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रेड रॉट की चपेट में गन्ने की 0238 प्रजाति
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बिजनौर में रेड रॉट की चपेट में गन्ने की 0238 प्रजाति को दिखाते किसान।
- फोटो : BIJNOR
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रेड रॉट की चपेट में गन्ने की 0238 प्रजाति
स्योहारा। प्रदेश में किसान और चीनी मिल दोनों के लिए वरदान सिद्ध हुई गन्ना प्रजाति को. 0238 रेड रॉट रोग से ग्रसित होने लगी है। गन्ना किसानों द्वारा बोई जाने वाली यह प्रजाति अभी तक पूर्वी उत्तर प्रदेश के 30 प्रतिशत खेतों में लग चुकी है। अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी गन्ने की यह प्रजाति बीमारी से ग्रस्त हो चुकी है।
अवध चीनी मिल स्योहारा के अधिशासी उपाध्यक्ष सुनील कुमार यादव ने बताया कि जनपद में 99 प्रतिशत गन्ना बुवाई को. 0238 प्रजाति से की जाती है। इस वर्ष स्योहारा चीनी मिल के 18 खेतों में इस प्रजाति के गन्ने में रेड रॉट यानी गन्ने का काना रोग पाया गया है। जबकि जनपद के अन्य चीनी मिलों जैसे द्वारिकेश अफजलगढ़ में 250, बिलाई में 250, बुंदकी में 300, नजीबाबाद में 200, बरकतपुर में 300, बिजनौर में 100, चांदपुर में 50 से अधिक गन्ना खेतों में इस बीमारी का संक्रमण पाया गया है। यदि किसान जागरूक नहीं हुआ तो आने वाले तीन वर्षों में यह बीमारी 50 प्रतिशत से भी अधिक खेतों को ग्रसित कर देगी। यदि किसान इस प्रजाति की ही बुवाई करना चाहता है तो बीज को शोधित करके ही बुवाई करें। रोगी फसल वाले खेतों व आसपास के खेतों में ट्राइकोडरमा लगाएं। रोगी फसल वाले खेत में दो तीन वर्ष तक गन्ने की खेती न करें। अन्य फसल लगा कर फसल चक्र अपनाए। को. 0238 गन्ना प्रजाति के जनक डॉ. बक्सीराम के अनुसार कोई भी गन्ना प्रजाति अधिकतम 15 वर्ष तक ही स्वस्थ और लाभदायक रहती है। को. 0238 प्रजाति 2006 से शुरू हुई थी। यह प्रजाति अब 14 वर्ष की हो चुकी है। इसलिए गन्ना किसानों को चाहिए कि अब को. 0238 की बुवाई न करके उसके स्थान पर को. 118, को. 98014, कोजा. 85 या को. एलएक्स 94787 की बुवाई करें।
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स्योहारा। प्रदेश में किसान और चीनी मिल दोनों के लिए वरदान सिद्ध हुई गन्ना प्रजाति को. 0238 रेड रॉट रोग से ग्रसित होने लगी है। गन्ना किसानों द्वारा बोई जाने वाली यह प्रजाति अभी तक पूर्वी उत्तर प्रदेश के 30 प्रतिशत खेतों में लग चुकी है। अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी गन्ने की यह प्रजाति बीमारी से ग्रस्त हो चुकी है।
अवध चीनी मिल स्योहारा के अधिशासी उपाध्यक्ष सुनील कुमार यादव ने बताया कि जनपद में 99 प्रतिशत गन्ना बुवाई को. 0238 प्रजाति से की जाती है। इस वर्ष स्योहारा चीनी मिल के 18 खेतों में इस प्रजाति के गन्ने में रेड रॉट यानी गन्ने का काना रोग पाया गया है। जबकि जनपद के अन्य चीनी मिलों जैसे द्वारिकेश अफजलगढ़ में 250, बिलाई में 250, बुंदकी में 300, नजीबाबाद में 200, बरकतपुर में 300, बिजनौर में 100, चांदपुर में 50 से अधिक गन्ना खेतों में इस बीमारी का संक्रमण पाया गया है। यदि किसान जागरूक नहीं हुआ तो आने वाले तीन वर्षों में यह बीमारी 50 प्रतिशत से भी अधिक खेतों को ग्रसित कर देगी। यदि किसान इस प्रजाति की ही बुवाई करना चाहता है तो बीज को शोधित करके ही बुवाई करें। रोगी फसल वाले खेतों व आसपास के खेतों में ट्राइकोडरमा लगाएं। रोगी फसल वाले खेत में दो तीन वर्ष तक गन्ने की खेती न करें। अन्य फसल लगा कर फसल चक्र अपनाए। को. 0238 गन्ना प्रजाति के जनक डॉ. बक्सीराम के अनुसार कोई भी गन्ना प्रजाति अधिकतम 15 वर्ष तक ही स्वस्थ और लाभदायक रहती है। को. 0238 प्रजाति 2006 से शुरू हुई थी। यह प्रजाति अब 14 वर्ष की हो चुकी है। इसलिए गन्ना किसानों को चाहिए कि अब को. 0238 की बुवाई न करके उसके स्थान पर को. 118, को. 98014, कोजा. 85 या को. एलएक्स 94787 की बुवाई करें।
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