ज्ञानपुर (भदोही)। हफ्तेभर पूर्व आए आंधी और ओलावृष्टि का असर अभी लोगों के जेहन से उतरा भी नहीं था कि शनिवार को मौसम का मिजाज एक बार फिर अचानक बदल गया। कहीं तेज तो कहीं रिमझिम बारिश से समूची कालीन नगरी तर-ब-तर हो गई। इससे निचले इलाकों में जहां जलभराव और कीचड़ हो गया, वहीं किसानों की रही-सही मेहनत की कमाई पर एक बार फिर प्रकृति की तगड़ी मार पड़ी। फसलों को भारी नुकसान हुआ।
तकरीबन हफ्तेभर पूर्व तीन-चार दिनों तक लगातार आंधी और ओलावृष्टि ने जिले में भारी तबाही मचाई थी। सैकड़ों पेड़ उखड़ गए और तार-पोल धराशायी हो गए। बिजली और टेलीफोन-इंटरनेट व्यवस्थाएं छिन्न-भिन्न हो गईं थीं। आंधी के असर से उखड़े कई इलाकों के तार-पोल अब तक बन भी नहीं पाए हैं, ना ही तमाम किसानों को उनकी फसल क्षति का मुआवजा ही मिल पाया है। प्रकृति की यह त्रासदी अभी लोग भूल भी नहीं पाए थे कि शनिवार को सुबह ही इंद्रदेव बिना मौसम फिर मेहरबान हो गए। सुबह आठ बजे से लेकर दोपहर एक बजे तक जिले के अलग-अगल इलाकों में बारिश हुई। इस दौरान हल्की से तेज हवाएं भी चलीं। इससे खेत-खलिहानों में सुखाई जा रही फसल एक बार फिर भीगकर खराब हो गई। इससे खेती-बारी को फिर नुकसान पहुंचा। तमाम किसान खेत और खलिहानों में काट कर रखी गई फसल को समेटने में जुटे रहे। उनका कहना था कि यह बारिश मेहनत सफल नहीं होने देगी। पक चुकी तिलहन और दलहन की फसल को बारिश से नुकसान पहुंचा है। ज्ञानपुर के किसान श्यामलाल ने कहा कि खलिहानों में रखी गई फसल के दाने बार-बार भीगकर दोबारा जाम जाने की स्थिति में पहुंच गए हैं। राजाराम यादव ने कहा कि किसानों की पसीने की कमाई घर के अंदर जाने की स्थिति नहीं बन पा रही है। पिछली बारिश में भीगी फसल अभी पूरी तरह सूख भी नहीं पाई थी ,िक इस बारिश ने फिर सब चौपट कर दिया। यह हालत जिला मुख्यालय के अलावा औराई, महारागंज, असनांव, दुर्गागंज, अभोली, गोपीगंज, डीघ समेत जिले के तमाम इलाकों में रही।