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हेलमेट नहीं लगाना बन गई आदत
Updated Thu, 26 Apr 2018 12:16 AM IST
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बिजनौर। बिना हेलमेट यात्रा करना लोगों की आदत में शुमार हो गया है। जिलेभर में अधिकतर लोग दुपहिया वाहनों पर बिना हेलमेट के ही फर्राटा भरते हैं। यात्रा के दौरान हेलमेट न पहनने वालों में युवाओं की संख्या सर्वाधिक होती है। साथ ही पुलिसकर्मी और व्यस्क नागरिक भी ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाने में पीछे नहीं हैं।
भारत सरकार के निर्देशानुसार देशभर में लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए 23 से 30 अप्रैल तक सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जाता है। शासन-प्रशासन की मंशा है कि जानकारी के अभाव में हादसे न हों और लोग अपने परिवार के साथ सुख-शांति से जीवन यापन कर सकें। पुलिस प्रशासन एवं सामाजिक संस्थाएं समय-समय पर बाइक सवारों को हेलमेट के पहनने के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाते रहते हैं, लेकिन बाइक सवारों पर इसका कोई असर दिखाई नहीं देता है। इन बाइक सवारों के परिजन भी सचेत नहीं रहते हैं। इसी कारण से दोपहिया वाहन चालकों की जान चली जाती है। जिलेभर में प्रतिदिन हजारों की संख्या लोग बिना हेलमेट के यात्रा करते हैं। सामान्य लोग तो ऐसा करते ही हैं। गौर करने वाली बात ये है कि दरोगा एवं सिपाही भी बिना हेलमेट के ही फर्राटा भरते दिखाई देते हैं।
जिला मुख्यालय पर भी स्टंट दिखाते हैं युवा
जिले के अन्य स्थानों की तो बात ही छोड़ दीजिए। युवा जिला मुख्यालय पर भी बाइक और स्कूटी आदि दुपहिया वाहनों पर सवार होकर स्टंट करते नजर आते रहते हैं। ये हेलमेट के बिना तो होते ही हैं साथ ही खतरनाक कट मारते रहते हैं।
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बीवी को थमा देते हैं हेलमेट
अकसर होता यह है कि अधिकांश लोग या तो हेलमेट लेकर ही नहीं चलते हैं और अगर हेलमेट ले भी लिया तो पीछे बैठे व्यक्ति को दोपहिया वाहन चालक हेलमेट थमाकर बेफिक्र होकर बाइक या अन्य दुपहिया वाहन चलाते हैं। ऐसा कर लोग अपने साथ-साथ औरों के जीवन से भी खिलवाड़ करते हैं।
गांवों के लोग भी उड़ाते हैं यातायात नियमों की धज्जियां
यातायात नियमों का उल्लंघन करने में ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी पीछे नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले लोग भी अपने बच्चों को हेलमेट लगाने के लिए प्रेरित नहीं करते। इससे आये दिन हादसे होते रहते हैं।
कानून के रखवाले भी उड़ाते हैं ट्रैफिक नियमों का मखौल
लोगों को ट्रैफिक नियमों का पालने करने का पाठ पढ़ाने वाले पुलिसकर्मी भी नियमों की धज्जियां उड़ाने में पीछे नहीं हैं। यही कारण है कि लोग नियमों की अनदेखी कर बिना हेलमेट के चलते हैं।
सभी को स्वयं लेनी होगी शपथ
आये दिन हो रहे सड़क हादसों को रोकने के लिए हम सभी को स्वयं ही अपना दायित्व समझकर यातायात के नियमों का पालन करने की शपथ लेनी होगी। जब तक लोग इसे अपनी जिम्मेदारी समझकर काम नहीं करेंगे तो हादसे रुक पाना ही संभव नहीं होगा।
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भारत सरकार के निर्देशानुसार देशभर में लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए 23 से 30 अप्रैल तक सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जाता है। शासन-प्रशासन की मंशा है कि जानकारी के अभाव में हादसे न हों और लोग अपने परिवार के साथ सुख-शांति से जीवन यापन कर सकें। पुलिस प्रशासन एवं सामाजिक संस्थाएं समय-समय पर बाइक सवारों को हेलमेट के पहनने के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाते रहते हैं, लेकिन बाइक सवारों पर इसका कोई असर दिखाई नहीं देता है। इन बाइक सवारों के परिजन भी सचेत नहीं रहते हैं। इसी कारण से दोपहिया वाहन चालकों की जान चली जाती है। जिलेभर में प्रतिदिन हजारों की संख्या लोग बिना हेलमेट के यात्रा करते हैं। सामान्य लोग तो ऐसा करते ही हैं। गौर करने वाली बात ये है कि दरोगा एवं सिपाही भी बिना हेलमेट के ही फर्राटा भरते दिखाई देते हैं।
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जिला मुख्यालय पर भी स्टंट दिखाते हैं युवा
जिले के अन्य स्थानों की तो बात ही छोड़ दीजिए। युवा जिला मुख्यालय पर भी बाइक और स्कूटी आदि दुपहिया वाहनों पर सवार होकर स्टंट करते नजर आते रहते हैं। ये हेलमेट के बिना तो होते ही हैं साथ ही खतरनाक कट मारते रहते हैं।
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बीवी को थमा देते हैं हेलमेट
अकसर होता यह है कि अधिकांश लोग या तो हेलमेट लेकर ही नहीं चलते हैं और अगर हेलमेट ले भी लिया तो पीछे बैठे व्यक्ति को दोपहिया वाहन चालक हेलमेट थमाकर बेफिक्र होकर बाइक या अन्य दुपहिया वाहन चलाते हैं। ऐसा कर लोग अपने साथ-साथ औरों के जीवन से भी खिलवाड़ करते हैं।
गांवों के लोग भी उड़ाते हैं यातायात नियमों की धज्जियां
यातायात नियमों का उल्लंघन करने में ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी पीछे नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले लोग भी अपने बच्चों को हेलमेट लगाने के लिए प्रेरित नहीं करते। इससे आये दिन हादसे होते रहते हैं।
कानून के रखवाले भी उड़ाते हैं ट्रैफिक नियमों का मखौल
लोगों को ट्रैफिक नियमों का पालने करने का पाठ पढ़ाने वाले पुलिसकर्मी भी नियमों की धज्जियां उड़ाने में पीछे नहीं हैं। यही कारण है कि लोग नियमों की अनदेखी कर बिना हेलमेट के चलते हैं।
सभी को स्वयं लेनी होगी शपथ
आये दिन हो रहे सड़क हादसों को रोकने के लिए हम सभी को स्वयं ही अपना दायित्व समझकर यातायात के नियमों का पालन करने की शपथ लेनी होगी। जब तक लोग इसे अपनी जिम्मेदारी समझकर काम नहीं करेंगे तो हादसे रुक पाना ही संभव नहीं होगा।