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अवसाद के शिकार हो रहे कालीन नगरी के युवा
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विश्व में तेजी से फैल रहे डिप्रेशन (अवसाद) की बीमारी से कालीन नगरी भदोही भी अछूती नहीं है। 20 से 30 साल के युवा सबसे अधिक इसके शिकार हो रहे हैं। कोरोना काल में सबसे अधिक लोग इससे प्रभावित हुए। अवसाद के कारण कुछ लोगों ने आत्महत्या जैसे खतरनाक कदम भी उठाकर अपनी इहलीला को ही समाप्त कर दी।
बदलती जीवन शैली और भागमभाग की जिंदगी में आज का युवा डिप्रेशन का शिकार होता जा रहा है। युवाओं में मनोरोग तेजी से पांव पसार रहा है। डिप्रेशन के कारण कुंठा, अवसाद, चिडचिड़ापन यहां तक कि आत्महत्याओं का ग्राफ भी दिनो-दिन बढ़ता जा रहा है। अधिक कमाने और अधिक सहेजने की होड़ में युवा खोता जा रहा है। संयुक्त परिवार का विघटन, नौकरी में लक्ष्य प्राप्ति के लिए अत्यधिक दबाव, अनावश्यक प्रतिस्पर्धा, दूसरे के सुख से दुबले होना आदि ऐसी प्रवृत्तियां विकसित होती जा रही हैं, जिनमें व्यक्ति कुंठाग्रस्त होकर डिप्रेशन का शिकार हो रहा है।
महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय के मनोरोग चिकित्सक डॉ. अशोक पारासर की माने तो बेरोजगारी, खर्च, आर्थिक समस्या, पढ़ाई और पारिवारिक कारणों से 20 से 30 साल के युवा डिप्रेशन के अधिक शिकार हो रहे हैं। तनाव न सह पाने के कारण वह आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना के कारण अवसाद का ग्राफ बढ़ा है। तीन माह में दो ऐसे व्यक्ति उनके पास आए जो आत्महत्या की सोच रहे थे, लेकिन काउंसिलिंग और दवाओं से आज वह ठीक हो चुके हैं। उनका मानना है कि 100 व्यक्तियों में 10 अवसाद से ग्रसित हैं।
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बदलती जीवन शैली और भागमभाग की जिंदगी में आज का युवा डिप्रेशन का शिकार होता जा रहा है। युवाओं में मनोरोग तेजी से पांव पसार रहा है। डिप्रेशन के कारण कुंठा, अवसाद, चिडचिड़ापन यहां तक कि आत्महत्याओं का ग्राफ भी दिनो-दिन बढ़ता जा रहा है। अधिक कमाने और अधिक सहेजने की होड़ में युवा खोता जा रहा है। संयुक्त परिवार का विघटन, नौकरी में लक्ष्य प्राप्ति के लिए अत्यधिक दबाव, अनावश्यक प्रतिस्पर्धा, दूसरे के सुख से दुबले होना आदि ऐसी प्रवृत्तियां विकसित होती जा रही हैं, जिनमें व्यक्ति कुंठाग्रस्त होकर डिप्रेशन का शिकार हो रहा है।
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महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय के मनोरोग चिकित्सक डॉ. अशोक पारासर की माने तो बेरोजगारी, खर्च, आर्थिक समस्या, पढ़ाई और पारिवारिक कारणों से 20 से 30 साल के युवा डिप्रेशन के अधिक शिकार हो रहे हैं। तनाव न सह पाने के कारण वह आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना के कारण अवसाद का ग्राफ बढ़ा है। तीन माह में दो ऐसे व्यक्ति उनके पास आए जो आत्महत्या की सोच रहे थे, लेकिन काउंसिलिंग और दवाओं से आज वह ठीक हो चुके हैं। उनका मानना है कि 100 व्यक्तियों में 10 अवसाद से ग्रसित हैं।
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