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किसान नहीं बेच रहे गेहूं, अफसरों की सांसें फूलीं
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क्रय केंद्रों पर गेहूं लाने से कतरा रहे किसान
बाजार से कम दाम पर हो रही खरीद, एक माह में अभी तक 5100 मीट्रिक टन ही गेहूं की हो पाई है खरीद
बिजनौर। जिले में गेहूं क्रय केंद्रों पर किसान गेहूं बेचने नहीं आ रहे। इसे लेकर अफसरों की सांस फूली हुई है। जो किसान गेहूं लेकर आ रहे हैं, उनमें करनाल बंट का रोग मिलने पर किसानों का गेहूं वापस किया जा रहा है। गेहूं बेचने के लिए किसानों के इस बार रजिस्ट्रेशन कराए जा रहे हैं। रजिस्ट्रेशन की रसीद लेकर ही किसान गेहूं बेचने के लिए सेंटरों पर पहुंच रहे हैं। गेहूं की खरीदारी कछुआ गति से चल रही है। एक माह में अभी तक 5100 मीट्रिक टन ही गेहूं की खरीद हो पाई है।
जिले में एक अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू हुई है। यह खरीद 15 जून तक चलेगी। गेहूं की खरीद के लिए इस बार 57 की जगह 70 गेहूं खरीद केंद्र केंद्र बनाए गए हैं। नफर्ड एजेंसी के आठ व यूपीएसएस के आठ नए खरीद केंद्र बढ़े हैं। 43500 मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य है। 1840 रुपये क्विंटल सरकार गेहूं खरीद रही है। किसान गेहूं खरीद केंद्रों पर गेहूं लाने से कतरा रहे हैं। अफसर मान रहे हैं कि गन्ने की बुवाई में लगे किसान सेंटरों पर गेहूं बेचने नहीं आ रहे, पर ऐसा नहीं है। खुले बाजार में 2000 रुपये तक गेहूं बिक रहा है। किसान बाजार में गेहूं बेचना पसंद कर रहे हैं।
गेहूं भंडारण में दिक्कत
इस बार सरकारी सेंटरों पर खरीदा गए गेहूं के भंडारन में भारी दिक्कत आ रही है। खरीदा गया गेहूं हर साल सेंटर वेयर हाउस के गोदामों में रखा जाता था। इस बार सेंटर वेयर हाउस में कड़ी सुरक्षा में लोकसभा चुनाव की ईवीएम मशीन रखी हुई हैं। यह देख अफसरों ने पीली चौकी के पास एक प्राइवेट गोदाम को किराए पर लिया है। बिजनौर के आसपास का खरीदा गया गेहूं इस गोदाम में रखा जा रहा है। नूरपुर व जलीलपुर में खरीदा गया गेहूं गजरौला व नहटौर, स्योहारा, अफजलगढ़ से खरीदा गया गेहूं ठाकुरद्वारा के गोदाम में जा रहा है। जिला खाद व विपरण अधिकारी धनश्याम वर्मा के मुताबिक गेहूं की खरीद अभी तक धीमी हो रही है। गन्ने की फसल की बुवाई में लगे किसान अभी गेहूं बेचने नहीं आ रहे हैं। बुवाई के बाद गेहूं की खरीद बढ़ने की उम्मीद है।
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रजिस्ट्रेशन के बिना नहीं खरीदा जा रहा गेहूं
किसान इस बार सीधे सेंटर पर गेहूं बेचने नहीं जा सकता है। पहले किसान को अपना किसान सेवा केंद्र व साइबर कैफे पर अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा। रजिस्ट्रेशन की रसीद लेकर किसान गेहूं बेचने जाएगा। किसी सेंटर पर लंबी लाइन है तो किसान का रजिस्ट्रेशन की रसीद के हिसाब से कब गेहूं बेंचने आना है, इसका अलग से समय उसे मिलेगा।
काले दाने वाले गेहूं की नहीं हो रही खरीद
अफसरों के मुताबिक करनाल बंट रोग के चपेट में आने वाले गेहूं की सेंटरों पर खरीद नहीं हो रही है। ऐसे गेहूं को वापस भेजा जा रहा है। इस बार बड़ी तादाद में गेहूं में यह रोग लगा है। किसानों को भी हिदायत दी है कि ऐसा गेहूं बेचने के लिए सेंटरों पर नहीं लाया जाए। करनाल बंट बीमारी के चपेट में आने वाले गेहूं का दाना काला पड़ जाता है।
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बाजार से कम दाम पर हो रही खरीद, एक माह में अभी तक 5100 मीट्रिक टन ही गेहूं की हो पाई है खरीद
बिजनौर। जिले में गेहूं क्रय केंद्रों पर किसान गेहूं बेचने नहीं आ रहे। इसे लेकर अफसरों की सांस फूली हुई है। जो किसान गेहूं लेकर आ रहे हैं, उनमें करनाल बंट का रोग मिलने पर किसानों का गेहूं वापस किया जा रहा है। गेहूं बेचने के लिए किसानों के इस बार रजिस्ट्रेशन कराए जा रहे हैं। रजिस्ट्रेशन की रसीद लेकर ही किसान गेहूं बेचने के लिए सेंटरों पर पहुंच रहे हैं। गेहूं की खरीदारी कछुआ गति से चल रही है। एक माह में अभी तक 5100 मीट्रिक टन ही गेहूं की खरीद हो पाई है।
जिले में एक अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू हुई है। यह खरीद 15 जून तक चलेगी। गेहूं की खरीद के लिए इस बार 57 की जगह 70 गेहूं खरीद केंद्र केंद्र बनाए गए हैं। नफर्ड एजेंसी के आठ व यूपीएसएस के आठ नए खरीद केंद्र बढ़े हैं। 43500 मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य है। 1840 रुपये क्विंटल सरकार गेहूं खरीद रही है। किसान गेहूं खरीद केंद्रों पर गेहूं लाने से कतरा रहे हैं। अफसर मान रहे हैं कि गन्ने की बुवाई में लगे किसान सेंटरों पर गेहूं बेचने नहीं आ रहे, पर ऐसा नहीं है। खुले बाजार में 2000 रुपये तक गेहूं बिक रहा है। किसान बाजार में गेहूं बेचना पसंद कर रहे हैं।
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गेहूं भंडारण में दिक्कत
इस बार सरकारी सेंटरों पर खरीदा गए गेहूं के भंडारन में भारी दिक्कत आ रही है। खरीदा गया गेहूं हर साल सेंटर वेयर हाउस के गोदामों में रखा जाता था। इस बार सेंटर वेयर हाउस में कड़ी सुरक्षा में लोकसभा चुनाव की ईवीएम मशीन रखी हुई हैं। यह देख अफसरों ने पीली चौकी के पास एक प्राइवेट गोदाम को किराए पर लिया है। बिजनौर के आसपास का खरीदा गया गेहूं इस गोदाम में रखा जा रहा है। नूरपुर व जलीलपुर में खरीदा गया गेहूं गजरौला व नहटौर, स्योहारा, अफजलगढ़ से खरीदा गया गेहूं ठाकुरद्वारा के गोदाम में जा रहा है। जिला खाद व विपरण अधिकारी धनश्याम वर्मा के मुताबिक गेहूं की खरीद अभी तक धीमी हो रही है। गन्ने की फसल की बुवाई में लगे किसान अभी गेहूं बेचने नहीं आ रहे हैं। बुवाई के बाद गेहूं की खरीद बढ़ने की उम्मीद है।
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रजिस्ट्रेशन के बिना नहीं खरीदा जा रहा गेहूं
किसान इस बार सीधे सेंटर पर गेहूं बेचने नहीं जा सकता है। पहले किसान को अपना किसान सेवा केंद्र व साइबर कैफे पर अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा। रजिस्ट्रेशन की रसीद लेकर किसान गेहूं बेचने जाएगा। किसी सेंटर पर लंबी लाइन है तो किसान का रजिस्ट्रेशन की रसीद के हिसाब से कब गेहूं बेंचने आना है, इसका अलग से समय उसे मिलेगा।
काले दाने वाले गेहूं की नहीं हो रही खरीद
अफसरों के मुताबिक करनाल बंट रोग के चपेट में आने वाले गेहूं की सेंटरों पर खरीद नहीं हो रही है। ऐसे गेहूं को वापस भेजा जा रहा है। इस बार बड़ी तादाद में गेहूं में यह रोग लगा है। किसानों को भी हिदायत दी है कि ऐसा गेहूं बेचने के लिए सेंटरों पर नहीं लाया जाए। करनाल बंट बीमारी के चपेट में आने वाले गेहूं का दाना काला पड़ जाता है।