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गंगा जमुनी मुशायरे में शायरों ने पेश किए कलाम
Updated Fri, 22 Jun 2018 11:48 PM IST
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...दिल रो रहा है आज के हालात देखकर
नजीबाबाद। रिवॉल्यूशन ग्रुप नजीबाबाद की ओर से गंगा-जमुनी ईद मिलन मुशायरे में शायरों ने अपने कलाम से सामयीन को खुश किया। उर्दू अदब की खिदमत के लिए महेंद्र अश्क, अख्तर मुल्तानी सहित पांच शायरों को सम्मानित किया गया।
मदरसा सिराजुल उलूम हवेलीतला में रिवॉल्यूशन ग्रुप की ओर से ईद मिलन समारोह में वरिष्ठ शायर महेंद्र अश्क, अख्तर मुल्तानी, डॉ. आफताब नोमानी, वसीम अहमद, डॉ. इल्यास अंसारी को उर्दू अदब की खिदमत के लिए सम्मानित किया गया। शुएब नफीस की नात ए पाक से शुरू हुए शायरों ने अपने ताजा कलाम पेश किए।
महेंद्र अश्क ने कुछ इस तरह की तेरी तस्वीर मुकम्मल, पहले मुझे देखेगा तुझे देखने वाला..., डॉ. तय्यब जमाल ने अपने जो हैं अब उनके ख्यालात देखकर, दिल रो रहा है आज के हालात देखकर..., डॉ. आफताब नोमानी ने वक्त है तू अब भी हमको सौंप दे अपना निजाम, कर नहीं सकता हुुकूमत हमसे बेहतर देखना..., कारी शुएब ने दिल का आइना उसने तोड़ दिया, तीन सालों में हाथ छोड़ दिया, अख्तर मुल्तानी ने भाई भाई का न रहा, अक्ल का जवाल हो गया... कलाम पेश किया।
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मुशायरे में शाकिर रिजवी, डॉ. इल्यास, अब्दुल हई सबा, सनव्वर अली, अल्ताफ रजा, मुफ्ती उवैस शिब्ली, मोहम्मद शाद, सरफराज ने भी कलाम पेश किए। मुख्य अतिथि वसीम अहमद ने कहा कि उर्दू अदब को जिंदा रखने में मुशायरे और शायरों का अहम किरदार रहा है। उन्होंने अदबी महफिल आयोजित कर उर्दू को उसका सही मुकाम दिलाने की गुजारिश की। संचालक डॉ. शाकिर खां, जीशान नजीबाबादी ने आभार व्यक्त किया। आसिद नजीबाबादी, मोहम्मद साकिब, नईमुल अख्तर, कारी इम्तियाज, जीशान मुल्तानी, तारिक पठान, शाहवेज, मंसूब, शारिक, मुुकीम, वसीम शामिल रहे।
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नजीबाबाद। रिवॉल्यूशन ग्रुप नजीबाबाद की ओर से गंगा-जमुनी ईद मिलन मुशायरे में शायरों ने अपने कलाम से सामयीन को खुश किया। उर्दू अदब की खिदमत के लिए महेंद्र अश्क, अख्तर मुल्तानी सहित पांच शायरों को सम्मानित किया गया।
मदरसा सिराजुल उलूम हवेलीतला में रिवॉल्यूशन ग्रुप की ओर से ईद मिलन समारोह में वरिष्ठ शायर महेंद्र अश्क, अख्तर मुल्तानी, डॉ. आफताब नोमानी, वसीम अहमद, डॉ. इल्यास अंसारी को उर्दू अदब की खिदमत के लिए सम्मानित किया गया। शुएब नफीस की नात ए पाक से शुरू हुए शायरों ने अपने ताजा कलाम पेश किए।
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महेंद्र अश्क ने कुछ इस तरह की तेरी तस्वीर मुकम्मल, पहले मुझे देखेगा तुझे देखने वाला..., डॉ. तय्यब जमाल ने अपने जो हैं अब उनके ख्यालात देखकर, दिल रो रहा है आज के हालात देखकर..., डॉ. आफताब नोमानी ने वक्त है तू अब भी हमको सौंप दे अपना निजाम, कर नहीं सकता हुुकूमत हमसे बेहतर देखना..., कारी शुएब ने दिल का आइना उसने तोड़ दिया, तीन सालों में हाथ छोड़ दिया, अख्तर मुल्तानी ने भाई भाई का न रहा, अक्ल का जवाल हो गया... कलाम पेश किया।
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मुशायरे में शाकिर रिजवी, डॉ. इल्यास, अब्दुल हई सबा, सनव्वर अली, अल्ताफ रजा, मुफ्ती उवैस शिब्ली, मोहम्मद शाद, सरफराज ने भी कलाम पेश किए। मुख्य अतिथि वसीम अहमद ने कहा कि उर्दू अदब को जिंदा रखने में मुशायरे और शायरों का अहम किरदार रहा है। उन्होंने अदबी महफिल आयोजित कर उर्दू को उसका सही मुकाम दिलाने की गुजारिश की। संचालक डॉ. शाकिर खां, जीशान नजीबाबादी ने आभार व्यक्त किया। आसिद नजीबाबादी, मोहम्मद साकिब, नईमुल अख्तर, कारी इम्तियाज, जीशान मुल्तानी, तारिक पठान, शाहवेज, मंसूब, शारिक, मुुकीम, वसीम शामिल रहे।