{"_id":"5b6f3a7f4f1c1bdf258b4737","slug":"141534016127-bijnor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"संविधान की प्रतियां जलाने और आंबेडकर को अपशब्द कहने पर भड़े दलित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संविधान की प्रतियां जलाने और आंबेडकर को अपशब्द कहने पर भड़े दलित
Updated Sun, 12 Aug 2018 01:05 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमरोहा। दिल्ली जंतर-मंतर पर संविधान की प्रतियां जलाने और बाबा भीमराव आंबेडकर को अपशब्द कहने के विरोध में दलित युवाओं ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपकर आरोपियों पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग की है।
शनिवार को एससी समाज के युवक एकत्र होकर जिला मुख्यालय पहुंचे। यहां सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। डीएम को आवास पर ज्ञापन सौंपकर बताया कि भाजपा और संघ के इशारे परप बाबा साहब का अपमान किया जा रहा है। कहा कि आजादी के 70 साल बाद देश के जंतर मंतर पर देश के संविधान की प्रतियां कुछ मनुवादी हिंदूवादी, सामंती ताकतों ने बीजेपी और आरएसएस के संरक्षण में जलाई गई है। जो देशद्रोह की श्रेणी में आता है। संविधान की प्रतियां जाने का मतलब भारत देश की संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न, समाजवादी, पथ निरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य होने की अवधारणा का विरोध करना है। ऐसा कृत्य करने वालों ने लोकतंत्र में विश्वास करने वालो को भारी ठेस पहुंचाई है। इसलिए संविधान की प्रतियां जलाने वालों पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलाकर सख्त कार्रवाई की जाए। इस दौरान कुलदीप सिंह, प्रशांत सागर, अजीत कुमार, रेवती सिंह, दीपक सागर, नावेद आयाज, मोहित, अरूण कुमार, जोनी, आकाश मौजूद रहे।
विज्ञापन
शनिवार को एससी समाज के युवक एकत्र होकर जिला मुख्यालय पहुंचे। यहां सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। डीएम को आवास पर ज्ञापन सौंपकर बताया कि भाजपा और संघ के इशारे परप बाबा साहब का अपमान किया जा रहा है। कहा कि आजादी के 70 साल बाद देश के जंतर मंतर पर देश के संविधान की प्रतियां कुछ मनुवादी हिंदूवादी, सामंती ताकतों ने बीजेपी और आरएसएस के संरक्षण में जलाई गई है। जो देशद्रोह की श्रेणी में आता है। संविधान की प्रतियां जाने का मतलब भारत देश की संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न, समाजवादी, पथ निरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य होने की अवधारणा का विरोध करना है। ऐसा कृत्य करने वालों ने लोकतंत्र में विश्वास करने वालो को भारी ठेस पहुंचाई है। इसलिए संविधान की प्रतियां जलाने वालों पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलाकर सख्त कार्रवाई की जाए। इस दौरान कुलदीप सिंह, प्रशांत सागर, अजीत कुमार, रेवती सिंह, दीपक सागर, नावेद आयाज, मोहित, अरूण कुमार, जोनी, आकाश मौजूद रहे।
विज्ञापन