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वैक्सीनेशन के साथ सतर्कता आई काम, लोगों की बची जान

Wed, 30 Mar 2022 12:48 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 30 Mar 2022 12:48 AM IST
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Vigilance came with vaccination, people's lives were saved
कालीन नगरी में वैश्विक महामारी कोरोना ने जब दस्तक दी तो हर कोई अंजान था, लेकिन जब पहली लहर में लोग कोरोना की चपेट में आने लगे तो उससे हर कोई भयभीत होने लगा। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कोविड संक्रमण का खतरा भाप सतर्कता बरतनी शुरू तो की, लेकिन उस दौरान कोई लाभ नहीं मिला। हालांकि आगे चलकर जब वैक्सीन आई तो वैक्सीनेशन के साथ ही सतर्कता बरतकर लोगों ने अपनी और औरों को भी जान बचा ली। लोगों का कहना है कि डर के आगे जीत है। सावधान रहें और सुरक्षित रहें। कई लोगों ने सतर्कता और सावधानी की बदौलत अन्य बीमारियों से भी जंग जीती है।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मिशन इंद्रधनुष, पल्स पोलिया से बचाव के लिए टीकाकरण सहित कई योजनाओं की गति उस दौरान थोड़ी सुस्त हुई। कोरोना से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी चिकित्सालयों औ सीएचसी पर बढ़ा दी गई। साथ ही टीकाकरण के लिए अभियान में तेजी लाई गई। पहली लहर के दौरान वैक्सीनेशन करवाने वालों की संख्या कम रही। जैसे ही कोविड की दूसरी लहर ने दस्तक दी तो ज्ञानपुर, सुरियावां, डीघ, औराई, अभोली, भदोही के चिकित्सालय और सीएचसी पर वैक्सीनेशन कराने के लिए लोगों की लंबी कतार दिखनी शुरू हो गई। राम निहोर बिंद बताते हैं कि पहली लहर के दौरान हम डर गए थे। दूसरी लहर के दौरान बिना कुछ सोचे समझे जाकर वैक्सीन लगवा ली। अब किसी प्रकार की दिक्कत नहीं है। उधर, कोरोना वायरस ने उन्हीं लोगों को चपेट में लिया, जिनकी इम्युनिटी कमजोर थी। ऐसे में जब कोरोना आया तो कई लोगों ने खान-पान पर ध्यान देना शुरू कर दिया। जब लोगों ने पौष्टिक खाना खाया तो कमजोरी से होने वाली बीमारियां दूर हो गईं। वहीं योग पर भी लोगों ने ध्यान केंद्रित किया। ऐसे में स्वस्थ होने की गति बढ़ी। ज्ञानपुर के प्रदीप कुमार, नीरज दूबे, सुरेश कुमार ने कहा कि उन्हें कमजोरी, गैस और सिर दर्द की समस्या थी। लॉक डाउन से ही नियमित योग करना शुरू कर दिए। खान-पान ध्यान दिए तो स्वास्थ्य में काफी सुधार हो गया। उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.अमित कुमार दुबे का कहना है कि पहली की तुलना में दूसरी व तीसरी लहर के दौरान स्वास्थ्य विभाग के पास करीब सारी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो गईं थीं। कर्मचारियों का भी प्रशिक्षण करा लिया गया था। ऑक्सीजन की व्यवस्था के साथ ही चिकित्सालयों में बेड भी बढ़ा दिए गए थे। अब भी व्यवस्था मुकम्मल है।
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