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प्रेम का प्रतीक है ताजपुर का चर्च
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प्रेम का प्रतीक है ताजपुर में बना चर्च
बिजनौर/राजा का ताजपुर। आगरा के ताजमहल की तरह जिले में भी प्रेम की निशानी मौजूद है। जिले में राजा का ताजपुर में स्थित चर्च प्रेम का प्रतीक है। यहां हर साल वेलेंटाइन डे पर लोग घूमने आते हैं। नवविवाहित जोडे़ और प्रेमी युगल अपनी रानियों के लिए चर्च बनवाने वाले राजाओं और उनकी रानियों की तरह अपनी प्रेम कहानी के भी कामयाब होने की ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।
अपनी बनावट और खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध ताजपुर के उत्तर दिशा में कड़ूला नदी किनारे लगभग 12 एकड़ भूमि पर बने चर्च का निर्माण साल 1913 में कराया गया था। ताजपुर रियासत के राजा श्याम रिख और शिवनाथ रिख ने ईसाई महिलाओं मारग्रेट और मेरी से विवाह किया था। विवाह के बाद भी दोनों महिलाओं का धर्म नहीं बदलवाया गया। दोनों की प्रार्थना के लिए राजाओं ने कडूला नदी किनारे शानदार चर्च बनवाया। चर्च का निर्माण चूना पत्थर और संगमरमर से कराया गया है।
चर्च के भीतर काफी सुंदर नक्काशी की गई है। यह चर्च अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है। राजा श्याम रिख और शिवनाथ सिंह रिख की ईसाई पत्नियां इसमें प्रार्थना किया करती थीं। बाद में चर्च को ईसाई मिशनरी को सौंप दिया गया। दोनों राजाओं और उनकी रानियों की मृत्यु के पश्चात चर्च में उनकी समाधि बनाई गई जो आज भी प्रेम के प्रतीक के रूप में जानी जाती हैं। मुगल बादशाह शाहजहां ने जिस प्रकार अपनी पत्नी मुमताज की याद में आगरा में ताजमहल बनवाया था, उसी तरह दोनों राजाओं ने अपनी रानियों के लिए चर्च बनवाया था। प्रतिवर्ष वेलेंटाइन डे पर यहां सैकड़ों लोग घूमने आते हैं और प्रार्थना करते हैं।
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बिजनौर/राजा का ताजपुर। आगरा के ताजमहल की तरह जिले में भी प्रेम की निशानी मौजूद है। जिले में राजा का ताजपुर में स्थित चर्च प्रेम का प्रतीक है। यहां हर साल वेलेंटाइन डे पर लोग घूमने आते हैं। नवविवाहित जोडे़ और प्रेमी युगल अपनी रानियों के लिए चर्च बनवाने वाले राजाओं और उनकी रानियों की तरह अपनी प्रेम कहानी के भी कामयाब होने की ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।
अपनी बनावट और खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध ताजपुर के उत्तर दिशा में कड़ूला नदी किनारे लगभग 12 एकड़ भूमि पर बने चर्च का निर्माण साल 1913 में कराया गया था। ताजपुर रियासत के राजा श्याम रिख और शिवनाथ रिख ने ईसाई महिलाओं मारग्रेट और मेरी से विवाह किया था। विवाह के बाद भी दोनों महिलाओं का धर्म नहीं बदलवाया गया। दोनों की प्रार्थना के लिए राजाओं ने कडूला नदी किनारे शानदार चर्च बनवाया। चर्च का निर्माण चूना पत्थर और संगमरमर से कराया गया है।
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चर्च के भीतर काफी सुंदर नक्काशी की गई है। यह चर्च अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है। राजा श्याम रिख और शिवनाथ सिंह रिख की ईसाई पत्नियां इसमें प्रार्थना किया करती थीं। बाद में चर्च को ईसाई मिशनरी को सौंप दिया गया। दोनों राजाओं और उनकी रानियों की मृत्यु के पश्चात चर्च में उनकी समाधि बनाई गई जो आज भी प्रेम के प्रतीक के रूप में जानी जाती हैं। मुगल बादशाह शाहजहां ने जिस प्रकार अपनी पत्नी मुमताज की याद में आगरा में ताजमहल बनवाया था, उसी तरह दोनों राजाओं ने अपनी रानियों के लिए चर्च बनवाया था। प्रतिवर्ष वेलेंटाइन डे पर यहां सैकड़ों लोग घूमने आते हैं और प्रार्थना करते हैं।
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