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इस साल का टूटा रिकॉर्ड, 42.7 डिग्री पहुंचा तापमान
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कालीन नगरी में प्रचंड गर्मी ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। शनिवार को अधिकतम तापमान 42.7 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। इस सीजन का अब तक का यह सबसे ज्यादा तापमान है। मौसम विशेषज्ञ आने वाले दिनों में तापमान में और वृद्धि होने की संभावना जताई है।
उधर, शनिवार को तेज धूप होने की वजह दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। उधर, प्रचंड गर्मी व लू के कारण चिकित्सालयों में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। लू की वजह से हीट स्ट्रोक का डर लोगों में बना हुआ है। मौसम विभाग के मुताबिक इस तरह का मौसम अमूमन अप्रैल के अंतिम सप्ताह में देखा जाता था। चिकित्सकों का कहना है कि लू लगने का मतलब शरीर में पानी की मात्रा कम होने से है। तपती धूप के कारण इंसान के साथ ही पशु पक्षी भी बेहाल हैं। छुट्टा पशु छांव की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। लोग अपने कामकाज के सिलसिले में सुबह जल्दी निकलते हैं। बीते शुक्रवार को अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया था, जबकि शनिवार को अधिकतम तापमान 42.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शनिवार को न्यूनतम तापमान 19.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। महाराजा चेतसिंह चिकित्सालय के फीजिशियन डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला का कहना है कि गर्मी अधिक पड़ रही है। इस मौसम में खासकर बच्चों के प्रति अभिभावक को सावधानी बरतने की जरूरत है।
चिकित्सकों का कहना है कि गर्मी के दिनों में घर से बाहर निकलने से पहले मुंह को रुमाल से बांधें, साथ ही पास में चश्मा रखें। इससे आंख सुरक्षित रहेगी। कहीं बाहर से आने पर थोड़ी देर विश्राम करें, उसके बाद हाथ पैर धुलें, फिर पानी पिएं। बाहर से आने पर ठंडा पानी न पिएं। भोजन के साथ सलाद का जरूर सेवन करें। नीबू पानी का शर्बत लें, सादा पानी पिएं, फल का उपयोग करें। जीरा, छाछ, दही, मट्ठा, जल जीरा, लस्सी आदि का उपयोग करने से शरीर ठंडा रहता है। गर्मी के दिनों में ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं। एक आदमी को दिन भर में कम से कम पांच लिटर पानी पीना चाहिए। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होगी। चिकित्सक बताते हैं कि लू लगने पर शरीर में तापमान की मात्रा बढ़ जाती है। उसके बाद शरीर में पानी और नमक की कमी हो जाती है। लू लगने पर शरीर में गर्मी का आभास होने लगता है। थकावट महसूस होने लगती है और जल्दी-जल्दी प्यास लगती है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला का कहना है कि गर्मी तेजी के साथ बढ़ रही है। हर किसी को सावधानी बरतने की जरूरत है। इस मौसम में शरीर में ग्लूकोज की मात्रा अधिक होनी चाहिए। इससे बचाव ही सबसे बड़ा उपचार है।
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उधर, शनिवार को तेज धूप होने की वजह दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। उधर, प्रचंड गर्मी व लू के कारण चिकित्सालयों में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। लू की वजह से हीट स्ट्रोक का डर लोगों में बना हुआ है। मौसम विभाग के मुताबिक इस तरह का मौसम अमूमन अप्रैल के अंतिम सप्ताह में देखा जाता था। चिकित्सकों का कहना है कि लू लगने का मतलब शरीर में पानी की मात्रा कम होने से है। तपती धूप के कारण इंसान के साथ ही पशु पक्षी भी बेहाल हैं। छुट्टा पशु छांव की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। लोग अपने कामकाज के सिलसिले में सुबह जल्दी निकलते हैं। बीते शुक्रवार को अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया था, जबकि शनिवार को अधिकतम तापमान 42.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शनिवार को न्यूनतम तापमान 19.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। महाराजा चेतसिंह चिकित्सालय के फीजिशियन डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला का कहना है कि गर्मी अधिक पड़ रही है। इस मौसम में खासकर बच्चों के प्रति अभिभावक को सावधानी बरतने की जरूरत है।
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चिकित्सकों का कहना है कि गर्मी के दिनों में घर से बाहर निकलने से पहले मुंह को रुमाल से बांधें, साथ ही पास में चश्मा रखें। इससे आंख सुरक्षित रहेगी। कहीं बाहर से आने पर थोड़ी देर विश्राम करें, उसके बाद हाथ पैर धुलें, फिर पानी पिएं। बाहर से आने पर ठंडा पानी न पिएं। भोजन के साथ सलाद का जरूर सेवन करें। नीबू पानी का शर्बत लें, सादा पानी पिएं, फल का उपयोग करें। जीरा, छाछ, दही, मट्ठा, जल जीरा, लस्सी आदि का उपयोग करने से शरीर ठंडा रहता है। गर्मी के दिनों में ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं। एक आदमी को दिन भर में कम से कम पांच लिटर पानी पीना चाहिए। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होगी। चिकित्सक बताते हैं कि लू लगने पर शरीर में तापमान की मात्रा बढ़ जाती है। उसके बाद शरीर में पानी और नमक की कमी हो जाती है। लू लगने पर शरीर में गर्मी का आभास होने लगता है। थकावट महसूस होने लगती है और जल्दी-जल्दी प्यास लगती है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला का कहना है कि गर्मी तेजी के साथ बढ़ रही है। हर किसी को सावधानी बरतने की जरूरत है। इस मौसम में शरीर में ग्लूकोज की मात्रा अधिक होनी चाहिए। इससे बचाव ही सबसे बड़ा उपचार है।
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