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वन अधिनियमों की सख्मी से कालागढ़ के प्राचीन मंदिर अब श्रद्वालुओं की पहुंच से हुए दूर
Updated Tue, 07 Nov 2017 11:59 PM IST
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आस्था पर वन अधिनियमों की चोट
कालागढ़ (बिजनौर)। वन अधिनियमों की सख्ती के चलते प्राचीन कांदरू और नूनगढ़ मंदिर श्रद्धालुओं की पहुंच से दूर हो गए हैं। नागरिकों ने उत्तराखंड शासन से मांग की है कि कालागढ़ के निकट इन मंदिरों को आम जनता के आवागमन के लिए पहले की तरह से खोला जाए।
कालागढ़ से कोटद्वार, रामनगर के बीच अनेकों प्राचीन सिद्ध धर्म स्थल हैं। इन स्थलों को वन अधिनियमों की सख्ती के कारण श्रद्धालुओं से दूर कर दिया गया है। कालागढ़ में स्टील ब्रिज के निकट प्राचीन शिव मंदिर, सैंडिल बांध मार्ग पर कांदरू मंदिर, सूखास्रोत में नूनगढ़ का मंदिर अपनी खास अहमियत रखते हैं। बुजुर्ग एसपी देवरानी आदि कहते हैं कि कालागढ़ में रामगंगा बांध बनने से पहले रामगंगा नदी के तट पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर के निकट मिर्च मसालों का बाजार बृहस्पतिवार के दिन लगता था, यहां से व्यापारी कांदरू के मंदिर से होकर नूनगढ़ पहुंचते थे। यहां नमक और मसालों का बाजार भी लगता था। इन बाजारों के अलावा बुक्साड़ में तो विशाल मेले का आयोजन किया जाता था।
रामगंगा बांध के बन जाने से बुक्साड़ तो बांध के जलाशय की भेंट चढ़ चुका है। अब केवल कांदरू और नूनगढ़ के मंदिर बचे हैं। इन दोनों स्थलों से वन विभाग के अधिनियमों ने श्रद्धालुओं को दूर कर दिया है। नागरिकों दीपक मैंदोला, राजबहादुर, विजय सिंह आदि का कहना है कि दोनों ही स्थलों को पूर्व के समान आम जनता के लिए खोला जाए। पूजा पाठ करना संवैधानिक अधिकार है उससे जनता को दूर न किया जाए। पूजा पाठ से न तो पर्यावरण को ही खतरा है और न ही वन व वन्यजीवों को कोई समस्या हो सकती है। उधर, रेंज अधिकारी आरके भट्ट का कहना है कि विभागीय आदेशों का पालन किया जा रहा है, जो भी उच्च स्तर से आदेश होंगे उनका भी पालन होगा।
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कालागढ़ (बिजनौर)। वन अधिनियमों की सख्ती के चलते प्राचीन कांदरू और नूनगढ़ मंदिर श्रद्धालुओं की पहुंच से दूर हो गए हैं। नागरिकों ने उत्तराखंड शासन से मांग की है कि कालागढ़ के निकट इन मंदिरों को आम जनता के आवागमन के लिए पहले की तरह से खोला जाए।
कालागढ़ से कोटद्वार, रामनगर के बीच अनेकों प्राचीन सिद्ध धर्म स्थल हैं। इन स्थलों को वन अधिनियमों की सख्ती के कारण श्रद्धालुओं से दूर कर दिया गया है। कालागढ़ में स्टील ब्रिज के निकट प्राचीन शिव मंदिर, सैंडिल बांध मार्ग पर कांदरू मंदिर, सूखास्रोत में नूनगढ़ का मंदिर अपनी खास अहमियत रखते हैं। बुजुर्ग एसपी देवरानी आदि कहते हैं कि कालागढ़ में रामगंगा बांध बनने से पहले रामगंगा नदी के तट पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर के निकट मिर्च मसालों का बाजार बृहस्पतिवार के दिन लगता था, यहां से व्यापारी कांदरू के मंदिर से होकर नूनगढ़ पहुंचते थे। यहां नमक और मसालों का बाजार भी लगता था। इन बाजारों के अलावा बुक्साड़ में तो विशाल मेले का आयोजन किया जाता था।
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रामगंगा बांध के बन जाने से बुक्साड़ तो बांध के जलाशय की भेंट चढ़ चुका है। अब केवल कांदरू और नूनगढ़ के मंदिर बचे हैं। इन दोनों स्थलों से वन विभाग के अधिनियमों ने श्रद्धालुओं को दूर कर दिया है। नागरिकों दीपक मैंदोला, राजबहादुर, विजय सिंह आदि का कहना है कि दोनों ही स्थलों को पूर्व के समान आम जनता के लिए खोला जाए। पूजा पाठ करना संवैधानिक अधिकार है उससे जनता को दूर न किया जाए। पूजा पाठ से न तो पर्यावरण को ही खतरा है और न ही वन व वन्यजीवों को कोई समस्या हो सकती है। उधर, रेंज अधिकारी आरके भट्ट का कहना है कि विभागीय आदेशों का पालन किया जा रहा है, जो भी उच्च स्तर से आदेश होंगे उनका भी पालन होगा।
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