{"_id":"5ae4bfcf4f1c1b65098b6ccc","slug":"121524940751-bijnor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अंधेरे का दंश होगा खत्म","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अंधेरे का दंश होगा खत्म
Updated Sun, 29 Apr 2018 12:09 AM IST
विज्ञापन
बिजनौर। जिले के 376 मजरों से अंधेरे के दंश को खत्म किया जाएगा। यहां बसे हजारों परिवारों को अभियान चलाकर कनेक्शन दिए जाएंगे। जो जिस योजना का पात्र होगा, उसी के अनुसार कनेक्शन दिए जाएंगे। विद्युत निगम बहुत जल्दी ये अभियान शुरू करने वाला है।
गांवों में जगह की कमी, पारिवारिक कलह आदि से कुछ परिवार गांव से अलग अपने खेतों में बस जाते हैं। शुरूआत में एक दो की संख्या में बसे परिवारों की संख्या बाद में बढ़ती जाती है। यह एक छोटे गांव या बस्ती के रूप में बस जाते हैं। तहसील की भाषा में इसे उस गांव का मजरा यानी क्षेत्र मान लिया जाता है। गांवों में तो बिजली के कनेक्शन होते हैं, लेकिन इन मजरों में बिजली कनेक्शन नहीं होते हैं। सालों से इन मजरों में बसे गांव वाले बिजली कनेक्शन के लिए निगम के अधिकारियों के चक्कर काट रहे थे। कभी लंबी लाइन तो कभी बजट का अभाव बताकर इन गांव वालों को टरका दिया जाता था। मगर, अब शासन इन मजरों को भी रोशन करने जा रहा है। निगम की टीम ने सर्वे किया तो जिले में ऐसे 376 मजरे मिले हैं जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंची है। घरों को बिजली के उजियारे से रोशन करना इनके लिए अब भी एक सपना बना हुआ है। जल्दी ही अभियान चलाकर इन मजरों में बिजली कनेक्शन दिए जाएंगे और अंधेरे का दंश मिटाया जाएगा।
इन मजरों में सौभाग्य योजना के अंतर्गत एससीएसटी वर्ग एवं सरकारी योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना, विधवा पेंशन आदि का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं को नि:शुल्क बिजली कनेक्शन दिए जाएंगे। बाकी वर्ग के उपभोक्ताओं को 500 रुपये का शुल्क लिया जाएगा। यह शुल्क किश्तों में भी अदा किया जा सकता है। अधीक्षण अभियंता एसपी सिंह के अनुसार जिले के 376 मजरे विद्युतीकरण के लिए चयनित किए गए हैं। जल्दी ही इनमे विद्युतीकरण अभियान शुरू किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
गांवों में जगह की कमी, पारिवारिक कलह आदि से कुछ परिवार गांव से अलग अपने खेतों में बस जाते हैं। शुरूआत में एक दो की संख्या में बसे परिवारों की संख्या बाद में बढ़ती जाती है। यह एक छोटे गांव या बस्ती के रूप में बस जाते हैं। तहसील की भाषा में इसे उस गांव का मजरा यानी क्षेत्र मान लिया जाता है। गांवों में तो बिजली के कनेक्शन होते हैं, लेकिन इन मजरों में बिजली कनेक्शन नहीं होते हैं। सालों से इन मजरों में बसे गांव वाले बिजली कनेक्शन के लिए निगम के अधिकारियों के चक्कर काट रहे थे। कभी लंबी लाइन तो कभी बजट का अभाव बताकर इन गांव वालों को टरका दिया जाता था। मगर, अब शासन इन मजरों को भी रोशन करने जा रहा है। निगम की टीम ने सर्वे किया तो जिले में ऐसे 376 मजरे मिले हैं जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंची है। घरों को बिजली के उजियारे से रोशन करना इनके लिए अब भी एक सपना बना हुआ है। जल्दी ही अभियान चलाकर इन मजरों में बिजली कनेक्शन दिए जाएंगे और अंधेरे का दंश मिटाया जाएगा।
विज्ञापन
इन मजरों में सौभाग्य योजना के अंतर्गत एससीएसटी वर्ग एवं सरकारी योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना, विधवा पेंशन आदि का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं को नि:शुल्क बिजली कनेक्शन दिए जाएंगे। बाकी वर्ग के उपभोक्ताओं को 500 रुपये का शुल्क लिया जाएगा। यह शुल्क किश्तों में भी अदा किया जा सकता है। अधीक्षण अभियंता एसपी सिंह के अनुसार जिले के 376 मजरे विद्युतीकरण के लिए चयनित किए गए हैं। जल्दी ही इनमे विद्युतीकरण अभियान शुरू किया जाएगा।
विज्ञापन