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दो अंधेरी जिंदगी की रोशन
Updated Tue, 14 Nov 2017 12:07 AM IST
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बिजनौर। मरने के बाद भी कोमल प्रसाद अग्रवाल दो लोगों की जिंदगी रोशन कर गए हैं। कोमल प्रसाद मृत्यु के बाद परिजनों ने उनकी इच्छानुसार उनकी आंखें दान कर दी हैं। समाज के हर वर्ग ने कोमल प्रसाद अग्रवाल व उनके परिजनों के इस कदम की प्रशंसा की है।
बिजनौर के मोहल्ला जाटान निवासी 80 वर्षीय कोमल प्रसाद अग्रवाल व्यापारी थे। उनके भाई वीरेंद्र अग्रवाल व भतीजे विकास अग्रवाल द्वारा नेत्रदान अभियान चलाया जा रहा है। विकास अग्रवाल अपनी माता सहित कई परिचितों की आंखें मृत्यु बाद दान करा चुके हैं। इससे प्रभावित होकर कोमल प्रसाद अग्रवाल ने अपने परिजनों ने मृत्यु बाद उनकी आंखें भी दान करने को कहा था। रविवार रात करीब सवा दस बजे कोमल प्रसाद अग्रवाल का निधन हो गया। उनके बेटे अनुज अग्रवाल, बेटी ममता अग्रवाल, अंजना अग्रवाल, मनीषा अग्रवाल व पुत्रवधू शिखा अग्रवाल ने विकास अग्रवाल से नेत्रदान कराने के लिए कहा। विकास अग्रवाल द्वारा सूचना दिए जाने पर रात साढ़े 12 बजे ही निर्मल आश्रम आई इंस्टीट्यूट ऋषिकेश के चिकित्सकों की टीम जाटान पहुंची और नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की। कोमल प्रसाद अग्रवाल के बेटे अनुज अग्रवाल का कहना है कि उनके पिता के जाने से परिवार को महान दुख हुआ है। उनके पिता ने ने नेत्रदान का जो निर्णय लिया था, परिवारवालों को उस पर हमेशा गर्व रहेगा।
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बिजनौर के मोहल्ला जाटान निवासी 80 वर्षीय कोमल प्रसाद अग्रवाल व्यापारी थे। उनके भाई वीरेंद्र अग्रवाल व भतीजे विकास अग्रवाल द्वारा नेत्रदान अभियान चलाया जा रहा है। विकास अग्रवाल अपनी माता सहित कई परिचितों की आंखें मृत्यु बाद दान करा चुके हैं। इससे प्रभावित होकर कोमल प्रसाद अग्रवाल ने अपने परिजनों ने मृत्यु बाद उनकी आंखें भी दान करने को कहा था। रविवार रात करीब सवा दस बजे कोमल प्रसाद अग्रवाल का निधन हो गया। उनके बेटे अनुज अग्रवाल, बेटी ममता अग्रवाल, अंजना अग्रवाल, मनीषा अग्रवाल व पुत्रवधू शिखा अग्रवाल ने विकास अग्रवाल से नेत्रदान कराने के लिए कहा। विकास अग्रवाल द्वारा सूचना दिए जाने पर रात साढ़े 12 बजे ही निर्मल आश्रम आई इंस्टीट्यूट ऋषिकेश के चिकित्सकों की टीम जाटान पहुंची और नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की। कोमल प्रसाद अग्रवाल के बेटे अनुज अग्रवाल का कहना है कि उनके पिता के जाने से परिवार को महान दुख हुआ है। उनके पिता ने ने नेत्रदान का जो निर्णय लिया था, परिवारवालों को उस पर हमेशा गर्व रहेगा।
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