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सुकन्या समृद्घि खाता योजना
Updated Sun, 11 Feb 2018 11:41 PM IST
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बिजनौर। बेटी ऊपर वाले का अनमोल उपहार है। बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए केंद्र सरकार ने सुकन्या समृद्धि खाता योजना शुरू की है। डाक विभाग में शुरू की गई इस योजना से माता-पिता अपनी बेटियों का भविष्य सुरक्षित कर रहे हैं। इस योजना में माता-पिता अब तक 23 हजार से अधिक बेटियों के नाम 50 करोड़ से अधिक राशि डाकखाने में जमा कर चुके हैं।
बेटी को बचाने और पढ़ाने का केंद्र सरकार का अभियान पूरे देश में बढ़ता जा रहा है। जिले के गांव स्वाहेड़ी में तो आर्य समाज के हवन में वेदी में आहुति डलवाकर ‘बेटी बचाने बेटी पढ़ाने’ की शपथ भी दिलाई जाती है। बेटियों के नाम से केंद्र सरकार द्वारा दो साल पहले सुकन्या समृद्धि खाता योजना शुरू की गई थी। योजना में डाकखानों में माता-पिता अपनी दस साल तक की बेटी के नाम खाता खुलवाकर उसमें रुपये जमा करा सकते हैं। इस योजना में बेटी के नाम पर रुपये जमा किया जाता है। इस पर केंद्र सरकार द्वारा मोटा ब्याज दिया जाता है। जनवरी 2018 तक माता-पिता 23 हजार 22 बेटियों के नाम 50 करोड़ से अधिक रुपये बैंकों में जमा कर चुके हैं। अभी भी योजना में बहुत खाते खोले जा रहे हैं।
यह है योजना
योजना में माता-पिता अपनी दस साल तक की दो बेटियों के खाते खुलवा सकते हैं। इनमें एक साल में अधिकतम 12 एंट्री में न्यूनतम एक हजार से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक जमा किए जा सकते हैं। इस राशि पर 9.2 रुपये का वार्षिक ब्याज देय होगा। इस खाते में अधिकतम 14 साल तक रुपये जमा करने हैं। खाता खुलने के 21 साल बाद या फिर कन्या के विवाह के बाद डाक खाने में आवेदन करने पर खाता स्वयं बंद हो जाएगा। जमा राशि कन्या के खाते में आ जाएगी। इस राशि, इसके ब्याज आदि पर कोई कर नहीं लगेगा। बालिका के 18 वर्ष की आयु पूरी करने पर 50 प्रतिशत राशि निकाली जा सकती है। अगर माता-पिता अपनी एक बेटी के 14 साल तक हर महीने एक हजार रुपये जमा करते हैं तो 14 साल में कुल एक लाख 68 हजार रुपये जमा होंगे। एक अनुमान के अनुसार इसकी परिपक्वता राशि करीब छह लाख 41 हजार 92 रुपये मिलेगी। डाक अधीक्षक एके त्रिपाठी के अनुसार जिले के माता-पिता अपने बेटी के भविष्य के प्रति सचेत है। वे सुकन्या समृद्धि योजना से अपनी बेटियों के भविष्य को संवार रहे हैं। यह योजना बेटियों के भविष्य के लिए है। माता-पिता योजना से अपनी बेटियों का भविष्य सुरक्षित करें।
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बेटी को बचाने और पढ़ाने का केंद्र सरकार का अभियान पूरे देश में बढ़ता जा रहा है। जिले के गांव स्वाहेड़ी में तो आर्य समाज के हवन में वेदी में आहुति डलवाकर ‘बेटी बचाने बेटी पढ़ाने’ की शपथ भी दिलाई जाती है। बेटियों के नाम से केंद्र सरकार द्वारा दो साल पहले सुकन्या समृद्धि खाता योजना शुरू की गई थी। योजना में डाकखानों में माता-पिता अपनी दस साल तक की बेटी के नाम खाता खुलवाकर उसमें रुपये जमा करा सकते हैं। इस योजना में बेटी के नाम पर रुपये जमा किया जाता है। इस पर केंद्र सरकार द्वारा मोटा ब्याज दिया जाता है। जनवरी 2018 तक माता-पिता 23 हजार 22 बेटियों के नाम 50 करोड़ से अधिक रुपये बैंकों में जमा कर चुके हैं। अभी भी योजना में बहुत खाते खोले जा रहे हैं।
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यह है योजना
योजना में माता-पिता अपनी दस साल तक की दो बेटियों के खाते खुलवा सकते हैं। इनमें एक साल में अधिकतम 12 एंट्री में न्यूनतम एक हजार से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक जमा किए जा सकते हैं। इस राशि पर 9.2 रुपये का वार्षिक ब्याज देय होगा। इस खाते में अधिकतम 14 साल तक रुपये जमा करने हैं। खाता खुलने के 21 साल बाद या फिर कन्या के विवाह के बाद डाक खाने में आवेदन करने पर खाता स्वयं बंद हो जाएगा। जमा राशि कन्या के खाते में आ जाएगी। इस राशि, इसके ब्याज आदि पर कोई कर नहीं लगेगा। बालिका के 18 वर्ष की आयु पूरी करने पर 50 प्रतिशत राशि निकाली जा सकती है। अगर माता-पिता अपनी एक बेटी के 14 साल तक हर महीने एक हजार रुपये जमा करते हैं तो 14 साल में कुल एक लाख 68 हजार रुपये जमा होंगे। एक अनुमान के अनुसार इसकी परिपक्वता राशि करीब छह लाख 41 हजार 92 रुपये मिलेगी। डाक अधीक्षक एके त्रिपाठी के अनुसार जिले के माता-पिता अपने बेटी के भविष्य के प्रति सचेत है। वे सुकन्या समृद्धि योजना से अपनी बेटियों के भविष्य को संवार रहे हैं। यह योजना बेटियों के भविष्य के लिए है। माता-पिता योजना से अपनी बेटियों का भविष्य सुरक्षित करें।
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