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द्यमियों के लिए जिले में खुला पिटारा, चमका काष्ठकला उद्योग
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उद्यमियों के लिए जिले में खुला पिटारा, चमका काष्ठकला उद्योग
बिजनौर। साल 2018 उद्योगों के लिए सौगात लेकर आया। जिले के काष्ठकला को एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल किया गया। इस उद्योग को चमकाने के लिए बड़े स्तर पर काम हो रहे हैं। गांव स्वाहेड़ी और अफजलगढ़ क्षेत्र में काष्ठकला को बढ़ावा देने के लिए लैंड बैंक बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा उद्योगों के लिए 150 करोड़ से ज्यादा के एमओयू शासन ने स्वीकृत कर लिए।
जिले को कृषि प्रधान जिले के रूप में ही जाना जाता था। जिले की काष्ठकला पूरे एशिया में प्रसिद्ध होने के बाद भी यह केवल एक तहसील नगीना तक ही सिमटा था। काष्ठकला को बढ़ाने के लिए उद्यमी मांग कर रहे थे, लेकिन उस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। साल की शुरूआत में ही प्रदेश सरकार ने काष्ठकला उद्यमियों को एक जिला एक उत्पाद का तोहफा दिया। इस योजना में काष्ठकला को शामिल किया गया। अब इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बैंकों के माध्यम से सब्सिडी योजना चलाई गई है। उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सबसे ज्यादा बिजली और जमीन की जरूरत होती है। सरकार ने उद्यमियों की इस जरूरत को भी समझा। नए व पुराने उद्योगों की स्थापना के लिए बिजली बिल में छूट का प्रावधान किया। अफजलगढ़ व स्वाहेड़ी में लैंड बैंक बनाए जा रहे हैं। वहां उद्यमियों को जमीन के पट्टे दिए जाएंगे। वहां बिजली 24 घंटे देने की व्यवस्था भी की जा रही है। इसके अलावा जिले में यूपी की पहली फिल्म यूनिवर्सिटी खोलने की भी घोषणा हुई। फिल्म इंडस्ट्री खुलने से देश विदेश के जाने माने कलाकार जिले में आकर विद्यार्थियों से अनुभव साझा करेंगे। इससे जिला चमकेगा और रोजगार बढ़ेगा। नजीबाबाद में दशकों से बंद पड़े कंबल कारखाने के भी इस साल भाग जाए गए। कारखाने नई मशीनें लगाने का काम शुरू हो गया है। यहां पर सैकड़ों मजदूर काम करेंगे। नगीना में बंद पड़ी कताई मिल को भी काष्ठ कला उद्योग में देने की तैयारी शुरू हुई है। इस पर काम शुरू हो गया है।
आधुनिक मशीनों से दी ट्रेनिंग
पूरे एशिया में जाना जाने वाला काष्ठकला उद्योग चमक खोने लगा था। सबसे बड़ी समस्या महंगी बिजली और उसकी कटौती थी। नए मजदूर भी इस उद्योग से नहीं जुड़ रहे थे। लेकिन एक जिला एक उत्पाद में शामिल होने के बाद काष्ठ कला क्षेत्र में राहत दी गई। मजदूरों को आधुनिक मशीनों से काम करने की ट्रेनिंग दी गई।
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बिचौलियों से मिली आजादी
काष्ठकला के व्यापारी बिचौलियों के जाल में भी फंसते हैं। कभी कभी तो व्यापारी से ज्यादा मुनाफा बिचौलिए कमा लेते थे। बिचौलियों की दखलअंदाजी खत्म करने के लिए लखनऊ में बने अवध शिल्प ग्राम में जिले की काष्ठ कला को चमकाने के लिए भी एक स्टॉल दिया गया है। वहां देश भर के अलावा विदेशों से आने वाले व्यापारी भी काष्ठकला को देखकर सीधे उद्यमी को ऑर्डर दे रहे हैं। जिले के कुछ उद्यमियों को सीधे बड़े ऑर्डर मिले हैं।
रोजगार की बहेगी बयार
जिन व्यापारियों को एमओयू मिले हैं, उनके प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो गए हैं। काष्ठकला व अन्य उद्योगों से अगला साल युवाओं के लिए बहुत खास होगा। युवाओं के सामने रोजगार के अपार अवसर होंगे।
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बिजनौर। साल 2018 उद्योगों के लिए सौगात लेकर आया। जिले के काष्ठकला को एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल किया गया। इस उद्योग को चमकाने के लिए बड़े स्तर पर काम हो रहे हैं। गांव स्वाहेड़ी और अफजलगढ़ क्षेत्र में काष्ठकला को बढ़ावा देने के लिए लैंड बैंक बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा उद्योगों के लिए 150 करोड़ से ज्यादा के एमओयू शासन ने स्वीकृत कर लिए।
जिले को कृषि प्रधान जिले के रूप में ही जाना जाता था। जिले की काष्ठकला पूरे एशिया में प्रसिद्ध होने के बाद भी यह केवल एक तहसील नगीना तक ही सिमटा था। काष्ठकला को बढ़ाने के लिए उद्यमी मांग कर रहे थे, लेकिन उस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। साल की शुरूआत में ही प्रदेश सरकार ने काष्ठकला उद्यमियों को एक जिला एक उत्पाद का तोहफा दिया। इस योजना में काष्ठकला को शामिल किया गया। अब इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बैंकों के माध्यम से सब्सिडी योजना चलाई गई है। उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सबसे ज्यादा बिजली और जमीन की जरूरत होती है। सरकार ने उद्यमियों की इस जरूरत को भी समझा। नए व पुराने उद्योगों की स्थापना के लिए बिजली बिल में छूट का प्रावधान किया। अफजलगढ़ व स्वाहेड़ी में लैंड बैंक बनाए जा रहे हैं। वहां उद्यमियों को जमीन के पट्टे दिए जाएंगे। वहां बिजली 24 घंटे देने की व्यवस्था भी की जा रही है। इसके अलावा जिले में यूपी की पहली फिल्म यूनिवर्सिटी खोलने की भी घोषणा हुई। फिल्म इंडस्ट्री खुलने से देश विदेश के जाने माने कलाकार जिले में आकर विद्यार्थियों से अनुभव साझा करेंगे। इससे जिला चमकेगा और रोजगार बढ़ेगा। नजीबाबाद में दशकों से बंद पड़े कंबल कारखाने के भी इस साल भाग जाए गए। कारखाने नई मशीनें लगाने का काम शुरू हो गया है। यहां पर सैकड़ों मजदूर काम करेंगे। नगीना में बंद पड़ी कताई मिल को भी काष्ठ कला उद्योग में देने की तैयारी शुरू हुई है। इस पर काम शुरू हो गया है।
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आधुनिक मशीनों से दी ट्रेनिंग
पूरे एशिया में जाना जाने वाला काष्ठकला उद्योग चमक खोने लगा था। सबसे बड़ी समस्या महंगी बिजली और उसकी कटौती थी। नए मजदूर भी इस उद्योग से नहीं जुड़ रहे थे। लेकिन एक जिला एक उत्पाद में शामिल होने के बाद काष्ठ कला क्षेत्र में राहत दी गई। मजदूरों को आधुनिक मशीनों से काम करने की ट्रेनिंग दी गई।
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बिचौलियों से मिली आजादी
काष्ठकला के व्यापारी बिचौलियों के जाल में भी फंसते हैं। कभी कभी तो व्यापारी से ज्यादा मुनाफा बिचौलिए कमा लेते थे। बिचौलियों की दखलअंदाजी खत्म करने के लिए लखनऊ में बने अवध शिल्प ग्राम में जिले की काष्ठ कला को चमकाने के लिए भी एक स्टॉल दिया गया है। वहां देश भर के अलावा विदेशों से आने वाले व्यापारी भी काष्ठकला को देखकर सीधे उद्यमी को ऑर्डर दे रहे हैं। जिले के कुछ उद्यमियों को सीधे बड़े ऑर्डर मिले हैं।
रोजगार की बहेगी बयार
जिन व्यापारियों को एमओयू मिले हैं, उनके प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो गए हैं। काष्ठकला व अन्य उद्योगों से अगला साल युवाओं के लिए बहुत खास होगा। युवाओं के सामने रोजगार के अपार अवसर होंगे।