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पर्यटन की असीम संभावना संजोए है सीतामढ़ी
ब्यूरो/ अमर उजाला, भदोही
Updated Thu, 31 Dec 2015 01:41 AM IST
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शांतिप्रिय रमणीक स्थल, सुंदर आबोहवा, प्रकृति प्रदत्त अनोखा वातावरण बाहर से आने वाले सैलानियों को आकर्षित करता है। नए साल के जश्न के लिए यहां आसपास के कई जिलों के अलावा दूर-दराज के सैलानी बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं।
प्रदेश के पर्यटन मानचित्र में शुमार होने के बाद यहां सैलानियों की संख्या में काफी इजाफा भी हुआ, लेकिन शासन और प्रशासन की उदासीनता से इस पावन स्थली की विकास गति मंद पड़ने लगी है।
वैसे तो देशभर से यहां पंद्रह से सत्रह हजार लोग औसतन हर रोज आते हैं, लेकिन नए वर्ष के पहले दिन यह सैलानियों की संख्या रोज की तुलना में चार गुने से भी अधिक हो जाती है।
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विकास के जरिए इस स्थल को चर्चित बनाने वाली संस्था श्रीसीता समाहित स्थल ट्रस्ट सैलानियों की सुविधाओं के लिए तत्पर रहती है।
दुनिया का इकलौता भव्य सीतामंदिर, 108 फीट ऊंचे विशाल हनुमान जी की प्रतिमा, प्राचीन सीतामंदिर, पहाड़ पर स्थापित भोले बाबा की जटा से निकलती जलधारा देख लोग नतमस्तक होते हैं।
तीन सितारा सुविधाओं वाला गेस्ट हाउस, सुंदर पार्क, हट, नौकायन की सुविधा के साथ सायंकालीन बेला में लाइटिंग, फव्वारे लोगों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इसके अलावा प्राचीन काल से महर्षि वाल्मीकि आश्रम मंदिर, संत उड़िया बाबा आश्रम और सवा सौ वर्षीय वयोवृद्ध संत उड़िया बाबा, निर्माणाधीन सीताधाम मंदिर, स्वयंभू बाबा धवासा नाथ महादेव मंदिर भक्तों और सैलानियों के लिए भक्तिभाव और पर्यटन के लिहाज से आकर्षण के केंद्र हैं। यहां का मनमोहक दृश्य फ़िल्मी जगत को भी रास आने लगा है। यही वजह है कि भोजपुरी समेत कई फ़िल्मों और एलबम की शूटिंग भी यहां हो चुकी है। यात्रियों की सुविधाओं के लिए ट्रस्ट की ओर से कई प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि शासन और प्रशासन की ओर से पर्यटन स्थली को आगे बढ़ाने के लिए कोई कदम न उठाने से मूलभूत सुविधाओं से लोगों को जूझना पड़ता है।
इनसेट
बाहरी सैलानियों को होती है दिक्कत
सीतामढ़ी। पर्यटन स्थल सीतामढ़ी में सुविधाओं की दिक्कत दूर से आने वाले सैलानियों को उठानी पड़ती है। पड़ोसी जिले के सैलानी आने के कुछ घंटे बाद चले जाते है लेकिन देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले लोगों को सुविधाओं के अभाव में दिक्कत सहनी पड़ती है।
पर्यटन स्थल पर शाम होते ही अंधेरा छा जाता है। स्वच्छ पेयजल ,पार्किंग,शुलभ कॉम्पलेक्स आदि के लिए भी परेशानी होती है। सरकार की नजरे इनायत न होने से इस स्थल के विकास पर ग्रहण लगता जा रहा है।
जीटी रोड से महज 12 किलोमीटर की दूरी के लिए अच्छे वाहनो की कमी खलती है। परिवहन विभाग भी इस स्थल की महत्ता को गंभीरता से नही लेता है।
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प्रदेश के पर्यटन मानचित्र में शुमार होने के बाद यहां सैलानियों की संख्या में काफी इजाफा भी हुआ, लेकिन शासन और प्रशासन की उदासीनता से इस पावन स्थली की विकास गति मंद पड़ने लगी है।
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वैसे तो देशभर से यहां पंद्रह से सत्रह हजार लोग औसतन हर रोज आते हैं, लेकिन नए वर्ष के पहले दिन यह सैलानियों की संख्या रोज की तुलना में चार गुने से भी अधिक हो जाती है।
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विकास के जरिए इस स्थल को चर्चित बनाने वाली संस्था श्रीसीता समाहित स्थल ट्रस्ट सैलानियों की सुविधाओं के लिए तत्पर रहती है।
दुनिया का इकलौता भव्य सीतामंदिर, 108 फीट ऊंचे विशाल हनुमान जी की प्रतिमा, प्राचीन सीतामंदिर, पहाड़ पर स्थापित भोले बाबा की जटा से निकलती जलधारा देख लोग नतमस्तक होते हैं।
तीन सितारा सुविधाओं वाला गेस्ट हाउस, सुंदर पार्क, हट, नौकायन की सुविधा के साथ सायंकालीन बेला में लाइटिंग, फव्वारे लोगों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इसके अलावा प्राचीन काल से महर्षि वाल्मीकि आश्रम मंदिर, संत उड़िया बाबा आश्रम और सवा सौ वर्षीय वयोवृद्ध संत उड़िया बाबा, निर्माणाधीन सीताधाम मंदिर, स्वयंभू बाबा धवासा नाथ महादेव मंदिर भक्तों और सैलानियों के लिए भक्तिभाव और पर्यटन के लिहाज से आकर्षण के केंद्र हैं। यहां का मनमोहक दृश्य फ़िल्मी जगत को भी रास आने लगा है। यही वजह है कि भोजपुरी समेत कई फ़िल्मों और एलबम की शूटिंग भी यहां हो चुकी है। यात्रियों की सुविधाओं के लिए ट्रस्ट की ओर से कई प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि शासन और प्रशासन की ओर से पर्यटन स्थली को आगे बढ़ाने के लिए कोई कदम न उठाने से मूलभूत सुविधाओं से लोगों को जूझना पड़ता है।
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बाहरी सैलानियों को होती है दिक्कत
सीतामढ़ी। पर्यटन स्थल सीतामढ़ी में सुविधाओं की दिक्कत दूर से आने वाले सैलानियों को उठानी पड़ती है। पड़ोसी जिले के सैलानी आने के कुछ घंटे बाद चले जाते है लेकिन देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले लोगों को सुविधाओं के अभाव में दिक्कत सहनी पड़ती है।
पर्यटन स्थल पर शाम होते ही अंधेरा छा जाता है। स्वच्छ पेयजल ,पार्किंग,शुलभ कॉम्पलेक्स आदि के लिए भी परेशानी होती है। सरकार की नजरे इनायत न होने से इस स्थल के विकास पर ग्रहण लगता जा रहा है।
जीटी रोड से महज 12 किलोमीटर की दूरी के लिए अच्छे वाहनो की कमी खलती है। परिवहन विभाग भी इस स्थल की महत्ता को गंभीरता से नही लेता है।