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Bhadohi News: मोक्षधाम तक पहुंचने में विकास की अग्निपरीक्षा, कीचड़ में फंसी व्यवस्था
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बदहाल पड़ा बिहरोजपुर अंत्येष्ठि स्थल का मार्ग। संवाद
सीतामढ़ी/कौलापुर। कालीन नगरी में विकास के दावे कागजों में दौड़ते हैं, लेकिन मोक्षधाम तक जाने वाली सड़कों पर कीचड़ है। मोक्षधाम तक पहुंचने के लिए अग्निपरीक्षा देनी पड़ती है। हालत यह है कि अंतिम सफर पर निकले व्यक्ति को भी मुक्ति आसानी से नहीं मिल पा रही। परिजनों को अर्थी कीचड़ से होकर ले जानी पड़ रही है। ग्राम पंचायतों की उदासीनता से गंगा किनारे बने अंत्येष्टि स्थल तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। जिले में 45 किलोमीटर परिक्षेत्र में गंगा का दायरा है। साल 2014 में भाजपा सरकार बनने के बाद गंगा को निर्मल एवं अविरल बनाने की मुहिम शुरू की गई। नमामि गंगे योजना के तहत गंगा के किनारे शवदाह रोकने के लिए उससे सटे ग्राम पंचायतों में शवदाह गृह यानी अंत्येष्टि स्थल बनाने की योजना शुरू हुई।
2015-16 में गोपालापुर कलिंजरा, सेमराध, सीतामढ़ी, बरजी, बदरी, बिहरोजपुर, बेरासपुर, मवैया थान सिंह, दुगुना, खेमापुर सहित 21 ग्राम पंचायतों में इसका निर्माण शुरू हुआ। प्रत्येक अंत्येष्टि स्थल के निर्माण पर 15 लाख रुपये खर्च हुए। साल 2022-23 में तीन अन्य अंत्येष्टि स्थल 24-24 लाख से बनाए गए। बृहस्पतिवार को हमारी टीम ने सीतामढ़ी, बिहरोजपुर, कौलापुर, बेरासपुर, बरजी और बदरी के अंत्येष्टि स्थलों की पड़ताल की तो स्थिति काफी खराब मिली। निर्माण के समय प्रधान, सचिव और अन्य विभागीय अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। यहां बिजली, पानी सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। बारिश में कीचड़ और गंदगी भरी सड़कें लोगों की समस्या और भी बढ़ा रहीं हैं। जिससे शव लेकर आने वाले लोग मुक्तिधाम पर रुकने की बजाय गंगा के किनारे ही शवदाह कर रहे हैं।
तीन दशक से नहीं हुआ सड़क का रखरखाव
सीतामढ़ी के श्मशान घाट तक जाने के लिए तीन दशक पूर्व जिला पंचायत से एक किलोमीटर लंबी सड़क बनाई गई। उसके बाद आज तक ध्यान नहीं दिया गया। सड़क पर शवों को लेकर जाना इतना कठिन हो गया कि लोगों ने रास्ता ही बदल लिया। अब गंगा में आई बाढ़ के कारण वह मार्ग भी जलमग्न हो गया है। अंत्येष्टि स्थल भी जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुका है।
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बिहरोजपुर में कीचड़ से होकर पहुंच रहे लोग
डीघ के बिहरोजपुर गंगा घाट पर अंत्येष्टि स्थल तक पहुंचना मुश्किल भरा है। शव लेकर आने वाले लोग कीचड़युक्त मार्ग से किसी तरह जाते हैं। इस दौरान कई बार लोग फिसलकर गिर भी जाते हैं। यहां भी बना अंत्येष्टि स्थल बेकार हो चुका है। जरूरी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं।
रामपुर घाट को छोड़ सभी की हालत खराब
जिले में गंगा के किनारे कुल 24 अंत्येष्टि स्थल बनाए गए हैं। जिनके निर्माण पर साढ़े तीन करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च की गई। रामपुर घाट और सीतामढ़ी को छोड़ दिया जाए तो अन्य पर प्रतिदिन एक या दो ही शव पहुंचते हैं। रामपुर और सीतामढ़ी में औसतन प्रतिदिन पांच से आठ शव पहुंचते हैं। रामपुर घाट को छोड़ दिया जाए तो अन्य अंत्येष्टि स्थलों की हालत काफी खराब है।
अंत्येष्टि स्थल जाने वाली जर्जर सड़क के निर्माण के लिए कई बार शिकायत की गई। किसी ने ध्यान नहीं दिया। जिला प्रशासन का दायित्व होता है कि जनहित के कार्यों को प्राथमिकता से कराया जाए। आज समस्या खड़ी हो गई है। - हरिप्रसाद मिश्र, महंत, वाल्मीकि आश्रम
अंत्येष्टि स्थल की चहारदीवारी गिर गई है। ध्यान नहीं दिया गया तो दो रूम भी गिर सकते हैं। स्थल तक जाने के लिए मार्ग नहीं है। इसका निर्माण कराया जाना जरूरी है। - श्यामबहादुर सिंह, नारेपार
अंत्येष्टि स्थल तक जाने के लिए सभी स्थानों पर मार्ग हैं। कुछ जगह पर कीचड़ और गंदगी की बात सामने आई है। आगामी कार्ययोजना में इंटरलॉकिंग या खड़ंजा का काम कराया जाएगा। - डॉ. सपना अवस्थी, प्रभारी डीपीआरओ
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2015-16 में गोपालापुर कलिंजरा, सेमराध, सीतामढ़ी, बरजी, बदरी, बिहरोजपुर, बेरासपुर, मवैया थान सिंह, दुगुना, खेमापुर सहित 21 ग्राम पंचायतों में इसका निर्माण शुरू हुआ। प्रत्येक अंत्येष्टि स्थल के निर्माण पर 15 लाख रुपये खर्च हुए। साल 2022-23 में तीन अन्य अंत्येष्टि स्थल 24-24 लाख से बनाए गए। बृहस्पतिवार को हमारी टीम ने सीतामढ़ी, बिहरोजपुर, कौलापुर, बेरासपुर, बरजी और बदरी के अंत्येष्टि स्थलों की पड़ताल की तो स्थिति काफी खराब मिली। निर्माण के समय प्रधान, सचिव और अन्य विभागीय अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। यहां बिजली, पानी सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। बारिश में कीचड़ और गंदगी भरी सड़कें लोगों की समस्या और भी बढ़ा रहीं हैं। जिससे शव लेकर आने वाले लोग मुक्तिधाम पर रुकने की बजाय गंगा के किनारे ही शवदाह कर रहे हैं।
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तीन दशक से नहीं हुआ सड़क का रखरखाव
सीतामढ़ी के श्मशान घाट तक जाने के लिए तीन दशक पूर्व जिला पंचायत से एक किलोमीटर लंबी सड़क बनाई गई। उसके बाद आज तक ध्यान नहीं दिया गया। सड़क पर शवों को लेकर जाना इतना कठिन हो गया कि लोगों ने रास्ता ही बदल लिया। अब गंगा में आई बाढ़ के कारण वह मार्ग भी जलमग्न हो गया है। अंत्येष्टि स्थल भी जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुका है।
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बिहरोजपुर में कीचड़ से होकर पहुंच रहे लोग
डीघ के बिहरोजपुर गंगा घाट पर अंत्येष्टि स्थल तक पहुंचना मुश्किल भरा है। शव लेकर आने वाले लोग कीचड़युक्त मार्ग से किसी तरह जाते हैं। इस दौरान कई बार लोग फिसलकर गिर भी जाते हैं। यहां भी बना अंत्येष्टि स्थल बेकार हो चुका है। जरूरी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं।
रामपुर घाट को छोड़ सभी की हालत खराब
जिले में गंगा के किनारे कुल 24 अंत्येष्टि स्थल बनाए गए हैं। जिनके निर्माण पर साढ़े तीन करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च की गई। रामपुर घाट और सीतामढ़ी को छोड़ दिया जाए तो अन्य पर प्रतिदिन एक या दो ही शव पहुंचते हैं। रामपुर और सीतामढ़ी में औसतन प्रतिदिन पांच से आठ शव पहुंचते हैं। रामपुर घाट को छोड़ दिया जाए तो अन्य अंत्येष्टि स्थलों की हालत काफी खराब है।
अंत्येष्टि स्थल जाने वाली जर्जर सड़क के निर्माण के लिए कई बार शिकायत की गई। किसी ने ध्यान नहीं दिया। जिला प्रशासन का दायित्व होता है कि जनहित के कार्यों को प्राथमिकता से कराया जाए। आज समस्या खड़ी हो गई है। - हरिप्रसाद मिश्र, महंत, वाल्मीकि आश्रम
अंत्येष्टि स्थल की चहारदीवारी गिर गई है। ध्यान नहीं दिया गया तो दो रूम भी गिर सकते हैं। स्थल तक जाने के लिए मार्ग नहीं है। इसका निर्माण कराया जाना जरूरी है। - श्यामबहादुर सिंह, नारेपार
अंत्येष्टि स्थल तक जाने के लिए सभी स्थानों पर मार्ग हैं। कुछ जगह पर कीचड़ और गंदगी की बात सामने आई है। आगामी कार्ययोजना में इंटरलॉकिंग या खड़ंजा का काम कराया जाएगा। - डॉ. सपना अवस्थी, प्रभारी डीपीआरओ