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माता-पिता की सेवा से सब कुछ संभव : बाबा फुलसंदा वाले
Updated Tue, 21 Aug 2018 12:21 AM IST
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माता-पिता की सेवा से सब कुछ संभव : बाबा फुलसंदा वाले
बिजनौर । एक तू सच्चा, तेरा नाम सच्चा के ऋषि सतपुरुष बाबा फुलसंदा वाले ने कहा कि माता-पिता की सेवा और परमेश्वर की आराधना करने से सब कुछ संभव है। बाबा ने सत्संग में प्रवचन करते हुए ये बात कही। इस दौरान बाबा और उनके अनुयायियों ने कुष्ठ आश्रम पहुंचकर चने की दाल और आटा आदि खाद्य सामग्री वितरित की।
सोमवार को काकरान वाटिका में अनुयायियों की ओर से आयोजित सत्संग में प्रवचन करते हुए सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले ने कहा कि जो व्यक्ति दूसरों का मंगल करने की सोचता है, उसे परमात्मा जीवन में कभी कोई किसी प्रकार का कष्ट नहीं देता। उन्होंने कहा कि सभी को सुबह उठते ही सर्वप्रथम परमात्मा का नाम लेना चाहिए और सोने से पूर्व ईश्वर का ध्यान करके ही सोना चाहिए। मातृभूमि सबसे बड़ी है। इससे बढ़कर कोई और नहीं है। इसकी रक्षा के लिए हम सभी को हर समय तन मन धन से तैयार रहना चाहिए। बाबा ने कहा कि माता-पिता की सेवा सर्वोपरि है। ये दोनों परमात्मा से भी बढ़कर हैं। इसलिए इनकी आन बान शान को कभी ठेस नहीं पहुंचानी चाहिए। जो व्यक्ति इन सब बातों का स्मरण करता है। वह निरोगी रहकर संपन्नता के साथ जीवन व्यतीत करता है। सत्संग के बाद नाम दान और भंडारे का आयोजन हुआ। इसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण करते हुए पुण्य लाभ अर्जित किया।
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बिजनौर । एक तू सच्चा, तेरा नाम सच्चा के ऋषि सतपुरुष बाबा फुलसंदा वाले ने कहा कि माता-पिता की सेवा और परमेश्वर की आराधना करने से सब कुछ संभव है। बाबा ने सत्संग में प्रवचन करते हुए ये बात कही। इस दौरान बाबा और उनके अनुयायियों ने कुष्ठ आश्रम पहुंचकर चने की दाल और आटा आदि खाद्य सामग्री वितरित की।
सोमवार को काकरान वाटिका में अनुयायियों की ओर से आयोजित सत्संग में प्रवचन करते हुए सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले ने कहा कि जो व्यक्ति दूसरों का मंगल करने की सोचता है, उसे परमात्मा जीवन में कभी कोई किसी प्रकार का कष्ट नहीं देता। उन्होंने कहा कि सभी को सुबह उठते ही सर्वप्रथम परमात्मा का नाम लेना चाहिए और सोने से पूर्व ईश्वर का ध्यान करके ही सोना चाहिए। मातृभूमि सबसे बड़ी है। इससे बढ़कर कोई और नहीं है। इसकी रक्षा के लिए हम सभी को हर समय तन मन धन से तैयार रहना चाहिए। बाबा ने कहा कि माता-पिता की सेवा सर्वोपरि है। ये दोनों परमात्मा से भी बढ़कर हैं। इसलिए इनकी आन बान शान को कभी ठेस नहीं पहुंचानी चाहिए। जो व्यक्ति इन सब बातों का स्मरण करता है। वह निरोगी रहकर संपन्नता के साथ जीवन व्यतीत करता है। सत्संग के बाद नाम दान और भंडारे का आयोजन हुआ। इसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण करते हुए पुण्य लाभ अर्जित किया।
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