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कर्ज के बोझ में लदे किसान ने फांसी के फंदे पर झूल कर दे दी जान

Mon, 19 Jun 2017 02:11 AM IST
Updated Mon, 19 Jun 2017 02:11 AM IST
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कर्ज के बोझ में लदे किसान ने फांसी के फंदे पर झूल कर दे दी जान
अमर उजाला ब्यूरो
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रजबपुर।
जनपद अमरोहा के रजबपुर थाना क्षेत्र के गांव महेशरा में कर्ज के बोझ में दबे किसान ने फंदे पर झूल कर अपनी जान दे दी। रविवार की सुबह अपने खेत पर खड़े यूके लिप्टिस के पेड़ से किसान का शव लटका मिला। सूचना पाकर घटनास्थल पहुंची थाना पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार को सरकारी मदद दिलाए जाने की मांग की है। उधर किसान की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
गांव महेशरा निवासी किसान शाकिर (42) पुत्र हनीफ अपनी 25 बीघा जमीन में खेती किसानी कर परिवार को भरण पोषण कर रहा था। दो बेटों में बड़ा बेटा नौशाद पैर से दिव्यांग हैं। जबकि छोटा बेटा मुन्साद खेती में हाथ बटाता है। रविवार की सुबह करीब साढ़े 11 बजे खेत पर जाने के लिए घर से निकला था। करीब 12.30 बजे अपने ही खेत में लिप्टिस के पेड़ पर शाकिर की लाश लटकी मिली। गले में खुद के ही अंगोछे का फंदा कसा था। पास पड़ोस के खेतों में मौजूद ग्रामीणों की नजर पड़ी तो शोर मच गया। शोर की आवाज गांव तक पहुंच गई। ग्रामीण दौड़ कर खेत पर पहुंच गए। परिजन भी रोते बिलखते खेत पर पहुंचे। पुलिस बुला ली गई। मृतक किसान के बेटे अनीस ने बताया कि उसके चाचा शाकिर ने दो साल पहले प्रथमा बैंक से तीन लाख रुपये का ऋण लिया था। ऋण चुकता करने को लेकर काफी दिन से परेशान चल रहे थे। ऋण निपटाने के लिए कुछ जमीन भी बेचने की बात भी घर में चल रही थी। उधर पुलिस ने मौके पर पहुंच कर पेड़ पर लटका शव नीचे उतारा और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रथमा बैंक रजबपुर के शाखा प्रबंधक अशोक कुमार ने बताया कि कर्ज माफी की घोषणा होने के बाद बैंक से किसी भी किसान को न तो नोटिस भेजा गया है और न ही किसी किसान पर कर्ज वसूली का दबाव बनाया गया।
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परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
रजबपुर। कर्ज के बोझ में दबे किसान की आत्महत्या से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पता लगने पर खेत पर पहुंचे परिजन शव देख कर बिलख पड़े। पत्नी तसलीम रो-रोकर बदहवास हो गई। बेटे नौशाद और मुंसाद की आंख से आसू नहीं थम रहे थे। परिजनों को बिलखता देख घटनास्थल पर मौजूद ग्रामीणों की आंखे छलछला गईं।
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