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किसानों की ऋण माफी के लिए आया धन तीन साल तक पड़ा रहा बैंकों के खातों में

Tue, 19 Sep 2017 12:08 AM IST
Updated Tue, 19 Sep 2017 12:08 AM IST
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किसानों की ऋण माफी के लिए आया धन तीन साल तक पड़ा रहा बैंकों के खातों में
तीन साल खातों में पड़ा रहा ऋण माफी के लिए आया पैसा
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बिजनौर। 2008 में किसानों की ऋण माफी के लिए आया धन सहकारिता विभाग की कई बैंक शाखाओं में तीन साल तक पड़ा रहा। कोर्ट ने इस मामले में जांच कराई तो कर्मचारियों की धोखाधड़ी और अनियमितताएं सामने आईं। कोर्ट के आदेश पर इस मामले में लापरवाही बरतने वाले 35 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी व अमानत में खयानत की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
2008 में केंद्र सरकार ने किसानों का ऋण माफ किया था। ऋण की राशि सीधे बैंकों को दी गई थी। इस मामले में अधिक धन आने संबंधी एक जनहित याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी। हाईकोर्ट के आदेश पर नाबार्ड ने सहकारी विभाग में आए धन की जांच की गई तो पाया गया कि केंद्र से करीब 28 लाख रुपये ज्यादा भेजा गया है। यह धन सहकारी बैंक की शाखाओं में था। इस धन को साल 2011 में ब्याज सहित शासन को वापस कर दिया गया। लेकिन धन अतिरिक्त समय तक बैंक शाखाओं में पड़ा रहने पर कोर्ट ने अधिकारियों व कर्मचारियों पर अनियमितता बरतने संबंधी रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश दिए थे।
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सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता अमित त्यागी ने इस संबंध में 35 अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। घसीटा सिंह, गुणप्रकाश, रविराज सिंह, जयपाल सिंह यादव, महेंद्र सिंह, बलवंत सिंह, वीरेंद्र सिंह, योगेेंद्रपाल सिंह, भूपेंद्र सिंह राठी, यमराज सिंह रावत, अनिल बहादुर भटनागर, नरेश बड़वाल, दयाराम सिंह, ग्रंथ कुमार, परवीन सिंह, राजकुमार, कृपाल सिंह, युसुफ, कुलवीर सिंह, नौबहार सिंह, ऋषिराम, सीताराम, कुलवीर सिंह, प्रेम सिंह, सुरेंद्र सिंह, दयानंद यादव, रमेश सिंह, कमलेश कुमार, बाबूराम कन्नौजिया, राजेंद्र सिंह, कृष्णपाल सिांह, रामगोपाल सिसंह, उबैदुर्रहमान खान, सुभाषचंद्र अग्रवाल, योगेंद्रपाल सिंह के खिलाफ धारा 420, 406 में रिपोर्ट दर्ज कराई है। इनमे ग्रंथ कुमार व परवीन सिंह की मौत हो चुकी है।
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