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स्वाइन फ्लू से लड़ने को स्वास्थ्य विभाग हुआ अलर्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Updated Tue, 20 Nov 2018 12:50 AM IST
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स्वाइन फ्लू से सावधान
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बिजनौर। सर्दी की दस्तक के साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने स्वाइन फ्लू से लड़ने के लिए कमर कस ली है। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव-गांव कैंप कर लोगों को जागरूक करने का काम करेंगी। इसके लिए सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एडवाइजरी जारी कर दी गई है। आशा कार्यकर्ता को इसके लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। बचाव के लिए मास्क खरीदे गए हैं। चिकित्सकों के अनुसार आमतौर पर यह सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार वाले मरीजों के संपर्क में आने से होता है।
स्वाइन फ्लू वायरस से होने वाला रोग है। आमतौर पर यह सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार वाले मरीजों के संपर्क में आने से होता है। इसके वायरस हवा के माध्यम से श्वसन तंत्र के जरिये शरीर में प्रवेश करते हैं। इसलिए बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग जरूर करें। जिला अस्पताल के फिजीशियन राधेश्याम वर्मा ने बताया कि स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य होते हैं और मरीज समझता है कि उसे सर्दी जुकाम हो गया है। ध्यान देने की बात यह है कि स्वाइन फ्लू वायरस सर्दी के मौसम में ही फैलता है। मरीज कई बार घर पर ही दवा लेकर इलाज करता है, लेकिन यह स्वयं के लिए घातक हो सकता है। स्वाइन फ्लू शुरुआती दौर में नियंत्रित कर लेना ही मरीज के लिए बेहतर रहता है। बीमारी की स्थिति बढ़ जाए तो पीड़ितों को टैमी फ्लू टैबलेट दी जाती है। शुरुआती लक्षणों के अनुसार यदि बीमारी का पता चल जाए तो मरीज को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं है। यदि कभी ऐसी नौबत आती है तो ऐसे मरीजों के लिए उपचार के लिए अलग कमरों का प्रबंध है, जिससे अन्य मरीज इस वायरस की चपेट में न आएं। इससे बचाव के लिए सबसे बेहतर एन-95 मास्क होता है। यह बाजार में उपलब्ध नहीं होने के कारण थ्री लेयर के साधारण मास्क का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। अक्सर देखा जाता है कि बाहरी राज्यों से ही इस बीमारी के मामले आते हैं। इन्हें रोकने के लिए जागरूक होना जरूरी है। जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए 10 आइसोलेशन वार्ड तैयार हैं। स्वाइन फ्लू निपटने के लिए समुचित निर्देश दिए गए हैं।
लक्षण
बुखार, नाक बहना, खांसी, गले में खराश, सिर में दर्द, बदन दर्द, ठंड लगना, आंखों में लालिमा आदि हैं।
रोकथाम व बचाव के उपाय
खांसते व छींकते समय रुमाल का प्रयोग करना चाहिए। रुमाल अथवा कपड़ा नहीं होने पर हाथ से ही मुंह और नाक को इस प्रकार से ढकें कि दूसरे के ऊपर वायरस न गिरे। जिससे इंफेक्शन न फैले।
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रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) करेगी जागरूक
जिला संक्रामक रोग अधिकारी बृजभूषण के अनुसार जिले में अभी तक स्वाइन फ्लू का मामला प्रकाश में नहीं आया है। जिले में वर्ष 2016 में चार केस पॉजिटिव मिले थे। इसके बाद 2017 और नवंबर 2018 तक भी कोई केस नहीं है।
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स्वाइन फ्लू वायरस से होने वाला रोग है। आमतौर पर यह सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार वाले मरीजों के संपर्क में आने से होता है। इसके वायरस हवा के माध्यम से श्वसन तंत्र के जरिये शरीर में प्रवेश करते हैं। इसलिए बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग जरूर करें। जिला अस्पताल के फिजीशियन राधेश्याम वर्मा ने बताया कि स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य होते हैं और मरीज समझता है कि उसे सर्दी जुकाम हो गया है। ध्यान देने की बात यह है कि स्वाइन फ्लू वायरस सर्दी के मौसम में ही फैलता है। मरीज कई बार घर पर ही दवा लेकर इलाज करता है, लेकिन यह स्वयं के लिए घातक हो सकता है। स्वाइन फ्लू शुरुआती दौर में नियंत्रित कर लेना ही मरीज के लिए बेहतर रहता है। बीमारी की स्थिति बढ़ जाए तो पीड़ितों को टैमी फ्लू टैबलेट दी जाती है। शुरुआती लक्षणों के अनुसार यदि बीमारी का पता चल जाए तो मरीज को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं है। यदि कभी ऐसी नौबत आती है तो ऐसे मरीजों के लिए उपचार के लिए अलग कमरों का प्रबंध है, जिससे अन्य मरीज इस वायरस की चपेट में न आएं। इससे बचाव के लिए सबसे बेहतर एन-95 मास्क होता है। यह बाजार में उपलब्ध नहीं होने के कारण थ्री लेयर के साधारण मास्क का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। अक्सर देखा जाता है कि बाहरी राज्यों से ही इस बीमारी के मामले आते हैं। इन्हें रोकने के लिए जागरूक होना जरूरी है। जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए 10 आइसोलेशन वार्ड तैयार हैं। स्वाइन फ्लू निपटने के लिए समुचित निर्देश दिए गए हैं।
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लक्षण
बुखार, नाक बहना, खांसी, गले में खराश, सिर में दर्द, बदन दर्द, ठंड लगना, आंखों में लालिमा आदि हैं।
रोकथाम व बचाव के उपाय
खांसते व छींकते समय रुमाल का प्रयोग करना चाहिए। रुमाल अथवा कपड़ा नहीं होने पर हाथ से ही मुंह और नाक को इस प्रकार से ढकें कि दूसरे के ऊपर वायरस न गिरे। जिससे इंफेक्शन न फैले।
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रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) करेगी जागरूक
जिला संक्रामक रोग अधिकारी बृजभूषण के अनुसार जिले में अभी तक स्वाइन फ्लू का मामला प्रकाश में नहीं आया है। जिले में वर्ष 2016 में चार केस पॉजिटिव मिले थे। इसके बाद 2017 और नवंबर 2018 तक भी कोई केस नहीं है।