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महकमा उदासीनता, 11.92 लाख डंप
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ज्ञानपुर। पूर्व माध्यमिक विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की बेटियों को जूडो-कराते का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम जिले में उदासीनता की भेंट चढ़ गई। शिक्षा सत्र के नौ माह खत्म होने के बाद भी न तो प्रशिक्षक मिले और न ही प्रशिक्षण शुरू हो सका। इससे शासन से प्रशिक्षण मद में आया 11.92 लाख खाते में डंप पड़ा है।
बालिकाओं के साथ अक्सर छेड़छाड़ की घटनाएं होती हैं। उन्हें स्कूल आते-जाते समय मनचलों की ओर से परेशान किया जाता है। 1090, यूपी 112 समेत अन्य सुविधाएं मिलने के बाद भी छात्राएं स्वभाव से ही डरी-सहमी रहती हैं। इसलिए विरोध भी नहीं कर पातीं। ऐसी घटनाओं से अक्सर उनका सामना होता रहता है। शिक्षा निदेशालय की ओर से बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्कूलों में जूडो-कराटे सिखाने की योजना तैयार की गई। शुरूआत में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यायल और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों को शामिल किया जाना था। इसके लिए जूडो-कराटे के प्रशिक्षक से खेल अनुदेशकों को प्रशिक्षित कराना और उसके बाद तीन-तीन स्कूलों का चयन कर बेटियों को आत्मनिर्भर बनाना था। इसके लिए निदेशालय की ओर से 11.92 लाख का बजट आवंटित किया गया। करीब नौ माह खत्म होने के बाद भी व्यवस्था प्रभावी नहीं हो सकी। समय रहते विभाग ने पहल न की तो सेल्फ डिफेंस कार्यक्रम के लिए आवंटित बजट लैप्स हो जाएगा।
जिला समन्वयक बालिका शिक्षा टीएन पांडेय ने कहा कि सेल्फ डिफेंस कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए 11.92 लाख आवंटित है। जूडो-कराटे का प्रशिक्षक न मिले से अनुदेशकों को प्रशिक्षण नहीश दिया जा सका। मिर्जापुर से एक प्रशिक्षक को बुलाया गया है। बातचीत होने पर जल्द ही प्रशिक्षण शुरू कराया जाएगा।
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बालिकाओं के साथ अक्सर छेड़छाड़ की घटनाएं होती हैं। उन्हें स्कूल आते-जाते समय मनचलों की ओर से परेशान किया जाता है। 1090, यूपी 112 समेत अन्य सुविधाएं मिलने के बाद भी छात्राएं स्वभाव से ही डरी-सहमी रहती हैं। इसलिए विरोध भी नहीं कर पातीं। ऐसी घटनाओं से अक्सर उनका सामना होता रहता है। शिक्षा निदेशालय की ओर से बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्कूलों में जूडो-कराटे सिखाने की योजना तैयार की गई। शुरूआत में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यायल और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों को शामिल किया जाना था। इसके लिए जूडो-कराटे के प्रशिक्षक से खेल अनुदेशकों को प्रशिक्षित कराना और उसके बाद तीन-तीन स्कूलों का चयन कर बेटियों को आत्मनिर्भर बनाना था। इसके लिए निदेशालय की ओर से 11.92 लाख का बजट आवंटित किया गया। करीब नौ माह खत्म होने के बाद भी व्यवस्था प्रभावी नहीं हो सकी। समय रहते विभाग ने पहल न की तो सेल्फ डिफेंस कार्यक्रम के लिए आवंटित बजट लैप्स हो जाएगा।
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जिला समन्वयक बालिका शिक्षा टीएन पांडेय ने कहा कि सेल्फ डिफेंस कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए 11.92 लाख आवंटित है। जूडो-कराटे का प्रशिक्षक न मिले से अनुदेशकों को प्रशिक्षण नहीश दिया जा सका। मिर्जापुर से एक प्रशिक्षक को बुलाया गया है। बातचीत होने पर जल्द ही प्रशिक्षण शुरू कराया जाएगा।
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