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तीन बर्खास्त शिक्षकों पर दर्ज होगा मुकदमा
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ज्ञानपुर। सीटेट के फर्जी अभिलेख के आरोप में चार साल पूर्व बर्खास्त चार शिक्षकों में अब तीन के खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा। शासन के कड़े तेवर के बाद शिक्षा विभाग तीनों के खिलाफ संबंधित थानों में तहरीर दी। हालांकि इस प्रकरण में एक शिक्षक पर उसी समय केस दर्ज हो गया था। खंड शिक्षा अधिकारियों की कृपा से बचे तीनों बर्खास्त शिक्षकों से अब तक रिकवरी की कार्रवाई तक नहीं हो सकी है।
प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में पठन-पाठन के लिए हर साल शासन स्तर से शिक्षकों की नियुक्त की जाती है। एक साथ 60 से 70 हजार शिक्षक भर्ती में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी फर्जी अभिलेख लगाकर नौकरी प्राप्त कर लेते हैं। सत्यापन में जब तक मामला सामने आता है तब तक वे चार से पांच साल की नौकरी पूर्ण कर लेते हैं। वर्ष 2015 में सत्यापन के दौरान जिले के डीघ ब्लॉक के वैंकुठपट्टी, प्राथमिक विद्यालय मोढ़ समेत चार स्कूलों के शिक्षकों के सीटेट के अभिलेख फर्जी पाए गए थे। तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सत्य प्रकाश त्रिपाठी ने चारों शिक्षकों को बर्खास्त कर मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया।
डीघ ब्लॉक के वैकुंठपट्टी के बर्खास्त शिक्षक पर केस दर्ज हो गया लेकिन अन्य शिक्षकों पर चार साल में केस नहीं दर्ज हो सका। सूबे में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय से लेकर सरकारी स्कूलों में फर्जी शिक्षकों का मामला प्रकाश में आने पर शासन ने सख्त तेवर अपनाए। एक दशक में बर्खास्त शिक्षकों पर हुई कार्रवाई की सूची तलब की तो अफसरों के होश ठिकाने आ गए। अब आनन-फानन में बर्खास्त तीन शिक्षकों पर मुकदमा दर्ज कराने की कवायद शुरू हो गई। विभागीय स्तर से थानों में तहरीर दी जा रही है। सूत्रों की माने तो खंड शिक्षा अधिकारियों से तालमेल बनाने से चार साल तक बर्खास्त शिक्षकों पर केस दर्ज नहीं हो सका।
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जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह ने कहा कि फर्जी अभिलेख के मामले में चार साल पूर्व चार शिक्षक बर्खास्त हुए थे। पुलिस की उदासीनता से मुकदमा नहीं दर्ज हुआ। अब मामले में तहरीर दी जा रही है।
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प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में पठन-पाठन के लिए हर साल शासन स्तर से शिक्षकों की नियुक्त की जाती है। एक साथ 60 से 70 हजार शिक्षक भर्ती में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी फर्जी अभिलेख लगाकर नौकरी प्राप्त कर लेते हैं। सत्यापन में जब तक मामला सामने आता है तब तक वे चार से पांच साल की नौकरी पूर्ण कर लेते हैं। वर्ष 2015 में सत्यापन के दौरान जिले के डीघ ब्लॉक के वैंकुठपट्टी, प्राथमिक विद्यालय मोढ़ समेत चार स्कूलों के शिक्षकों के सीटेट के अभिलेख फर्जी पाए गए थे। तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सत्य प्रकाश त्रिपाठी ने चारों शिक्षकों को बर्खास्त कर मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया।
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डीघ ब्लॉक के वैकुंठपट्टी के बर्खास्त शिक्षक पर केस दर्ज हो गया लेकिन अन्य शिक्षकों पर चार साल में केस नहीं दर्ज हो सका। सूबे में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय से लेकर सरकारी स्कूलों में फर्जी शिक्षकों का मामला प्रकाश में आने पर शासन ने सख्त तेवर अपनाए। एक दशक में बर्खास्त शिक्षकों पर हुई कार्रवाई की सूची तलब की तो अफसरों के होश ठिकाने आ गए। अब आनन-फानन में बर्खास्त तीन शिक्षकों पर मुकदमा दर्ज कराने की कवायद शुरू हो गई। विभागीय स्तर से थानों में तहरीर दी जा रही है। सूत्रों की माने तो खंड शिक्षा अधिकारियों से तालमेल बनाने से चार साल तक बर्खास्त शिक्षकों पर केस दर्ज नहीं हो सका।
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जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह ने कहा कि फर्जी अभिलेख के मामले में चार साल पूर्व चार शिक्षक बर्खास्त हुए थे। पुलिस की उदासीनता से मुकदमा नहीं दर्ज हुआ। अब मामले में तहरीर दी जा रही है।