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मौसम रहेगा साफ, कर लें रबी की बुवाई
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ज्ञानपुर। इस सप्ताह मौसम साफ रहेगा। तापमान में क्रमिक गिरावट होगी और सुबह-शाम धुंध रहेगी। ऐसे मौसम में रबी की फसल की बुवाई के लिए पूरा मौका है। मौसम के जानकारों के मुताबिक किसानों को खेतों में नमी का ध्यान रखते हुए चने, मटर, मसूर आदि की बुवाई कर देनी चाहिए। जबकि गेहूं के खेत तैयार करने के लिए भी यह मुफीद समय है।
कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के कृषि मौसम विशेषज्ञ सर्वेश बरनवाल आने वाले सप्ताह में अधिकतम तापमान 30 से 33 डिग्री सेल्शियस और न्यूनतम तापमान 15 से 16 डिग्री रहेगा। तापमान में गिरावट के साथ मौसम साफ रहेगा। मौसम को देखते हुए किसानों को फसलों की कटाई कर लेनी चाहिए। चना, मसूर, सरसों, मटर आदि की बुवाई कर देनी चाहिए। गेहूं की बुवाई से पूर्व प्रति किग्रा बीज को कार्बेंडाजिम की दो ग्राम मात्रा की दर से उपचारित करना चाहिए। जबकि आलू के प्रति किलो बीज को डायथेन एम-45 की तीन ग्राम मात्रा से उपचारित करना चाहिए। बताया कि सब्जियों के खेत में नमी कम देखते हुए शाम को हल्की सिंचाई करनी चाहिए। डॉ. बरनवाल ने बताया कि चने की बुवाई से पूर्व मिट्टी में उचित नमी का ध्यान अवश्य रखें। छोटी एवं मध्यम आकार के दाने वाली किस्मों के लिए 60 से 80 किग्रा बीज प्रति हेक्टेयर की जरूरत पड़ती है, जबकि बड़े दाने वाला बीज 80 से 100 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से बोया जाना चाहिए। इस समय लहसुन की बुवाई भी की जा सकती है।
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कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के कृषि मौसम विशेषज्ञ सर्वेश बरनवाल आने वाले सप्ताह में अधिकतम तापमान 30 से 33 डिग्री सेल्शियस और न्यूनतम तापमान 15 से 16 डिग्री रहेगा। तापमान में गिरावट के साथ मौसम साफ रहेगा। मौसम को देखते हुए किसानों को फसलों की कटाई कर लेनी चाहिए। चना, मसूर, सरसों, मटर आदि की बुवाई कर देनी चाहिए। गेहूं की बुवाई से पूर्व प्रति किग्रा बीज को कार्बेंडाजिम की दो ग्राम मात्रा की दर से उपचारित करना चाहिए। जबकि आलू के प्रति किलो बीज को डायथेन एम-45 की तीन ग्राम मात्रा से उपचारित करना चाहिए। बताया कि सब्जियों के खेत में नमी कम देखते हुए शाम को हल्की सिंचाई करनी चाहिए। डॉ. बरनवाल ने बताया कि चने की बुवाई से पूर्व मिट्टी में उचित नमी का ध्यान अवश्य रखें। छोटी एवं मध्यम आकार के दाने वाली किस्मों के लिए 60 से 80 किग्रा बीज प्रति हेक्टेयर की जरूरत पड़ती है, जबकि बड़े दाने वाला बीज 80 से 100 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से बोया जाना चाहिए। इस समय लहसुन की बुवाई भी की जा सकती है।
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