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भूजल संरक्षण को दी गई जानकारी
Updated Sun, 23 Jul 2017 12:43 AM IST
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रेनवाटर हार्वेस्टिंग की दी जानकारी
बिजनौर।
लघु सिंचाई एवं भूगर्भ जल विभाग के सहयोग से चलाए गए भूजल संरक्षण सप्ताह में हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने रेनवाटर हार्वेस्टिंग पद्धति की जानकारी दी।
शनिवार को विकास भवन के सभागार में परियोजना निदेशक डीआरडीए वीपी श्रीवास्तव की अध्यक्षता में भूजल को संरक्षित करने के लिए गोष्ठी हुई। आयोजित की गई। उन्होंने जल की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि जल के अतिदोहन पर गंभीर परिणाम आएंगे। इसके लिए गंभीर होने की आवश्यकता है। डॉ. योगेंद्र पंवार ने कहा कि पानी की गंभीर समस्या बन सकती है। जिस तरह से पानी का दोहन हो रहा है, उस पर अंकुश लगाने की जरूरत है। उन्होंने पानी के दोहन को रोकने के लिए सिंचाई के तरीके को बदलने की वकालत की। भूमि संरक्षण अधिकारी वर्ष के जल को संरक्षित करने पर जोर दिया। उन्होंने रेनवाटर हार्वेंस्टिंग पद्धति से जल संरक्षित करने को कहा।
अन्य वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान में जल संरक्षण की जरूरत है। जल को अमूल्य बताते हुए इसे सहेजना हर मनुष्य का दायित्व बनाने पर बल दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि शहरों में सबसे ज्यादा पानी बरबाद हो रहा है। इस पर अंकुश लगाने की जारूरत है। इस मौके पर सिंचाई विभाग के सतेंद्र पाल सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. भूपेंद्र सिंह, सुशील कुमार, जयपाल सिंह, नरेंद्र कुमार, परवेंद्र सिंह, भगवानदास, ओमपाल सिंह, अशोक कुमार आदि ने विचार रखे। संचालन अवर अभियंता चंद्रशेखर ने किया।
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बिजनौर।
लघु सिंचाई एवं भूगर्भ जल विभाग के सहयोग से चलाए गए भूजल संरक्षण सप्ताह में हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने रेनवाटर हार्वेस्टिंग पद्धति की जानकारी दी।
शनिवार को विकास भवन के सभागार में परियोजना निदेशक डीआरडीए वीपी श्रीवास्तव की अध्यक्षता में भूजल को संरक्षित करने के लिए गोष्ठी हुई। आयोजित की गई। उन्होंने जल की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि जल के अतिदोहन पर गंभीर परिणाम आएंगे। इसके लिए गंभीर होने की आवश्यकता है। डॉ. योगेंद्र पंवार ने कहा कि पानी की गंभीर समस्या बन सकती है। जिस तरह से पानी का दोहन हो रहा है, उस पर अंकुश लगाने की जरूरत है। उन्होंने पानी के दोहन को रोकने के लिए सिंचाई के तरीके को बदलने की वकालत की। भूमि संरक्षण अधिकारी वर्ष के जल को संरक्षित करने पर जोर दिया। उन्होंने रेनवाटर हार्वेंस्टिंग पद्धति से जल संरक्षित करने को कहा।
अन्य वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान में जल संरक्षण की जरूरत है। जल को अमूल्य बताते हुए इसे सहेजना हर मनुष्य का दायित्व बनाने पर बल दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि शहरों में सबसे ज्यादा पानी बरबाद हो रहा है। इस पर अंकुश लगाने की जारूरत है। इस मौके पर सिंचाई विभाग के सतेंद्र पाल सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. भूपेंद्र सिंह, सुशील कुमार, जयपाल सिंह, नरेंद्र कुमार, परवेंद्र सिंह, भगवानदास, ओमपाल सिंह, अशोक कुमार आदि ने विचार रखे। संचालन अवर अभियंता चंद्रशेखर ने किया।
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