फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bhadohi News ›   US tariffs threaten to slow down carpet industry, 30 lakh workers in danger in bhadohi

अमेरिकी टैरिफ: कालीन उद्योग में मंदी की आहट, 30 लाख श्रमिकों पर संकट; यहां 80% परिवार जुड़े हैं इस उद्योग से

Fri, 08 Aug 2025 05:59 PM IST
वाराणसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, भदोही।
अमर उजाला नेटवर्क, भदोही। Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Fri, 08 Aug 2025 05:59 PM IST
सार

अमेरिकी टैरिफ से कालीन उद्योग में मंदी के आसार हैं। ऐसे में भदोही जिले में 30 लाख श्रमिकों पर संकट मडरा रहा है। इस जिले में 80 फीसदी परिवार इस उद्योग प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। 

विज्ञापन
US tariffs threaten to slow down carpet industry, 30 lakh workers in danger in bhadohi
कालीन की धुलाई करते मजदूर। - फोटो : संवाद

विस्तार

अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ थोपने के बाद भारतीय कालीन उद्योग में भूचाल आ गया है। 17 हजार करोड़ वाले इस व्यवसाय से जुड़े 30 लाख श्रमिकों के भविष्य पर सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव भदोही-मिर्जापुर परिक्षेत्र से जुड़े कालीन निर्यातकों और मजदूरों पर पड़ेगा। भदोही में करीब 80 फीसदी परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर कालीन उद्योग से जुड़े हैं। अमेरिकी टैरिफ से कालीन उद्योग में मंदी के आसार बन रहे हैं।
विज्ञापन


भारतीय कालीनों के लिए सबसे बड़े बाजार अमेरिका ने भारत पर 25 फीसदी आयात शुल्क लगाया था। इस टैरिफ की समस्या का समाधान तलाशने में निर्यातक जुटे ही थे कि इस बीच रूस से तेल आयात पर भारत के स्टैंड को लेकर बौखलाए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैक्स थोप दिया। इससे अमेरिका में भारतीय सामान 50 फीसदी तक महंगे हो गए। इसके असर से अमेरिका में भारतीय कालीन भी महंगे हाेंगे। इसका असर यहां कालीन निर्माण के सभी पहलुओं पर पड़ेगा। इससे लागत भी लगभग 50 फीसदी बढ़ेगी।
विज्ञापन

भारतीय कालीन संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के मुताबिक अमेरिका, भारतीय कालीनों के व्यापार में करीब 60 फीसदी की हिस्सेदारी रखता है। देशभर में करीब 17 हजार करोड़ रुपये का कालीन कारोबार होता है। इसमें 10 हजार करोड़ का कारोबार उत्तर प्रदेश और उसमें भी छह हजार करोड़ की हिस्सेदारी भदोही-मिर्जापुर परिक्षेत्र की है।

सबसे अधिक रोजगार मुहैया कराने वाले कालीन उद्योग से जुड़े मजदूरों पर अमेरिकी टैरिफ से संकट के बादल मंडराने लगे हैं। अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ (एकमा) के मुताबिक कालीन उद्योग देश भर में करीब 30 लाख लोगों को रोजगार देता है। भदोही के तो लगभग हर घर में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लोग इसमें जुड़े हैं।
विज्ञापन

एकमा अध्यक्ष रजा खां के मुताबिक कालीन तैयार करने के लिए 20 चरणों से होकर गुजरना पड़ता है। इसमें कच्चे माल की खरीदारी से लेकर कालीन की फिनिशिंग तक के कार्य शामिल हैं। बताया कि विदेश से कच्चा माल मंगाने के बाद छंटाई, लेफा, एक्सप्लोर से खरीदारी, मजदूरों से कताई, रंगाई, डिजाइनिंग, बुनकरी, आवश्यकता पड़ने पर मरम्मत, क्लिपिंग, धुलाई, फिर से क्लिपिंग, पेंचाई, सफाई, रंगकटा कार्य होते हैं। इसमें भी खुलाई, पेंचाई, लेफा और काती बुनाई का काम अधिकतर महिलाएं ही करती हैं। इससे उन्हें घर बैठे ही रोजगार मिल जाता है।

एकमा के मानद सचिव पीयूष बरनवाल के मुताबिक अमेरिकी टैरिफ से इस समय देशभर में करीब 1500 करोड़ का माल डंप है। इसमें 500 करोड़ का माल भदोही-मिर्जापुर परिक्षेत्र का है। फिलहाल नए आर्डर नहीं लिए जा रहे हैं। पूरा उद्योग इस समय अनिश्चितताओं से भरा हुआ है। बताया कि टेक्सटाइल के अन्य उत्पादों की अपेक्षा कालीन उद्योग तत्काल प्रभावित होने वाला उद्योग है, क्योंकि यह करीब 95 फीसदी तक एक्सपोर्ट होता है। ऐसे में पूरा उद्योग इस समय सदमे में है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed