{"_id":"615b48f68ebc3efaa6443c31","slug":"15-arrested-for-smuggling-wildlife-pangolins-bijnor-news-mrt5592466132","type":"story","status":"publish","title_hn":"वन्यजीव पैंगोलिन की तस्करी में 15 गिरफ्तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वन्यजीव पैंगोलिन की तस्करी में 15 गिरफ्तार
विज्ञापन
नगीना देहात में पकड़ गए पैंगोलिन की तस्करी के आरोपी।
- फोटो : BIJNOR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वन्यजीव पैंगोलिन की तस्करी में 15 गिरफ्तार
बिजनौर। विलुप्त प्राय वन्यजीव पैंगोलिन की तस्करी में पुलिस ने 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जबकि तीन आरोपी अभी फरार हैं। पकड़े गए आरोपियों में खरीदार और बेचने वाले दोनों गुट शामिल है। पैंगोलिन की सौदेबाजी एक करोड़ रुपये में हुई थी। जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत चार करोड़ रुपये बताई जा रही है।
रविवार की शाम 8:30 बजे एसओजी और नगीना देहात पुलिस ने वन क्षेत्र के पास गांव बनोवाला में मस्तान के डेरे पर दबिश दी। डेरे पर विलुप्त प्राय वन्यजीव पैंगोलिन की खरीद फरोख्त के लिए सौदेबाजी चल रही थी। बिहार से आए छह तस्कर एक करोड़ में पैंगोलिन खरीद रहे थे। तभी पुलिस ने सभी 15 आरोपियों को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों में छह बिहार, एक हरियाणा, एक मेरठ और सात बिजनौर के ही रहने वाले हैं। पूछताछ में साफ हुआ कि पैंगोलिन को मस्तान और साबिर ने कौड़िया रेंज के मोहनवाली आरक्षित वन क्षेत्र से चार पांच दिन पहले पकड़ा था। पकड़ने के बाद मस्तान और साबिर ने टांडा के पूर्व प्रधान फुरकान से संपर्क साधा। फुरकान ने नजीबाबाद के परवेज और सुमित चौहान और बिजनौर के संजीव त्यागी से संपर्क किया।
इसके बाद संजीव त्यागी ने हरियाणा के राजेश कुमार से बात की। राजेश ने बिहार के रहने वाले तनवीर आलम से संपर्क किया। तनवीर आलम ने बिहार एसटीएफ के एक सिपाही समेत अपने छह लोगों को बिजनौर भेज दिया। सौदेबाजी चल ही रही थी, पुलिस ने उन्हें दबोच लिया। इनके पास से वन्यजीव पैंगोलिन, 11 मोबाइल फोन, तीन कीपैड, तीन कार और करीब पंद्रह हजार रुपये बरामद हुए हैं। पकड़े आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज करते हुए चालान कर दिया गया।
विज्ञापन
ये हुए गिरफ्तार
- मस्तान निवासी बनोवाला नगीना
- साबिर निवासी टांडामाईदास नगीना देहात
- फुरकान निवासी टांडामाईदास नगीना देहात बिजनौर
- मनोज कुमार निवासी चौंकपुरी
- विकास निवासी अंगाखेड़ी
- सुमित चौहान निवासी नजीबाबाद
- पवन निवासी नजीबाबाद
- राजेश निवासी मोहल्ला हरवंशपुरा यमुनानगर हरियाणा
- दीपक निवासी नटेशपुरम कॉलोनी कंकरखेड़ा मेरठ
- संदीप साहू निवासी पुरानी बाजार शाहू पोखर मुजफ्फरपुर बिहार
- मृत्युंजय सिंह निवासी पुरानी बाजार मोतीपुर जिला मुजफ्फरपुर बिहार
- बालेंद्र कुमार निवासी किशनपुर मधुवन थाना कुंढनी मुजफ्फरपुर बिहार
- शंभु कुमार निवासी पखनाहा जितवार थाना मीनापुर मुजफ्फरपुर बिहार
- आशीष निवासी न्यू कॉलोनी बालूृ घाट जिला मुजफ्फरपुर बिहार
- संतन राज निवासी बेरर टोलान रानी तालाब जिला पटना बिहार
ये हैं फरार
परवेज निवासी नजीबाबाद
संजीव त्यागी निवासी बिजनौर
तनवीर आलम निवासी मुजफ्फरपुर बिहार
गंगा खादर और रेतीले क्षेत्र में मिलते हैं पैंगोलिन
- चींटी और दीमक होता है इसका मुख्य आहार, कहा जाता है सोल्हू सांप
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। जिले में पैंगोलिन काफी संख्या में मिलता है। भूड़ और गंगा के खादर में ये आराम से दिख जाते हैं। हालांकि पैंगोलिन की जिले में अब तक गणना नहीं की गई है। इसे आम भाषा में सोल्हू सांप कहा जाता है। यह पर्यावरण के लिए बहुत उपयोगी जीव है। चींटी और दीमक इसका मुख्य आहार होती हैं। ये दीमक को खाकर उनकी संख्या को नियंत्रित करते हैं। अगर ये दीमकों को न खाएं तो दीमकों की संख्या बहुत बढ़ जाएगी और वे पेड़ों को नुकसान पहुंचाएंगी।
पैंगोलिन के शरीर पर शल्क होते हैं और खतरा महसूस होने पर यह सिकुड़कर फुटबॉल की तरह बन जाता है। बिजनौर में अमानगढ़ वन रेंज के अलावा रेतीले व गंगा क्षेत्र में ये काफी संख्या में मिलते हैं। यह दुर्लभ प्रजाति में शामिल है। पहले गांवों के आसपास ये आराम से दिख जाते थे, लेकिन अब आबादी बढ़ने से इनके रहने का क्षेत्र काफी कम हुआ है। गांव वाले इस जीव का शिकार भी नहीं करते हैं और जाने देते हैं। शायद पहली बार इस जीव की तस्करी का मामला सामने आया है। इसकी हड्डी और मांस को शक्तिवर्धक दवाइयों मेें प्रयोग किया जाता है। डीएफओ डॉ. एम सेम्मारन के अनुसार वन्य जीवों के संरक्षण के लिए लगातार कोशिश की जा रही है। पैंगोलिन की संख्या जिले में काफी है। आमतौर पर जिले में इन्हें नुकसान नहीं पहुंचाया जाता है।
शेड्यूल वन में आता है पैंगोलिन
ट्रैफिक इंडिया के डायरेक्ट साकेश बडोला ने बताया कि पैंगोलिन शेड्यूल वन में आता है। इसके शिकार या तस्करी के मामले में पहली बार पकड़े जाने पर तीन और दूसरी बार पकड़े जाने पर सात साल की सजा हो सकती है।
विलुप्त होने की कगार पर पहुंचे वन्यजीव पैंगोलिन की तस्करी करते हुए 15 आरोपियों को पकड़ा गया है। आरोपी बिहार, हरियाणा और उत्तरप्रदेश के रहने वाले हैं। इनमें एक बिहार एसटीएफ का सिपाही भी है, जोकि एक महीने की छुट्टी पर चल रहा है। डीएफओ और अन्य वन अधिकारियों को सूचना दे दी गई है
- डॉ. धर्मवीर सिंह, एसपी
विज्ञापन
बिजनौर। विलुप्त प्राय वन्यजीव पैंगोलिन की तस्करी में पुलिस ने 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जबकि तीन आरोपी अभी फरार हैं। पकड़े गए आरोपियों में खरीदार और बेचने वाले दोनों गुट शामिल है। पैंगोलिन की सौदेबाजी एक करोड़ रुपये में हुई थी। जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत चार करोड़ रुपये बताई जा रही है।
रविवार की शाम 8:30 बजे एसओजी और नगीना देहात पुलिस ने वन क्षेत्र के पास गांव बनोवाला में मस्तान के डेरे पर दबिश दी। डेरे पर विलुप्त प्राय वन्यजीव पैंगोलिन की खरीद फरोख्त के लिए सौदेबाजी चल रही थी। बिहार से आए छह तस्कर एक करोड़ में पैंगोलिन खरीद रहे थे। तभी पुलिस ने सभी 15 आरोपियों को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों में छह बिहार, एक हरियाणा, एक मेरठ और सात बिजनौर के ही रहने वाले हैं। पूछताछ में साफ हुआ कि पैंगोलिन को मस्तान और साबिर ने कौड़िया रेंज के मोहनवाली आरक्षित वन क्षेत्र से चार पांच दिन पहले पकड़ा था। पकड़ने के बाद मस्तान और साबिर ने टांडा के पूर्व प्रधान फुरकान से संपर्क साधा। फुरकान ने नजीबाबाद के परवेज और सुमित चौहान और बिजनौर के संजीव त्यागी से संपर्क किया।
विज्ञापन
इसके बाद संजीव त्यागी ने हरियाणा के राजेश कुमार से बात की। राजेश ने बिहार के रहने वाले तनवीर आलम से संपर्क किया। तनवीर आलम ने बिहार एसटीएफ के एक सिपाही समेत अपने छह लोगों को बिजनौर भेज दिया। सौदेबाजी चल ही रही थी, पुलिस ने उन्हें दबोच लिया। इनके पास से वन्यजीव पैंगोलिन, 11 मोबाइल फोन, तीन कीपैड, तीन कार और करीब पंद्रह हजार रुपये बरामद हुए हैं। पकड़े आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज करते हुए चालान कर दिया गया।
विज्ञापन
ये हुए गिरफ्तार
- मस्तान निवासी बनोवाला नगीना
- साबिर निवासी टांडामाईदास नगीना देहात
- फुरकान निवासी टांडामाईदास नगीना देहात बिजनौर
- मनोज कुमार निवासी चौंकपुरी
- विकास निवासी अंगाखेड़ी
- सुमित चौहान निवासी नजीबाबाद
- पवन निवासी नजीबाबाद
- राजेश निवासी मोहल्ला हरवंशपुरा यमुनानगर हरियाणा
- दीपक निवासी नटेशपुरम कॉलोनी कंकरखेड़ा मेरठ
- संदीप साहू निवासी पुरानी बाजार शाहू पोखर मुजफ्फरपुर बिहार
- मृत्युंजय सिंह निवासी पुरानी बाजार मोतीपुर जिला मुजफ्फरपुर बिहार
- बालेंद्र कुमार निवासी किशनपुर मधुवन थाना कुंढनी मुजफ्फरपुर बिहार
- शंभु कुमार निवासी पखनाहा जितवार थाना मीनापुर मुजफ्फरपुर बिहार
- आशीष निवासी न्यू कॉलोनी बालूृ घाट जिला मुजफ्फरपुर बिहार
- संतन राज निवासी बेरर टोलान रानी तालाब जिला पटना बिहार
ये हैं फरार
परवेज निवासी नजीबाबाद
संजीव त्यागी निवासी बिजनौर
तनवीर आलम निवासी मुजफ्फरपुर बिहार
गंगा खादर और रेतीले क्षेत्र में मिलते हैं पैंगोलिन
- चींटी और दीमक होता है इसका मुख्य आहार, कहा जाता है सोल्हू सांप
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। जिले में पैंगोलिन काफी संख्या में मिलता है। भूड़ और गंगा के खादर में ये आराम से दिख जाते हैं। हालांकि पैंगोलिन की जिले में अब तक गणना नहीं की गई है। इसे आम भाषा में सोल्हू सांप कहा जाता है। यह पर्यावरण के लिए बहुत उपयोगी जीव है। चींटी और दीमक इसका मुख्य आहार होती हैं। ये दीमक को खाकर उनकी संख्या को नियंत्रित करते हैं। अगर ये दीमकों को न खाएं तो दीमकों की संख्या बहुत बढ़ जाएगी और वे पेड़ों को नुकसान पहुंचाएंगी।
पैंगोलिन के शरीर पर शल्क होते हैं और खतरा महसूस होने पर यह सिकुड़कर फुटबॉल की तरह बन जाता है। बिजनौर में अमानगढ़ वन रेंज के अलावा रेतीले व गंगा क्षेत्र में ये काफी संख्या में मिलते हैं। यह दुर्लभ प्रजाति में शामिल है। पहले गांवों के आसपास ये आराम से दिख जाते थे, लेकिन अब आबादी बढ़ने से इनके रहने का क्षेत्र काफी कम हुआ है। गांव वाले इस जीव का शिकार भी नहीं करते हैं और जाने देते हैं। शायद पहली बार इस जीव की तस्करी का मामला सामने आया है। इसकी हड्डी और मांस को शक्तिवर्धक दवाइयों मेें प्रयोग किया जाता है। डीएफओ डॉ. एम सेम्मारन के अनुसार वन्य जीवों के संरक्षण के लिए लगातार कोशिश की जा रही है। पैंगोलिन की संख्या जिले में काफी है। आमतौर पर जिले में इन्हें नुकसान नहीं पहुंचाया जाता है।
शेड्यूल वन में आता है पैंगोलिन
ट्रैफिक इंडिया के डायरेक्ट साकेश बडोला ने बताया कि पैंगोलिन शेड्यूल वन में आता है। इसके शिकार या तस्करी के मामले में पहली बार पकड़े जाने पर तीन और दूसरी बार पकड़े जाने पर सात साल की सजा हो सकती है।
विलुप्त होने की कगार पर पहुंचे वन्यजीव पैंगोलिन की तस्करी करते हुए 15 आरोपियों को पकड़ा गया है। आरोपी बिहार, हरियाणा और उत्तरप्रदेश के रहने वाले हैं। इनमें एक बिहार एसटीएफ का सिपाही भी है, जोकि एक महीने की छुट्टी पर चल रहा है। डीएफओ और अन्य वन अधिकारियों को सूचना दे दी गई है
- डॉ. धर्मवीर सिंह, एसपी

नगीना देहात में पकड़े गए तस्करी के आरोपियों से बरामद पैंगोलिन।- फोटो : BIJNOR