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बारिश में विषधर बने मुसीबत
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ज्ञानपुर। बारिश शुरू होने के साथ ही विषधरों ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ताल-तलैया और निर्जन स्थानों पर उनके बिल में पानी भरने से वे रिहायशी क्षेत्रों में पहुंचने लगे हैं। जहां उनकी मुलाकात आम लोगों से होने लगी है। महीने भर में दर्जन भर से अधिक महिलाएं और पुरुष सर्प के काटने से जान गवां चुके हैं।
सर्प वैसे भी खुद का आशियाना सुरक्षित एवं निर्जन स्थानों पर ही बनाते हैं, लेकिन बारिश का समय उनके लिए परेशानी भरा हो जाता है। मूसलाधार बारिश से उनके बिल में पानी भरने से वह ठौर-ठिकाने के लिए रिहायशी क्षेत्रों में रुख करते हैं, जहां उनका सामना ग्रामीणों से होता है और वह आत्मरक्षा के कारण वह काट लेते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो बारिश से बिलों में भरे पानी एवं गरमी के चलते सर्प पलायन कर अन्य स्थानों पर भटकते हैं। भोजन की तलाश में यह रिहायशी इलाकों में पहुंच जाते हैं। इसके चलते इनका संपर्क इंसानों से बढ़ जाता है। सर्प प्रजाति की प्रकृति डिफेंसिव (सुरक्षात्मक) होती है। सुरक्षा एवं बचाव की कोशिश में सांप डंसते हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो महीने भर में डीघ के कुरमैचा, नवधन, दुर्गागंज के मिश्री सहित दर्जन भर लोग सांप के काटने से काल कवलित हो चुके हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल में पर्याप्त एंटी वेनम दवा मौजूद होने का दावा किया है।
बारिश और गर्मी के चलते भटकने वाले सांपों की इन दिनों प्रजनन प्रवृत्ति भी बढ़ जाती है। साथी की तलाश एवं संबंधों के चलते यह और अधिक आक्रामक एवं उत्तेजित रहते हैं। जुलाई से लेकर आधे अक्तूबर तक का समय अधिक घातक रहता है। इसके चलते इन दिनों सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। बारिश में बढ़ने वाले मेंढक, चूहों आदि की तलाश में सांप नालियों के माध्यम से घरों तक पहुंच जाते हैं।
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आलोक सक्सेना, डीएफओ
जिला अस्पताल में एंटी वेनम मौजूद है। अगर कोई मरीज आता है तो उसे लगाया जाता है। सभी सीएचसी में भी इसकी व्यवस्था की गई है। कई लोगों की जान बचाई गई है।
डॉ. एसपी सिंह, सीएमएस जिला अस्पताल
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सर्प वैसे भी खुद का आशियाना सुरक्षित एवं निर्जन स्थानों पर ही बनाते हैं, लेकिन बारिश का समय उनके लिए परेशानी भरा हो जाता है। मूसलाधार बारिश से उनके बिल में पानी भरने से वह ठौर-ठिकाने के लिए रिहायशी क्षेत्रों में रुख करते हैं, जहां उनका सामना ग्रामीणों से होता है और वह आत्मरक्षा के कारण वह काट लेते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो बारिश से बिलों में भरे पानी एवं गरमी के चलते सर्प पलायन कर अन्य स्थानों पर भटकते हैं। भोजन की तलाश में यह रिहायशी इलाकों में पहुंच जाते हैं। इसके चलते इनका संपर्क इंसानों से बढ़ जाता है। सर्प प्रजाति की प्रकृति डिफेंसिव (सुरक्षात्मक) होती है। सुरक्षा एवं बचाव की कोशिश में सांप डंसते हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो महीने भर में डीघ के कुरमैचा, नवधन, दुर्गागंज के मिश्री सहित दर्जन भर लोग सांप के काटने से काल कवलित हो चुके हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल में पर्याप्त एंटी वेनम दवा मौजूद होने का दावा किया है।
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बारिश और गर्मी के चलते भटकने वाले सांपों की इन दिनों प्रजनन प्रवृत्ति भी बढ़ जाती है। साथी की तलाश एवं संबंधों के चलते यह और अधिक आक्रामक एवं उत्तेजित रहते हैं। जुलाई से लेकर आधे अक्तूबर तक का समय अधिक घातक रहता है। इसके चलते इन दिनों सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। बारिश में बढ़ने वाले मेंढक, चूहों आदि की तलाश में सांप नालियों के माध्यम से घरों तक पहुंच जाते हैं।
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आलोक सक्सेना, डीएफओ
जिला अस्पताल में एंटी वेनम मौजूद है। अगर कोई मरीज आता है तो उसे लगाया जाता है। सभी सीएचसी में भी इसकी व्यवस्था की गई है। कई लोगों की जान बचाई गई है।
डॉ. एसपी सिंह, सीएमएस जिला अस्पताल