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रामगंगा नदी ने किसानों की दो सौ बीघा भूमि में कटान किया
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रामगंगा नदी ने दो सौ बीघा भूमि में किया कटान
हरेवली। सिंचाई विभाग की घोर लापरवाही के चलते रामनगर गोसांई के किसानों की 200 बीघा लगानी भूमि को रामगंगा नदी ने काटकर अपनी चपेट में ले लिया। किसानों का आरोप है कि विभाग से कई बार शिकायत की लेकिन इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। किसानों को चिंता सता रही है कि अगर इसी तरह से गंगा नदी भूमि का कटान करती रही तो एक दिन वो भूमिहीन हो जाएंगे।
हरेवली क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ से गंगा नदी ने किसानों की लगानी भूमि को अपनी चपेट में ले लिया। विभाग के अधिकारियों की घोर लापरवाही के चलते रामगंगा नदी में किसानों की 200 बीघा भूमि को अपनी चपेट में ले रखा है। किसान प्रतिवर्ष कटान रोकने के लिए शासन व सिचांई विभाग से गुहार लगाते चले आ रहे हैं। लेकिन की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया। किसान जगराज सिंह, बलराज सिंह, सुखराज सिंह, गुरजीत सिंह, रतन सिंह, लखबीर सिंह, संदीप सिंह, सुखजीत सिंह, नरेंद्र आदि किसानों का कहना है कि रामगंगा नदी भूमि से लगभग आधा किलोमीटर दूरी थी। बाढ़ के दौरान अधिक पानी आने से गंगा का दायरा बढ़ा गया। नदी जहां पहले बहती थी। वहां रेत डाल दिया। वह क्षेत्र तो ऊंचा हो गया। जबकि किसानों लगभग 200 बीघा भूमि को चपेट में ले लिया है। कटान को देखते हो बलराज सिंह एवं सुखराज सिंह यहां से पलायन कर गए हैं। अगर विभाग ने इस पर अंकुश लगाने के प्रबंध नहीं किए तो अन्य किसान भी पलायन करने को मजबूर होंगे। उधर सिंचाई विभाग के एसडीओ सतीश कुमार का कहना है कि मामला संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा है तो उच्च अधिकारियों को अवगत कराकर किसानों की समस्या का समाधान कराया जाएगा।
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हरेवली। सिंचाई विभाग की घोर लापरवाही के चलते रामनगर गोसांई के किसानों की 200 बीघा लगानी भूमि को रामगंगा नदी ने काटकर अपनी चपेट में ले लिया। किसानों का आरोप है कि विभाग से कई बार शिकायत की लेकिन इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। किसानों को चिंता सता रही है कि अगर इसी तरह से गंगा नदी भूमि का कटान करती रही तो एक दिन वो भूमिहीन हो जाएंगे।
हरेवली क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ से गंगा नदी ने किसानों की लगानी भूमि को अपनी चपेट में ले लिया। विभाग के अधिकारियों की घोर लापरवाही के चलते रामगंगा नदी में किसानों की 200 बीघा भूमि को अपनी चपेट में ले रखा है। किसान प्रतिवर्ष कटान रोकने के लिए शासन व सिचांई विभाग से गुहार लगाते चले आ रहे हैं। लेकिन की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया। किसान जगराज सिंह, बलराज सिंह, सुखराज सिंह, गुरजीत सिंह, रतन सिंह, लखबीर सिंह, संदीप सिंह, सुखजीत सिंह, नरेंद्र आदि किसानों का कहना है कि रामगंगा नदी भूमि से लगभग आधा किलोमीटर दूरी थी। बाढ़ के दौरान अधिक पानी आने से गंगा का दायरा बढ़ा गया। नदी जहां पहले बहती थी। वहां रेत डाल दिया। वह क्षेत्र तो ऊंचा हो गया। जबकि किसानों लगभग 200 बीघा भूमि को चपेट में ले लिया है। कटान को देखते हो बलराज सिंह एवं सुखराज सिंह यहां से पलायन कर गए हैं। अगर विभाग ने इस पर अंकुश लगाने के प्रबंध नहीं किए तो अन्य किसान भी पलायन करने को मजबूर होंगे। उधर सिंचाई विभाग के एसडीओ सतीश कुमार का कहना है कि मामला संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा है तो उच्च अधिकारियों को अवगत कराकर किसानों की समस्या का समाधान कराया जाएगा।
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