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Bijnor News: 150 वर्ष पुराना सिद्धपीठ भक्तों की आस्था का केंद्र
Sat, 25 Mar 2023 12:35 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Sat, 25 Mar 2023 12:35 AM IST
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बिजनौर के कस्बा झालू का मां काली का प्राचीन सिद्ध पीठ मंदिर।
- नवरात्रों में मां के दर्शन करने के लिए लगी रहती है भक्तों की भीड़
- अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित कर मां के नौ स्वरूपों की होती है पूजा अर्चना
फोटो..
संवाद न्यूज एजेंसी
झालू। कस्बे में मां काली का प्राचीन सिद्ध पीठ मंदिर आस्था का प्रतीक है। मंदिर की मान्यता है कि यह सिद्धपीठ 150 वर्ष पुराना है। यहां भक्तों की सभी मनोकामना मां काली पूर्ण करती हैं। नवरात्रों के नौ दिन मंदिर पर सुबह-शाम मां काली की भव्य आरती होती है। अष्ठमी के दिन अखंड पाठ भी किया जाएगा, जो नवमी को समाप्त होगा।
कस्बा झालू के मोहल्ला जोशियान में स्थित मां काली का प्राचीन सिद्ध पीठ मंदिर 150 वर्ष से भी पुराना है। श्रद्धालु परिवार की सुख समृद्धि की कामना करने के लिए मंदिर में पूजा अर्चना करने आते हैं। मंदिर परिसर में नौ देवियो, हनुमान, राम दरबार, भैरव, शनिदेव, भूरेमल देवता की मूर्तियां विराजमान है। नवरात्रों से पहले ही मंदिर को फूल, मालाओं, झालर आदि से सजाया गया।
नवरात्रों में अखंड ज्योति प्रज्वलित कर मां के नौ स्वरूपों की विधि विधान से पूजा अर्चना की गई। नवरात्रों में सैकड़ों श्रद्धालु आरती में पहुंचकर धर्म लाभ लेते हैं। मंदिर कमेटी अध्यक्ष राजीव शर्मा का कहना है कि जो भक्त मां काली की सच्चे मन से पूजा करता है, उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है।
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दादी चमपिया ने कराया था मंदिर का निर्माण : पुष्पेंद्र अग्रवाल
सेठ पुष्पेंद्र अग्रवाल ने बताया कि मंदिर 150 साल से भी अधिक पुराना है। उनकी दादी चमपिया देवी ने अपने परिवार के मकानों की चारों दिशाओं को सुरक्षित करने के उद्देश्य से ठाकुरद्वारा शिव मंदिर, शक्ति पीठ, पीर शकाला व मां काली के मंदिर का निर्माण करवाया था।
प्राचीन सिद्धपीठ है मां काली का मंदिर : अर्जुन अग्रवाल
अर्जुन अग्रवाल ने कहा कि मां काली का प्राचीन सिद्ध पीठ मंदिर है। पहले मंदिर में तालाब समीप होने से बरसात पानी भर जाता था। लेकिन अग्रवाल समाज ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। मां काली का प्राचीन सिद्धपीठ आस्था का प्रतीक है।
तीर्थ यात्रा पर जाने से पहले मां दर्शन जरूरी : अभिषेक गर्ग
अभिषेक गर्ग का कहना है कि कोई भी भक्त तीर्थ यात्रा पर जाने से पहले प्राचीन मां काली के मंदिर में पूजा अर्चना करता है। इसके बाद तीर्थ यात्रा से वापस आकर मां काली के मंदिर में पूजा अर्चना करता है। दूर-दूर से मां के दर्शन और प्रसाद चढ़ाने आते हैं।
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- अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित कर मां के नौ स्वरूपों की होती है पूजा अर्चना
फोटो..
संवाद न्यूज एजेंसी
झालू। कस्बे में मां काली का प्राचीन सिद्ध पीठ मंदिर आस्था का प्रतीक है। मंदिर की मान्यता है कि यह सिद्धपीठ 150 वर्ष पुराना है। यहां भक्तों की सभी मनोकामना मां काली पूर्ण करती हैं। नवरात्रों के नौ दिन मंदिर पर सुबह-शाम मां काली की भव्य आरती होती है। अष्ठमी के दिन अखंड पाठ भी किया जाएगा, जो नवमी को समाप्त होगा।
कस्बा झालू के मोहल्ला जोशियान में स्थित मां काली का प्राचीन सिद्ध पीठ मंदिर 150 वर्ष से भी पुराना है। श्रद्धालु परिवार की सुख समृद्धि की कामना करने के लिए मंदिर में पूजा अर्चना करने आते हैं। मंदिर परिसर में नौ देवियो, हनुमान, राम दरबार, भैरव, शनिदेव, भूरेमल देवता की मूर्तियां विराजमान है। नवरात्रों से पहले ही मंदिर को फूल, मालाओं, झालर आदि से सजाया गया।
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नवरात्रों में अखंड ज्योति प्रज्वलित कर मां के नौ स्वरूपों की विधि विधान से पूजा अर्चना की गई। नवरात्रों में सैकड़ों श्रद्धालु आरती में पहुंचकर धर्म लाभ लेते हैं। मंदिर कमेटी अध्यक्ष राजीव शर्मा का कहना है कि जो भक्त मां काली की सच्चे मन से पूजा करता है, उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है।
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दादी चमपिया ने कराया था मंदिर का निर्माण : पुष्पेंद्र अग्रवाल
सेठ पुष्पेंद्र अग्रवाल ने बताया कि मंदिर 150 साल से भी अधिक पुराना है। उनकी दादी चमपिया देवी ने अपने परिवार के मकानों की चारों दिशाओं को सुरक्षित करने के उद्देश्य से ठाकुरद्वारा शिव मंदिर, शक्ति पीठ, पीर शकाला व मां काली के मंदिर का निर्माण करवाया था।
प्राचीन सिद्धपीठ है मां काली का मंदिर : अर्जुन अग्रवाल
अर्जुन अग्रवाल ने कहा कि मां काली का प्राचीन सिद्ध पीठ मंदिर है। पहले मंदिर में तालाब समीप होने से बरसात पानी भर जाता था। लेकिन अग्रवाल समाज ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। मां काली का प्राचीन सिद्धपीठ आस्था का प्रतीक है।
तीर्थ यात्रा पर जाने से पहले मां दर्शन जरूरी : अभिषेक गर्ग
अभिषेक गर्ग का कहना है कि कोई भी भक्त तीर्थ यात्रा पर जाने से पहले प्राचीन मां काली के मंदिर में पूजा अर्चना करता है। इसके बाद तीर्थ यात्रा से वापस आकर मां काली के मंदिर में पूजा अर्चना करता है। दूर-दूर से मां के दर्शन और प्रसाद चढ़ाने आते हैं।