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कंम्प्यूटराइज्ड खतौनी का अभाव, सरकारी योजनाओं से वंचित हैं दो हजार किसान
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ज्ञानपुर/सीतामढ़ी। मौजूदा दौर में जबकि अधिकांश सरकारी सेवाएं ऑनलाइन मिल रही हैं। कालीन नगरी का कोनिया क्षेत्र ऐसा है जहां के करीब चार गांवों के 2000 किसान कंम्प्यूटराइज्ड खतौनी में सरकारी योजनाओं से वंचित हैं। इसके चलते सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं किसान क्रेडिट कार्ड और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का भी लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है।
ज्ञानपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत डीघ, बहपूरा, भभौरी और धनतुलसी गांव की खतौनी भू-अभिलेख में काफी पुरानी हो चुकी है। कुछ पन्ने जीर्ण-शीर्ण हो गए हैं। बावजूद इसके इन गांवों की खतौनी कंम्प्यूटराइज्ड नहीं हुई है। इस कारण वरासत और दाखिल खारिज भी नहीं हो पा रहा है। डीघ कटरा बाजार निवासी अधिवक्ता अजीत सिंह कहते हैं कि डीघ गांव की चकबंदी प्रक्रिया वर्ष 1982 में शुरू हुई थी। चकबंदी विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजरते हुए आकार पत्र 23 तक पहुंच गई थी, लेकिन वर्ष 2013 में बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी और उपसंचालक चकबंदी भदोही के रिपोर्ट पर 14 जून 2016 में तत्कालीन चकबंदी आयुक्त उत्तर प्रदेश द्वारा द्वारा डीघ ग्राम सभा की चकबंदी प्रक्रिया को निरस्त कर दी गई। यहीं वजह है कि समस्या अभी भी बनी हुई है। हालांकि गंगा के तरी की भूमिधरी के रिकार्ड के अनुसार कुछ किसानों को सम्मान निधि मिल रही है।
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इन योजनाओं से हैं वंचित
- हजारों किसानों को किसान सम्मान निधि से वंचित होना पड़ रहा है।
- बैंकों से किसान क्रेडिट कार्ड नहीं बन पा रहा।
- वरासत और दाखिल खारिज भी नहीं हो पाता।
- सरकारी क्रय केंद्रों पर अनाज की बिक्री के दौरान समस्या होती है।
यहां की खतौनियां काफी जीर्ण-शीर्ण हो गई हैं। ऐसे में उनको कंम्प्यूटराइज्ड नहीं कराया जा सकता था। अब नई खतौनी बनायी जा रही है। जल्द ही यहां की समस्या हल हो जाएगी।
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- शैलेंद्र मिश्रा, अपर जिलाधिकारी
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ज्ञानपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत डीघ, बहपूरा, भभौरी और धनतुलसी गांव की खतौनी भू-अभिलेख में काफी पुरानी हो चुकी है। कुछ पन्ने जीर्ण-शीर्ण हो गए हैं। बावजूद इसके इन गांवों की खतौनी कंम्प्यूटराइज्ड नहीं हुई है। इस कारण वरासत और दाखिल खारिज भी नहीं हो पा रहा है। डीघ कटरा बाजार निवासी अधिवक्ता अजीत सिंह कहते हैं कि डीघ गांव की चकबंदी प्रक्रिया वर्ष 1982 में शुरू हुई थी। चकबंदी विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजरते हुए आकार पत्र 23 तक पहुंच गई थी, लेकिन वर्ष 2013 में बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी और उपसंचालक चकबंदी भदोही के रिपोर्ट पर 14 जून 2016 में तत्कालीन चकबंदी आयुक्त उत्तर प्रदेश द्वारा द्वारा डीघ ग्राम सभा की चकबंदी प्रक्रिया को निरस्त कर दी गई। यहीं वजह है कि समस्या अभी भी बनी हुई है। हालांकि गंगा के तरी की भूमिधरी के रिकार्ड के अनुसार कुछ किसानों को सम्मान निधि मिल रही है।
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इन योजनाओं से हैं वंचित
- हजारों किसानों को किसान सम्मान निधि से वंचित होना पड़ रहा है।
- बैंकों से किसान क्रेडिट कार्ड नहीं बन पा रहा।
- वरासत और दाखिल खारिज भी नहीं हो पाता।
- सरकारी क्रय केंद्रों पर अनाज की बिक्री के दौरान समस्या होती है।
यहां की खतौनियां काफी जीर्ण-शीर्ण हो गई हैं। ऐसे में उनको कंम्प्यूटराइज्ड नहीं कराया जा सकता था। अब नई खतौनी बनायी जा रही है। जल्द ही यहां की समस्या हल हो जाएगी।
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- शैलेंद्र मिश्रा, अपर जिलाधिकारी