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स्वच्छ भारत मिशन मेरठ के एंबेस्डर से अमर उजाला की मुलाकात

Sat, 17 Feb 2018 12:17 AM IST
Updated Sat, 17 Feb 2018 12:17 AM IST
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स्वच्छ भारत मिशन मेरठ के एंबेस्डर से अमर उजाला की मुलाकात
नजीबाबाद।
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1971 में पाकिस्तान से जंग में बंदूक थामने वाले ईश्वरचंद गंभीर ने सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन के लिए जंग छेड़ रखी है। उनकी सेवाओं से प्रभावित होकर मेरठ प्रशासन ने उन्हें स्वच्छ भारत मिशन मेरठ का एंबेसडर नियुक्त किया है।
मेरठ निवासी पूर्व सैनिक, कवि एवं साहित्यकार डॉ. ईश्वरचंद गंभीर से अमर उजाला ने बातचीत की, तो उन्होंने सामाजिक कुरीतियों को राष्ट्र के विकास में बाधक बताया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय मूलचंद शास्त्री के पुत्र डॉ. ईश्वरचंद गंभीर की पुस्तक बेटी से कल का भारत है... का हाल ही में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने विमोचन किया। पेशे से होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. ईश्वरचंद बेटी के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रेरित करते हुए काव्य शैली में कहते हैं- शायद गुनाह अपना उसे याद नहीं है, इस पाप की ऊपर कहीं फरियाद नहीं है, जब से कराया कत्ल वो कन्या का गर्भ में, उस घर में आज तक कोई औलाद नहीं है...।
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फल-फूल प्राण वायु दें इनको लगाइए, इनसे दवाई और घनी छांव पाइए, मरकर भी ये जलाते हैं चूल्हा गरीब का, पेड़ों सा मित्र दूसरा कोई बताइए...। ईश्वरचंद गंभीर की पर्यावरण संरक्षण और मानव कल्याण की सोच से प्रभावित होकर मेरठ के जिला प्रशासन ने उन्हें स्वच्छ भारत मिशन का मेरठ एंबेसडर नियुक्त किया। युवा वर्ग के पथभ्रमित होने से आहत डॉ. गंभीर कहते हैं वे जीवन पर्यंत अपनी लेखनी से युवाओं का मार्गदर्शन करते रहेंगे। युवाओं के लिए वे कहते हैं- चरण माता-पिता के और गुरुओं के छूते थे, आचरण शुद्ध अनुशासन बहुत था ज्ञान लेते थे, बड़े ही संस्कारी थे हमारे दौर के बच्चे, बड़ों को आते देख सिरहाना छोड़ देते थे।
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सीबीएसई की पुस्तकों में शामिल हैं रचनाएं
नजीबाबाद। रोमियो एन बुलेट फिल्म में चार गीत लिखने वाले डॉ. ईश्वरचंद द्वारा मां, ग्रामीण परिवेश और हिंदी भाषा पर लिखीं रचनाएं सीबीएसई स्कूलों में कक्षा छह से आठ तक पढ़ाई जा रही पुस्तक अरुणिमा में शामिल हैं। साहित्यिक सेवाओं के लिए डॉ. ईश्वरचंद गंभीर को दुबई में स्वर्गीय जगदेव शांत साहित्य सम्मान और विश्व हिंदी संस्थान कनाडा द्वारा हिंदी गौरव सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।
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