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23 लाख की धोखाधड़ी में पिता पुत्र की जमानत याचिका खारिज
Updated Thu, 13 Dec 2018 12:13 AM IST
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धोखाधड़ी के आरोपी पिता-पुत्र की जमानत याचिका खारिज
बिजनौर। प्रभारी जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने करीब 23 लाख की धोखाधड़ी के आरोपी पिता-पुत्र की जमानत याचिका निरस्त कर दी है।
बिजनौर की कुटिया कॉलोनी निवासी नरेंद्र सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह विश्वास ट्रैक्टर्स नाम की फर्म में काम करता था। हरनारायण शर्मा इस फर्म के स्वामी हैं। दस जुलाई 2015 को हरनारायण शर्मा व उनके पुत्र मनोज, भाई पवन, पवन की पत्नी बबली, वीरेंद्र शर्मा विश्वास ट्रैक्टर्स फर्म पर आए और कहा कि उन्होंने जेएमवी ऑटो इंडस्ट्रियल के नाम से एक कंपनी बनाई है। इसकी प्रोपराइटर पवन कुमार की पत्नी बबली देवी हैं। वे सब लोग उसमें साझेदार हैं। यह कंपनी एक ड्रॉ कराएगी। इसमें 11 हजार सदस्य होंगे। नरेंद्र से भी कंपनी का सदस्य बनने व अन्यों को भी सदस्य बनाने को कहा। कंपनी की ओर से 15 हजार रुपये मासिक वेतन देने की बात कही। इनाम न निकलने पर भी सभी को अंत में एलईडी दिया जाएगा। इसके लिए हर सदस्य को 15 माह तक एक हजार रुपये प्रति महीना जमा करना होगा। इस पर नरेंद्र खुद भी मेंबर बना और अपने 156 सदस्य बनाए। उन्होंने 23 लाख 40 हजार रुपया कंपनी में जमा किया। आरोप है कि ये सारे रुपये इन लोगों ने हड़प लिए। समय बीतने के बाद भी किसी को कोई इनाम नहीं मिला। जब रुपये वापस करने को कहा गया तो उसे मारपीट करके भगा दिया गया। कोर्ट ने इस मामले में पर्याप्त आधार न पाते हुए हरनारायण शर्मा व उनके पुत्र मनोज की जमानत याचिका निरस्त कर दी है।
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बिजनौर। प्रभारी जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने करीब 23 लाख की धोखाधड़ी के आरोपी पिता-पुत्र की जमानत याचिका निरस्त कर दी है।
बिजनौर की कुटिया कॉलोनी निवासी नरेंद्र सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह विश्वास ट्रैक्टर्स नाम की फर्म में काम करता था। हरनारायण शर्मा इस फर्म के स्वामी हैं। दस जुलाई 2015 को हरनारायण शर्मा व उनके पुत्र मनोज, भाई पवन, पवन की पत्नी बबली, वीरेंद्र शर्मा विश्वास ट्रैक्टर्स फर्म पर आए और कहा कि उन्होंने जेएमवी ऑटो इंडस्ट्रियल के नाम से एक कंपनी बनाई है। इसकी प्रोपराइटर पवन कुमार की पत्नी बबली देवी हैं। वे सब लोग उसमें साझेदार हैं। यह कंपनी एक ड्रॉ कराएगी। इसमें 11 हजार सदस्य होंगे। नरेंद्र से भी कंपनी का सदस्य बनने व अन्यों को भी सदस्य बनाने को कहा। कंपनी की ओर से 15 हजार रुपये मासिक वेतन देने की बात कही। इनाम न निकलने पर भी सभी को अंत में एलईडी दिया जाएगा। इसके लिए हर सदस्य को 15 माह तक एक हजार रुपये प्रति महीना जमा करना होगा। इस पर नरेंद्र खुद भी मेंबर बना और अपने 156 सदस्य बनाए। उन्होंने 23 लाख 40 हजार रुपया कंपनी में जमा किया। आरोप है कि ये सारे रुपये इन लोगों ने हड़प लिए। समय बीतने के बाद भी किसी को कोई इनाम नहीं मिला। जब रुपये वापस करने को कहा गया तो उसे मारपीट करके भगा दिया गया। कोर्ट ने इस मामले में पर्याप्त आधार न पाते हुए हरनारायण शर्मा व उनके पुत्र मनोज की जमानत याचिका निरस्त कर दी है।