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फाइलेरिया हाथी पांव जांच को 12 से 15 नवंबर तक चलेगा अभियान
Updated Thu, 01 Nov 2018 12:04 AM IST
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फाइलेरिया हाथी पांव जांच तक चलेगा अभियान
बिजनौर। फाइलेरिया यानी ‘हाथी पांव’ जैसी बीमारी से बचाने के लिए मलेरिया विभाग की ओर से 12 से 15 नवंबर तक अभियान चलाया जाएगा। अभियान के अंतर्गत विभागीय कर्मचारियों द्वारा स्कूलों में जाकर बच्चों का चयन किया जाएगा। इसमें सभी ग्यारह ब्लॉक से दो-दो जूनियर हाईस्कूलों से 16-16 बच्चों के रक्त का नमूना लेकर जांच की जाएगी। फाइलेरिया यानी हाथी पांव जानलेवा बीमारी है। इस बीमारी से बचाव के लिए शासन ने स्कूलों में अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। अफसरों के अनुसार 51 जिलों में यह पहले से चलाया जा रहा है। जबकि बिजनौर समेत 24 जिलों में इसकी शुरुआत 12 नवंबर से की जाएगी। इसके लिए दो दिन पूर्व लखनऊ में हुई मीटिंग में 24 जिलों के मलेरिया अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया। तीन नवंबर को जिला अस्पताल, सभी सीएचसी, पीएचसी आदि के लैब टेक्नीशियन को ट्रेनिंग दी जाएगी। जिससे वे आसानी से इस रोग की जांच कर सकें। स्कूलों में सहयोग देने के लिए बीएसए को पत्र भेजा गया है। जिला मलेरिया अधिकारी बृजभूषण ने बताया कि यह रोग क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। इसकी जांच केवल रात में ही की जा सकती है। क्योंकि दिन में स्लाइड में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं हो पाते। बचाव ही इसका सबसे बड़ा उपाय है। अभी तक जिले में इसका एक भी केस नहीं है।
फाइलेरिया के लक्षण
पंजों से लेकर पैरों तक सूजन आना
अंडकोष में दर्द होने के साथ सूजन आना
महिलाओं के स्तन सामान्य से अधिक मोटे होना
त्वचा का कड़ा और मोटा होना
हाथों और जनानांगों में सूजन आना
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बिजनौर। फाइलेरिया यानी ‘हाथी पांव’ जैसी बीमारी से बचाने के लिए मलेरिया विभाग की ओर से 12 से 15 नवंबर तक अभियान चलाया जाएगा। अभियान के अंतर्गत विभागीय कर्मचारियों द्वारा स्कूलों में जाकर बच्चों का चयन किया जाएगा। इसमें सभी ग्यारह ब्लॉक से दो-दो जूनियर हाईस्कूलों से 16-16 बच्चों के रक्त का नमूना लेकर जांच की जाएगी। फाइलेरिया यानी हाथी पांव जानलेवा बीमारी है। इस बीमारी से बचाव के लिए शासन ने स्कूलों में अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। अफसरों के अनुसार 51 जिलों में यह पहले से चलाया जा रहा है। जबकि बिजनौर समेत 24 जिलों में इसकी शुरुआत 12 नवंबर से की जाएगी। इसके लिए दो दिन पूर्व लखनऊ में हुई मीटिंग में 24 जिलों के मलेरिया अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया। तीन नवंबर को जिला अस्पताल, सभी सीएचसी, पीएचसी आदि के लैब टेक्नीशियन को ट्रेनिंग दी जाएगी। जिससे वे आसानी से इस रोग की जांच कर सकें। स्कूलों में सहयोग देने के लिए बीएसए को पत्र भेजा गया है। जिला मलेरिया अधिकारी बृजभूषण ने बताया कि यह रोग क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। इसकी जांच केवल रात में ही की जा सकती है। क्योंकि दिन में स्लाइड में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं हो पाते। बचाव ही इसका सबसे बड़ा उपाय है। अभी तक जिले में इसका एक भी केस नहीं है।
फाइलेरिया के लक्षण
पंजों से लेकर पैरों तक सूजन आना
अंडकोष में दर्द होने के साथ सूजन आना
महिलाओं के स्तन सामान्य से अधिक मोटे होना
त्वचा का कड़ा और मोटा होना
हाथों और जनानांगों में सूजन आना