुनवाई करते हुए जमीन पर काबिज लोगों को बेदखल कर रिपोर्ट दर्ज कराने का आदेश दिया था। इसके बाद शासन ने जिला अधिकारी की अध्यक्षता में एक पांच सदस्य कमेटी बनाई, बाद में शासन स्तर से चकबंदी आयुक्त की अध्यक्षता में गठित एक कमेटी ने जांच की।
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1953 की कूट रचित प्रविष्टि
के आधार पर कब्जाई जमीन
जांच में पाया गया कि बढ़ापुर थाना क्षेत्र के 17 गांवों की जंगल, रास्तों, नदी की करीब 60 हजार बीघा सरकारी भूमि को वर्ष 1953 में कूट रचित प्रविष्टि के आधार पर खतौनी फसली वर्ष 1359 में आदेश की एक लाइन लिखकर कुंवर चंद्रभान सिंह के नाम कर दिया गया था। बाद में इस जमीन के बैनामे होते रहे और अन्य लोगों के नाम पर यह जमीन दर्ज होती चली गई। आदेश के बाद एसडीएम कोर्ट ने रिपोर्ट दर्ज कराने और जमीन पर कब्जा लेने के लिए कहा है।
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-कोर्ट ने ग्राम शंकरपुर, हल्लो वाली व इस्लामपुर कुतुब की सरकारी भूमि पर काबिज लोगों को नोटिस जारी किए, उनके जवाब के बाद ग्राम शंकरपुर की 570 बीघा, ग्राम हल्लों वाली की 897 बीघा और इस्लामपुर कुतुब की 345 बीघा सरकारी जमीन से खातेदारों के नाम निरस्त कर, भूमि को पूर्व की भांति मूल श्रेणी में दर्ज कर लिया है। शैलेंद्र कुमार सिंह, एसडीएम, नगीना