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जीएसटी से प्रभावित होगा कालीन उद्योग, करेंगे विरोध
bhadohi news
Updated Fri, 30 Jun 2017 01:03 AM IST
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एकमा की साधारण सभा में मंचासीन एकमा पदाधिकारी
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भदोही। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से कालीन उद्योग को नुकसान है। इससे कालीन निर्यातकों की समस्याएं तो बढ़ेंगी ही उद्योग से जुड़े लाखों मजदूरों का रोजगार भी प्रभावित होगा। सर्वसम्मति से जीएसटी के खिलाफ मुखर होने का एलान करते हुए इस पर शीघ्र रणनीति तय की जाएगी।
ये बातें गुरुवार को कालीन भवन में अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ (एकमा) के वार्षिक साधारण सभा में कही गई।
साधारण सभा में जीएसटी पर कोई प्रस्ताव नहीं था। मानद सचिव पीयूष बरनवाल के वार्षिक रिपोर्ट और बजट प्रस्तावों पर चर्चा के बाद अध्यक्ष की अनुमति से जीएसटी का मुद्दा उठाया गया। सदन में उपस्थित निर्यातकों ने कहा कि जीएसटी से कालीन उद्योग भी प्रभावित होगा। हमारे साथ साथ मजदूर, बुनकरों का रोजगार भी प्रभावित होगा। एकमा के पूर्व अध्यक्ष रवि पाटोदिया ने कहा कि हस्तकला को जीएसटी से मुक्त किया जाना चाहिए था। पूरा उद्योग इसकी आशा में था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पूर्व मानद सचिव, अरशद वजीरी ने कहा कि जीएसटी पर कपड़े और टेक्सटाइल्स से जुड़े उद्योग मुखर हैं। ऐसे में चुप्पी साधना कालीन उद्योग के लिए खतरनाक हो सकता है। कहा कि पांच से लेकर 18 प्रतिशत तक जीएसटी से उद्योग की स्थिति विषम होगी और कारोबार में दिक्कत होगी।
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अंत में तय किया गया कि एकमा जीएसटी का विरोध करती है और शीघ्र रणनीति पर विचार किया जाएगा। बैठक में कोषाध्यक्ष अशफाक अंसारी ने वित्त वर्ष 2017-18 का 5.83 लाख घाटे का बजट प्रस्तुत किया। बताया कि चालू वर्ष में कुल प्राप्तियों 15.38 लाख के मुकाबले 21.21 लाख खर्च का अनुमान है। बैठक की अध्यक्षता एकमा अध्यक्ष गुलाम सर्फुद्दीन अंसारी ने की। इस मौके पर मुख्य रूप से शिवसागर तिवारी, केपी दूबे, नसरुल्लाह अंसारी, शमीम आलम लल्लन, भरतलाल मौर्य, हाजी अब्दुल हादी, विनय कपूर, भोलानाथ बरनवाल, राजाराम गुप्ता, तिलकराज खन्ना, रामचंद्र यादव, तनवीर हुसैन, जयप्रकाश गुप्ता, हाजी सईद अंसारी, एचएन मौर्य, इस्तीयाक खां, सैय्याज अंसारी, आमिर हसन, राशिद मलिक मौजूद रहे।
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ये बातें गुरुवार को कालीन भवन में अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ (एकमा) के वार्षिक साधारण सभा में कही गई।
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साधारण सभा में जीएसटी पर कोई प्रस्ताव नहीं था। मानद सचिव पीयूष बरनवाल के वार्षिक रिपोर्ट और बजट प्रस्तावों पर चर्चा के बाद अध्यक्ष की अनुमति से जीएसटी का मुद्दा उठाया गया। सदन में उपस्थित निर्यातकों ने कहा कि जीएसटी से कालीन उद्योग भी प्रभावित होगा। हमारे साथ साथ मजदूर, बुनकरों का रोजगार भी प्रभावित होगा। एकमा के पूर्व अध्यक्ष रवि पाटोदिया ने कहा कि हस्तकला को जीएसटी से मुक्त किया जाना चाहिए था। पूरा उद्योग इसकी आशा में था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पूर्व मानद सचिव, अरशद वजीरी ने कहा कि जीएसटी पर कपड़े और टेक्सटाइल्स से जुड़े उद्योग मुखर हैं। ऐसे में चुप्पी साधना कालीन उद्योग के लिए खतरनाक हो सकता है। कहा कि पांच से लेकर 18 प्रतिशत तक जीएसटी से उद्योग की स्थिति विषम होगी और कारोबार में दिक्कत होगी।
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अंत में तय किया गया कि एकमा जीएसटी का विरोध करती है और शीघ्र रणनीति पर विचार किया जाएगा। बैठक में कोषाध्यक्ष अशफाक अंसारी ने वित्त वर्ष 2017-18 का 5.83 लाख घाटे का बजट प्रस्तुत किया। बताया कि चालू वर्ष में कुल प्राप्तियों 15.38 लाख के मुकाबले 21.21 लाख खर्च का अनुमान है। बैठक की अध्यक्षता एकमा अध्यक्ष गुलाम सर्फुद्दीन अंसारी ने की। इस मौके पर मुख्य रूप से शिवसागर तिवारी, केपी दूबे, नसरुल्लाह अंसारी, शमीम आलम लल्लन, भरतलाल मौर्य, हाजी अब्दुल हादी, विनय कपूर, भोलानाथ बरनवाल, राजाराम गुप्ता, तिलकराज खन्ना, रामचंद्र यादव, तनवीर हुसैन, जयप्रकाश गुप्ता, हाजी सईद अंसारी, एचएन मौर्य, इस्तीयाक खां, सैय्याज अंसारी, आमिर हसन, राशिद मलिक मौजूद रहे।