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शहर में तीसरी मोहर्रम पर निकला जुलूस, गूंजा या हुसैन या हुसैन
Updated Sat, 15 Sep 2018 12:36 AM IST
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अमरोहा। अंजुमन तहफ्फुजे अजादारी के तत्वाधान में तीसरी मुहर्रम पर निकालने वाला पहला मातमी जुलूस मोहल्ला पचदरा स्थित इमामबाड़ा वलिया से बरामद हुआ। जुलूस में बच्चे ऊंट पर बैठक सवारी कर रहे थे। जबिक अजादार दुलदुल के साथ मातम करते हुए जार-जार रोए। अजादारों की सुरक्षा को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बंदोबस्त रहे।
शुक्रवार को जुलूस अपने पूर्व रीति रिवाज के अनुसार निकाला गया। मरसिया घर से जब बहरे सफर सैय्यद आलम निकले हर इमामबाड़े में पढ़ा गया। जुलूस के आगे चलने वाले ऊंट पर काला अलम लगा है। सभी ऊंटों पर काली चादर पड़ी हुई थी। छोटे-छोटे बच्चे ऊंटों के आगे चल रहे थे। इसके पीछे कहार आराईश उठाकर चल रहे थे। इसमें अगली रोशन चैकी में नौबत बजर हुई। ताबूत को अजादाराने हुसैनी अपने कंधों पर उठाकर चल रहे थे। जिस पर लाल रंग इमाम हुसैन के खून को दर्शाता है। इसके पीछे जुलजनाह चल रहा था। जिस पर लगभग 10 किलो सोने चांदी के जेवर लगे हुए थे। अजादार इमाम हुसैन की ज्यारत कर रहे थे। इसके पीछे तमाम अजादार नौहा पढ़ते हुए नंगे पैर चल रहे थे। शहीदे करबला हुसैन, अमीरे करबला हुसैन, इस नौहे के जवाब अजादार हुसैन-हुसैन कहकर मातम किया। जुलूस मोहल्ला पचदरा से काजी जादा, सद्दो, नक्शबी, दरबारे मीरा खां, चाहगौरी, मजापोता, कोट, दानिशमंदान, बगला, शफात पोता, कटरा, गुजरी, मच्छरट्टा, मंडी चैब, दरबारे कलां, अहमद नगर, कटकुई, काली पगड़ी, घेर करम अली, लकड़ा, सट्टी, हक्कानी, जाफरी, काजी गली होता हुआ पचदरा पर वापस आकर समाप्त हुआ। जुलूस का संचालन अंजुमने रजाकाराने हुसैनी ने किया। इस दौरान अंजुमन के सदर हसन शुजा नकवी, लियाकत अली, जिया एजाज नकवी, डॉ. सईदुल हसन, यूसुफ नकवी आदि मौजूद रहे।
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शुक्रवार को जुलूस अपने पूर्व रीति रिवाज के अनुसार निकाला गया। मरसिया घर से जब बहरे सफर सैय्यद आलम निकले हर इमामबाड़े में पढ़ा गया। जुलूस के आगे चलने वाले ऊंट पर काला अलम लगा है। सभी ऊंटों पर काली चादर पड़ी हुई थी। छोटे-छोटे बच्चे ऊंटों के आगे चल रहे थे। इसके पीछे कहार आराईश उठाकर चल रहे थे। इसमें अगली रोशन चैकी में नौबत बजर हुई। ताबूत को अजादाराने हुसैनी अपने कंधों पर उठाकर चल रहे थे। जिस पर लाल रंग इमाम हुसैन के खून को दर्शाता है। इसके पीछे जुलजनाह चल रहा था। जिस पर लगभग 10 किलो सोने चांदी के जेवर लगे हुए थे। अजादार इमाम हुसैन की ज्यारत कर रहे थे। इसके पीछे तमाम अजादार नौहा पढ़ते हुए नंगे पैर चल रहे थे। शहीदे करबला हुसैन, अमीरे करबला हुसैन, इस नौहे के जवाब अजादार हुसैन-हुसैन कहकर मातम किया। जुलूस मोहल्ला पचदरा से काजी जादा, सद्दो, नक्शबी, दरबारे मीरा खां, चाहगौरी, मजापोता, कोट, दानिशमंदान, बगला, शफात पोता, कटरा, गुजरी, मच्छरट्टा, मंडी चैब, दरबारे कलां, अहमद नगर, कटकुई, काली पगड़ी, घेर करम अली, लकड़ा, सट्टी, हक्कानी, जाफरी, काजी गली होता हुआ पचदरा पर वापस आकर समाप्त हुआ। जुलूस का संचालन अंजुमने रजाकाराने हुसैनी ने किया। इस दौरान अंजुमन के सदर हसन शुजा नकवी, लियाकत अली, जिया एजाज नकवी, डॉ. सईदुल हसन, यूसुफ नकवी आदि मौजूद रहे।
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