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बाजार में बिकने लगे पॉलीथिन और थर्माकोल के मंहगे विकल्प .
Updated Tue, 17 Jul 2018 01:01 AM IST
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अमरोहा। पर्यावरण की सेहत के लिहाज से पॉलिथिन और थर्माकोल से बने डिस्पोजल को प्रतिबंध कर दिया गया है। प्रतिबंध के दूसरे दिन शहर के प्रमुख बाजारों में पॉलिथिन के विकल्प के रूप में कागज, पत्ते, पेपर और लकड़ी से बने आइटम दुकानों में दिखायी देने लगे हैं। इस दौरान डिस्पोजल आइटम खरीदने के लिए ग्राहक पहुंचे तो जरूर लेकिन इनके रेट सुनकर लोगों ने जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी की।
बाजार में पहले से मौजूद थे पॉलिथिन और थर्मोकोल के विकल्प
अमरोहा। होल सेलर हरिओम ने बताया कि पॉलिथिन और थर्मोकोल के विकल्प के रूप में दुकानों में कागज, पेपर, पत्ते, गत्ते और लकड़ी से बने डिस्पोजल पहले से मौजूद थे। लेकिन मंहगा होने की वजह से ग्राहक इनसे दूरी बनाए रहे। यही वजह रही कि ये डिस्पोजल दस से ज्यादा समय से बिके ही नहीं। लोगों में जागरूकत की कमी और सस्ते के लालच की वजह से इन्हें नजरअंदाज किया जाता रहा। अब पॉलिथिन की जगह कपड़े के थैले ने बाजार में जगह ले ली है। उम्मीद है बहुत जल्द कपड़े से बना यह थैला बाजार में अपनी पकड़ बना लेगा। दूसरी ओर थर्माकोल की जगह कागज, पेपर, पत्ते, गत्ते और लकड़ी से बने डिस्पोजल ने ली है। इनसे बने गिलास, दोना, प्लेट और चम्मच से शहर की दुकानें गुलजार होने लगी हैं।
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बाजार में पहले से मौजूद थे पॉलिथिन और थर्मोकोल के विकल्प
अमरोहा। होल सेलर हरिओम ने बताया कि पॉलिथिन और थर्मोकोल के विकल्प के रूप में दुकानों में कागज, पेपर, पत्ते, गत्ते और लकड़ी से बने डिस्पोजल पहले से मौजूद थे। लेकिन मंहगा होने की वजह से ग्राहक इनसे दूरी बनाए रहे। यही वजह रही कि ये डिस्पोजल दस से ज्यादा समय से बिके ही नहीं। लोगों में जागरूकत की कमी और सस्ते के लालच की वजह से इन्हें नजरअंदाज किया जाता रहा। अब पॉलिथिन की जगह कपड़े के थैले ने बाजार में जगह ले ली है। उम्मीद है बहुत जल्द कपड़े से बना यह थैला बाजार में अपनी पकड़ बना लेगा। दूसरी ओर थर्माकोल की जगह कागज, पेपर, पत्ते, गत्ते और लकड़ी से बने डिस्पोजल ने ली है। इनसे बने गिलास, दोना, प्लेट और चम्मच से शहर की दुकानें गुलजार होने लगी हैं।
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